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Iran-Israel War 2026: 6 देशों में 9 अमेरिकी बेस से कैसे ईरान की घेराबंदी? Trump-Netanyahu के टारगेट क्या-क्या?

Iran Israel War 2026 Explainer: 28 फरवरी 2026 को मध्य पूर्व में एक नया अध्याय शुरू हुआ, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले शुरू किए। यह अभियान ईरान की इस्लामी गणराज्य द्वारा उत्पन्न 'अस्तित्वगत खतरे' को समाप्त करने के मकसद से शुरू किया गया है।

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की साझेदारी में यह ऑपरेशन 'शेर की दहाड़' नाम से जाना जा रहा है। इस हमले ने क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है, जहां ईरान ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। इस एक्सप्लेनर में हम विस्तार से समझेंगे कि कैसे अमेरिका ने 6 देशों में अपने 9 प्रमुख सैन्य अड्डों के माध्यम से ईरान को रणनीतिक रूप से घेर रखा है, ट्रंप और नेतन्याहू के मुख्य लक्ष्य क्या हैं, और इस युद्ध का बैकग्राउंड और वर्तमान स्थिति क्या है। आइए जानते हैं...

Iran Israel War 2026

Iran-Israel War 2026 Netanyahu Stands: युद्ध की शुरुआत कैसे और नेतन्याहू ने क्या कहा?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में इस अभियान की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इजरायल और अमेरिका ने ईरान के 'आतंकी शासन' द्वारा पैदा किए गए अस्तित्वगत खतरे को दूर करने के लिए यह कदम उठाया है। नेतन्याहू ने हिब्रू में कहा- 'मेरे भाई-बहनों, इजरायल के नागरिकों, कुछ समय पहले इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान में आतंकी शासन द्वारा उत्पन्न अस्तित्वगत खतरे को दूर करने के लिए एक अभियान शुरू किया'। उन्होंने अपने 'महान मित्र' राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके ऐतिहासिक नेतृत्व के लिए धन्यवाद दिया।

नेतन्याहू ने ईरान के अयातुल्ला शासन पर आरोप लगाया कि पिछले 47 सालों से यह 'इजरायल मुर्दाबाद' और 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाता रहा है। इसने इजरायल और अमेरिका के नागरिकों का खून बहाया है और अपने ही लोगों का नरसंहार किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस 'खूनी आतंकी शासन' को परमाणु हथियारों से लैस होने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे पूरी मानवता को खतरा है। इस अभियान का एक प्रमुख मकसद ईरान के बहादुर लोगों को अपना भाग्य बदलने की स्थिति प्रदान करना है। उन्होंने कहा- 'ईरानी जनता के सभी वर्गों - फारसियों, कुर्दों, अजेरियों, बलूचों और अहवाजी - के लिए अत्याचार के जुए को उतार फेंकने और एक स्वतंत्र तथा शांतिप्रिय ईरान की स्थापना करने का समय आ गया है।'

नेतन्याहू ने इजरायल के नागरिकों से अपील की कि वे गृह मोर्चा कमान के निर्देशों का पालन करें। 'आने वाले दिनों में, 'शेर की दहाड़' अभियान के दौरान, हम सभी को धैर्य और आंतरिक शक्ति दिखाने की आवश्यकता होगी। हम साथ खड़े रहेंगे, साथ मिलकर लड़ेंगे और साथ मिलकर इजरायल के भविष्य को सुनिश्चित करेंगे।'

Iran-Israel War 2026 Trump Warning: ट्रंप की चेतावनी क्या?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान को 'ईरान में बड़े पैमाने पर लड़ाकू अभियान' बताया है। उन्होंने इसे 'इस बेहद दुष्ट, कट्टरपंथी तानाशाही को अमेरिका और हमारे मूल राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को खतरे में डालने से रोकने के लिए एक विशाल और निरंतर अभियान' कहा। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर एक वीडियो बयान में कहा, 'हम उनकी मिसाइलों को नष्ट कर देंगे और उनके मिसाइल उद्योग को पूरी तरह से तबाह कर देंगे। यह पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। हम उनकी नौसेना को नष्ट कर देंगे।' उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लक्ष्य ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकना है और ईरानी लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी सरकार पर कब्जा कर लें।

इस अभियान में ईरान की सेना, सरकार के प्रतीक चिन्ह और खुफिया ठिकानों को निशाना बनाया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि हमले हवाई और समुद्री माध्यमों से किए जा रहे हैं। एक प्रमुख हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के पास हुआ। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि 86 वर्षीय खामेनेई उस समय मौजूद थे या नहीं। ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बारे में कहा कि वह 'पूरी तरह स्वस्थ' हैं।

