Iran New Supreme Leader: मोजतबा को मिला कांटों भरा ताज, ट्रंप-नेतन्याहू के खतरनाक प्लान से कैसे बचेंगे?
Iran New Supreme Leader: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपना नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल पहले ही ईरान को कड़ी चेतावनी दे चुके हैं। ट्रंप और नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा था कि अगर खामेनेई के कुनबे से कोई सुप्रीम लीडर चुना जाता है, तो संघर्ष और बढ़ जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सरकारी टीवी चैनल के हवाले से बताया गया है कि मोजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। यह घोषणा उस समय हुई है जब 28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का संघर्ष लगातार जारी है। पूरे क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

Iran New Supreme Leader: मोजतबा खामेनेई के लिए विरासत संभालना मुश्किल
Supreme Leader मोजतबा को ट्रंप की खुली चुनौती
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान ऐसा नेता चुनता है, जो अमेरिकी हितों के खिलाफ काम करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। ट्रंप ने यहां तक कहा था कि अमेरिका ऐसे किसी व्यक्ति को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वे ईरान में ऐसा नेतृत्व देखना चाहते हैं जो शांति और स्थिरता की दिशा में काम करे।
Iran Israel Conflict: नेतन्याहू भी ईरान को लगातार दे रहे चेतावनी
इसी तरह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कड़ा रुख अपनाया है। नेतन्याहू पहले ही कह चुके हैं कि ईरान का कोई भी नेता अगर अमेरिका-इजरायल विरोधी नीति अपनाता है, तो उसे खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि, इन धमकियों के बावजूद ईरान ने मोजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता चुना है।
उधर, ईरान ने अमेरिका और इजरायल की चेतावनियों को खारिज करते हुए इसे अपना आंतरिक मामला बताया है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका इस्लामिक देशों में फूट डालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकेगा नहीं।
मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर
इस बीच क्षेत्र में संघर्ष और भी तेज हो गया है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के तेल संसाधनों और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।












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