चीन-पाकिस्तान के साथ जाकर CPEC में शामिल होगा यह नया देश, भारत के लिए हो सकती है मुश्किलें
तेहरान। शी जिनपिंग का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) के तहत चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में शामिल होने के लिए ईरान ने भी अपनी दिलचस्पी दिखाई है। ईरान ने पाकिस्तान के साथ हाथ मिलाकर सीपैक प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए इच्छा व्यक्त की है। ईरान अब पाकिस्तान का साझेदार बनकर सीपैक प्रोजेक्ट में निवेश करने की सोच रहा है। ईरान के सड़क और शहरीकरण मंत्री अब्बास अखौंडी अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ ने शुक्रवार को पाकिस्तान के कराची पोर्ट ट्रस्ट का दौरा किया था।

ईरान सीपैक में शामिल होने के लिए उत्सुक
ईरान अपने बंदार अब्बास पोर्ट और पाकिस्तान के कराची पोर्ट इंटरकनेक्शन के लिए काम करने की दिलचस्पी दिखा रहा है। ईरान की दक्षिणीपूर्वी सीमा पाकिस्तान को लगती है, इसलिए ईरान को अरब सागर के रूट का प्रयोग कर पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से होकर चीन के साथ व्यापार बढ़ान में तेजी मिलेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान सीपैक प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए बहुत उत्सुक है।

चाबहार में भी पाक-चीन को मिल चुका है न्यौता
पोर्ट अब सिर्फ व्यापार के लिए ही नहीं रह गए है, यह एक रणनीतिक काम भी करने लगे है। ओमान की खाड़ी से लगे चाबहार बंदरगाह की मदद से भारत अब पाकिस्तान का रास्ता बचा कर ईरान और अफगानिस्तान के साथ एक आसान और नया व्यापारिक मार्ग अपनाएगा, जिसके लिए नई दिल्ली ने 50 करोड़ डॉलर देने की पेशकश है। लेकिन, चीन और पाकिस्तान को ईरान चाबहार पर आमंत्रित करने के संकेत दे चुका है और हर हिसाब से यह भारत के लिए सही नहीं है।

भारत को है सीपैक से आपत्ति
भारत को इस प्रोजेक्ट से आपत्ति है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान का यह आर्थिक गलियारा पीओके से होकर निकलेगा। हालांकि, चीन में भारतीय राजदूत गौतम बंबावले ने पिछले महीने मार्च में हांगकांग के न्यूज पेपर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर सीपैक प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन कर रहा है, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है। बंबावले ने कहा था, 'यह प्रोजेक्ट से देश की संप्रभुता और अखंडता का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। ऐसे में सीपैक में ईरान की एंट्री भारत के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।












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