ट्रंप-नेतन्याहू के मुख्य लक्ष्य में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, नौसेना और क्षेत्रीय आतंकवादी गुटों को समर्थन देना शामिल है। ट्रंप ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि क्षेत्र के आतंकवादी गुट अब क्षेत्र या दुनिया को अस्थिर न कर सकें और अमेरिकी सेनाओं पर हमला न कर सकें। यह अभियान ऐसे समय शुरू हुआ जब वाशिंगटन और तेहरान ने परमाणु वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई थी, लेकिन ट्रंप ने ईरान के आचरण से असंतोष जताया था। अब यह स्पष्ट है कि यह ध्यान भटकाने की चाल थी।

Iran-Israel War 2026 Trump-Netanyahu के टारगेट क्या हैं?- 5 Point में

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस संयुक्त हमले के पीछे असली टारगेट क्या हैं। आधिकारिक बयानों और जमीनी घटनाक्रम को देखें तो कई स्तरों पर लक्ष्य तय दिखते हैं।

  • पहला टारगेट: ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को कमजोर करना। ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान की मिसाइल क्षमता और मिसाइल इंडस्ट्री को तबाह करना चाहते हैं, ताकि भविष्य में इजरायल या अमेरिकी ठिकानों पर खतरा कम हो।
  • दूसरा बड़ा टारगेट: ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दबाव बनाना है। अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि तेहरान परमाणु गतिविधियों को सीमित करे। सैन्य कार्रवाई को कई विश्लेषक 'मैक्सिमम प्रेशर 2.0' की रणनीति मान रहे हैं।
  • तीसरा टारगेट: ईरान समर्थित मिलिशिया नेटवर्क को कमजोर करना है। इराक, सीरिया और लेबनान में सक्रिय समूहों को लेकर इजरायल और अमेरिका पहले से चिंतित रहे हैं। इस ऑपरेशन का मकसद इन नेटवर्क्स को संदेश देना भी माना जा रहा है।
  • चौथा और सबसे विवादित टारगेट: रेजीम चेंज की संभावना। ट्रंप ने अपने बयान में इशारा किया कि ईरानी जनता को 'मौका' मिलना चाहिए कि वे अपनी किस्मत खुद तय करें। इसे कई लोग शासन परिवर्तन के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
  • पांचवां टारगेट: क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में रखना है। मिडिल इस्ट (Middle East) में सऊदी अरब और अन्य सहयोगी देशों के साथ अमेरिका का गठबंधन पहले से मजबूत है। ईरान को सीमित करना इस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

Iran-Israel War 2026 Timeline: ईरान-इजरायल युद्ध की ताजा टाइमलाइन समझें

हमलों की पहली खबर इजरायल में 28 फरवरी की सुबह 8:13 बजे आई, जब पूरे देश में सायरन बजने लगे। इससे इजरायलियों को अभियान की शुरुआत के बारे में सचेत किया गया और ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से पहले आश्रयों के पास रहने की चेतावनी दी गई। जून 2025 के 12-दिवसीय युद्ध की तरह ही यह प्रक्रिया अपनाई गई। इसके कुछ ही समय बाद, तेहरान और ईरान के अन्य स्थानों पर हमले होने की खबरें आईं। ईरानी मीडिया ने देशभर में हमलों की रिपोर्ट दी। 28 फरवरी 2026 को तेहरान में हुए विस्फोटों के बाद क्षितिज पर धुआं उठता देखा गया, जहां लोग स्तब्ध खड़े थे।

इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने कहा कि इजरायल ने 'इजरायल राज्य के लिए खतरों को खत्म करने के लिए ईरान के खिलाफ पूर्वव्यापी हमला किया है।' अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि ये हमले संयुक्त रूप से किए जा रहे हैं। इजरायल ने पूरे देश में तत्काल आपातकाल घोषित कर दिया है। आईडीएफ के होम फ्रंट कमांड ने नागरिकों को बम आश्रयों के पास रहने, गैर-जरूरी यात्रा से बचने और शैक्षणिक गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी। इजरायल ने अपना हवाई क्षेत्र नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया है।

ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। सुबह 10 बजे के आसपास इजरायल में अलर्ट और सायरन बजने लगे, क्योंकि ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागीं। एक ईरानी अधिकारी ने कहा कि तेहरान की जवाबी कार्रवाई करारा जवाब होगी। इजरायली अधिकारी ने कहा कि इजरायल कई दिनों तक चलने वाले संघर्ष की तैयारी कर रहा है।

Iran-Israel War Siege of US base: अमेरिकी बेस से ईरान की घेराबंदी

इस युद्ध में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसने क्षेत्र में लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों का विशाल बेड़ा तैनात किया है। ईरान को रणनीतिक रूप से घेरने में 6 देशों में 9 प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डों की बड़ी भूमिका है। ये देश हैं: इराक, जॉर्डन, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)। कैसे ये अड्डे ईरान के चारों ओर फैले हैं, जिससे अमेरिका को तेज प्रतिक्रिया देने की क्षमता मिलती है। आइए समझें...

