Explainer: ईरान में आज संसदीय चुनाव और धार्मिक नेताओं को चुनने के लिए डाले जा रहे वोट.. जानिए सबकुछ

Iran Election 2024: ईरान में आज संसद के साथ साथ उन राजनीतिक और धार्मिक नेताओं को चुनने के लिए मतदान किया जाएगा, जो देश के लिए अगले सर्वोच्च नेता का चुनाव करेंगे। पिछले दो सालों में भीषण प्रदर्शन झेलने वाले ईरान के लिए ये चुनाव करवाना काफी मुश्किल माना जा रहा है।

ईरान में आज दो अलग-अलग चुनाव हो रहे हैं। एक चुनान नये सांसदों को चुनने के लिए हो रहे हैं, जबकि दूसरा चुनाव विशेषज्ञों की सभा को चुनने लिए हो रहे हैं, जो एक निकाय का निर्माण करता है, जिसका काम इस्लामी गणतंत्र के सर्वोच्च नेता का चयन करना है।

Iran Election 2024

हालांकि, आज के चुनाव में वोट डालने के लिए लाखों लोग पात्रता रखते हैं, लेकिन पिछले दो सालों में आर्थिक संकट और इस्लामिक सरकार को हुए मोहभंग का सीधा असर चुनाव पर पड़ने की आशंका है, लिहाजा वोटिंग प्रतिशत काफी कम रह सकता है।

ईरान में कैसे होते हैं इलेक्शन?

भारत की तरह ही ईरान में वोट डालने के लिए मतदाताओं को उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। ईरान की 8 करोड़ 50 लाख लोगों की आबादी में करीब 6 करोड़ 10 लाख लोग चुनाव डालने योग्य हैं। पूरे ईरान में स्थानीय समय के मुताबिक, सुबह 8 बजे वोटिंग शुरू हो जाता है और अगले 10 घंटे तक मतदान केन्द्र खुले रहते हैं। हालांकि, ईरान में मतदान का वक्त लोगों की भीड़ को देखते हुए बढ़ा भी दिया जाता है और अकसर आधी रात तक लोग वोट डालते रहते हैं।

ईरानी अधिकारियों ने कहा है, कि देश भर में 59 हजार मतदान केन्द्र बनाए गये हैं, जिनमें से 5 हजार मतदान केन्द्र तेहरान में और 6800 तेहरान से सटे इलाकों में होंगे। करीब 17 वोटिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से वोट डाले जाएंगे।

ईरान गृहमंत्रालय ने शांतिपूर्वक मतदान करवाने के लिए करीब ढाई लाख सुरक्षा बलों को तैनात किया है, वहीं इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के जवानों को भी शांतिपूर्वक मतदान करवाने के लिए इलेक्शन ड्यूटी में लगाया गया है। जनवरी में ईरान में ISIS के आतंकियों ने भीषण बम धमाके किए थे और करीब 90 लोगों की हत्या कर दी थी, लिहाजा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गये हैं।

ईरान के चुनाव में आज किसे चुना जाएगा?

ईरान में आज संसद की 290 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं, जिसका कार्यकाल चार सालों का होता है। इसके अलावा, ईरानी जनता 88 मौलवियों का चयन करेंगे, जिनका कार्यकाल 8 सालों के लिए होता है, जिनका काम देश के सर्वोच्च नेता का चुनाव करना होता है।

चुनाव लड़ने के लिए जो भी उम्मीदवार नामांकन करता है, उनकी जांच गार्डियन काउंसिल नाम का एक शक्तिशाली संवैधानिक संस्था करता है। इस परिषद के आधे से ज्यादा सदस्यों को सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई चुनते हैं।

ईरान की संसद जब कोई कानून बनाती है, तो उस कानून की जांच गार्डियन काउंसिल करती है और उसके बाद ही ईरानी सरकार उस कानून को लागू कर पाती है।

क्या लोग वोट देने के लिए निकलेंगे?

ईरानी चुनाव में खड़े होने वाले ज्यादातर उम्मीदवार रूढ़िवादी और कट्टरपंथी होते हैं, लिहाजा वोटिंग प्रतिशत काफी कम रहता है। 2020 के संसदीय चुनाव में सिर्फ 42 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाला था। हालांकि, पिछले दशकों में वोटिंग प्रतिशत 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंचा है, लेकिन हालिया कुछ चुनाव में लोगों की उदासीनता बढ़ती गई है।

2021 के राष्ट्रपति चुनाव में भी सिर्फ 48 प्रतिशत मतदाताओं ने ही वोट डाले थे।

Iran Election 2024

वोटिंग प्रतिशत क्यों कम हो गया है?

माना जाता है कि 2020 में पिछले संसदीय चुनावों में कम मतदान प्रतिशत होने के कई कारण थे। 2020 का चुनाव उस वक्त हुआ था, जब अमेरिका ने ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष जनरल कासिम सोलेमानी को इराक में ड्रोन हमले में मार गिराया था। जिसके बाद खाड़ी देशों के हालात काफी बिगड़ गये थे।

कासिम सोलेमानी की मौत के बाद ईरान ने यूक्रेन जाने वाली एक यात्री विमान को दो मिसाइल हमलों में उड़ा दिया, जिसमें फ्लाइट में सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी।

इसके अलावा, पिछला चुनाव जब हुआ था, उस वक्त ईरान भी कोविड-19 के लहर में फंस गया था, और चुनाव से ठीक दो दिन पहले कोविड-19 की वजह से एक शख्स की मौत हुई थी, जिसने जनता को डरा दिया था। ईरान के सर्वोच्च नेता ने कम मतदान के लिए कोरोना वायरस को जिम्मेदार ठहराया।

इस बार के चुनाव में कौन खड़े हैं?

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार के इलेक्शन में ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबफ के फिर से चुने जाने की उम्मीद है। उन्होंने लोगों से अपने 30 सहयोगियों को वोट देने का आग्रह किया है। इस लिस्ट में 6 महिलाओं के अलावा रूढ़िवादी और कट्टरपंथी उम्मीदवार शामिल हैं।

अलजजीरा की रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसके अलावा भी चुनाव में ज्यादातर ऐसे उम्मीदवारों के ही जीतने की संभावना है, जो भारी कट्टरपंथी हैं। साल 2015 में उदारवादी राष्ट्रपति हसन रूहानी के हटने के बाद ईरान की संसद और इसके सभी शाखाओं पर रूढ़िवादियों और कट्टरपंथियों का कब्जा हो चुका है।

ईरान की संसद का देश की विदेश नीति के निर्माण में बहुत कम दखल है और उसे ज्यादातर स्थानीय मामलों को प्रभावित करने वाले नियम सौंपे जाते हैं, जिसमें अर्थव्यवस्था से संबंधित मुद्दे और दूसरे घरेलू एजेंडे में शीर्ष पर रहते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+