गुजरात के पास भारत आ रहे जहाज पर ईरानी ड्रोन से हमला, अरब सागर में नये 'आतंक' पर अमेरिका का बयान
Drone Attack in Arabian Sea: गुजरात तट के पास अरब सागर में एक 23 लोगों के चालक दल वाले एक व्यापारिक जहाज, जिसमें 21 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे, उसपर हुए हमले के एक दिन बात अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमंट ने कहा है, कि ड्रोन हमला ईरान से शुरू किया गया था।
पेंटागन के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, कि "मोटर जहाज CHEM प्लूटो, जिसपर लाइबेरिया का झंडा लगा हुआ था, वो जहाज जापानी स्वामित्व वाला था, जो नीदरलैंड से ऑपरेट होता है।

अमेरिकी प्रवक्ता ने कहा, कि इस जहाज में रासायनिक टैंकर रखे हुए थे और स्थानीय समयानुसार लगभग 10 बजे (6 बजे GMT) हिंद महासागर में, भारत के तट से 200 समुद्री मील दूर, उससे ड्रोन टकरा गया।
पेंटागन के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, ईरान की तरफ से ये ड्रोन हमला किया गया था।
भारतीय नौसेना ने लाइबेरिया के झंडे वाले वाणिज्यिक जहाज केम प्लूटो की सहायता के लिए एक P8I समुद्री गश्ती विमान और एक युद्धपोत भेजा था, जिसके बारे में समझा जाता है, कि उसने 19 दिसंबर को सऊदी अरब के अल जुबैल से कच्चा तेल लेकर अपनी यात्रा शुरू की थी और ये 25 दिसंबर को न्यू मैंगलोर पहुंचने वाली थी।
बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि समुद्री सुरक्षा फर्म एंब्रे के अनुसार, टैंकर का संबंध इज़राइल से था। इसमें एंब्रे के हवाले से कहा गया है, कि घटना "उस क्षेत्र में हुई, जिसे कंपनी ईरानी ड्रोन के लिए एक बढ़ा हुआ खतरा क्षेत्र मानती थी।"
एक अधिकारी ने कहा, "शिपिंग कंपनी द्वारा भारतीय नौसेना से सहायता मांगने के अनुरोध के बाद भारतीय नौसेना ने मदद भेजी थी।"
यह घटना 7 अक्टूबर को इज़राइल पर हमास के हमले के बाद बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और शिपिंग लेन के लिए नए खतरे को उजागर करती है। ईरानी सरकार, साथ ही यमन में उसके सहयोगी आतंकवादी बलों ने गाजा में इजरायली सरकार के सैन्य अभियान की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है। सहायता निगरानीकर्ताओं के अनुसार, जारी संघर्ष में हजारों फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं।
पेंटागन के बयान में कहा गया है, कि यह "2021 के बाद से वाणिज्यिक शिपिंग पर सातवां ईरानी हमला है।"
संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रवक्ता ने फिलहाल टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया।
लाल सागर में हौथी हमलों के कारण, कई शिपिंग कंपनियां अपने मालवाहक जहाजों को लंबे मार्गों से स्थानांतरित कर रही हैं, जिससे ईंधन की लागत बढ़ रही है।












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