ये 9 प्रमुख अड्डे हैं:

  • इराक: अल असद एयर बेस (अनबार प्रांत) - इराक में अमेरिकी सेनाओं का प्रमुख केंद्र, जहां से ईरान की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।
  • इराक: बालाद एयर बेस - लड़ाकू विमानों का आधार, जो ईरान की सीमा के निकट है।
  • जॉर्डन: मुवाफ्फक साल्टी एयर बेस (अज़राक) - गठबंधन भागीदारों का केंद्र, जहां से हवाई हमले संभव हैं।
  • कुवैत: कैंप अरिफजान - अमेरिकी सेना का लॉजिस्टिक्स हब, इराक और सीरिया के लिए स्टेजिंग एरिया।
  • कुवैत: अली अल सलेम एयर बेस - इराकी सीमा से 40 किमी दूर, 'द रॉक' के नाम से जाना जाता है।
  • कुवैत: कैंप ब्यूरिंग - 2003 इराक युद्ध के दौरान स्थापित, सेना की तैनाती के लिए उपयोगी।
  • सऊदी अरब: प्रिंस सुल्तान एयर बेस - अमेरिकी वायुसेना का प्रमुख आधार, जहां से मिसाइल रक्षा प्रणाली काम करती है।
  • बहरीन: नेवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन - अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय, फारस की खाड़ी की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण।
  • यूएई: अल धफ्रा एयर बेस (अबू धाबी के दक्षिण) - अमेरिकी वायुसेना का हब, आईएसआईएस के खिलाफ मिशनों के लिए उपयोगी।

ये अड्डे ईरान को चारों ओर से घेरते हैं, जिससे अमेरिका को रणनीतिक दबाव बनाने में मदद मिलती है। ईरान लंबे समय से अमेरिका के साथ तनाव में है, मुख्यतः परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और इजरायल से टकराव के कारण। इराक और सीरिया में अमेरिकी मौजूदगी आतंकवाद विरोधी अभियानों के नाम पर है, लेकिन इससे ईरान की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। बहरीन और यूएई में नौसैनिक उपस्थिति फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब, जॉर्डन और कुवैत के साथ अमेरिका के रक्षा समझौते हैं, जिनके तहत हथियार प्रणाली तैनात की जाती हैं।

यह घेराबंदी संभावित संघर्ष में अमेरिका को तेज प्रतिक्रिया देने की क्षमता देती है। हालांकि, अमेरिका का आधिकारिक रुख है कि इनकी मौजूदगी क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद से लड़ाई और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए है, न कि ईरान को सीधे घेरने के लिए। लेकिन वर्तमान युद्ध में ये अड्डे हमलों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

1979 Islamic Revolution Root: तनाव की जड़- 1979 की इस्लामी क्रांति

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव 1979 की इस्लामी क्रांति से शुरू हुआ। ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय मिलिशिया को समर्थन और इजरायल को धमकियां मुख्य मुद्दे हैं। 2018 में ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाला, जिससे तनाव बढ़ा। 2025 में क्षेत्रीय संघर्षों ने इस युद्ध को जन्म दिया। ईरान समर्थित गुटों और अमेरिकी हितों के बीच टकराव ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया।

Iran Internet Blackout: इंटरनेट ब्लैकआउट और आगे क्या होगा?

वैश्विक इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट लगभग पूरी तरह ठप है। नेटवर्क डेटा से पता चलता है कि राष्ट्रीय कनेक्टिविटी केवल 4 प्रतिशत है। यह घटना अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियानों के बीच हुई और पिछले साल इजरायल युद्ध के दौरान अपनाए गए उपायों से मेल खाती है। इससे ईरान में सूचना प्रवाह रुक गया है, जो शासन के लिए चुनौती है।

यह युद्ध मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। ईरान चारों ओर से अमेरिकी सैन्य साझेदारों से घिरा है, जिससे तनाव और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। भविष्य में कोई बड़ा घटनाक्रम निर्णायक साबित हो सकता है। इजरायल और अमेरिका का लक्ष्य ईरान को कमजोर करना है, लेकिन ईरान की जवाबी क्षमता से वैश्विक प्रभाव पड़ सकता है।

(इनपुट- तेहरान टाइम्स, इजरायल टाइम्स)

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