Iran-Israel: डर डर कर ईरान ने किया इजराइल पर हमला? इन 6 प्वाइंट्स में समझिए, क्यों नहीं हुआ इजराइल को नुकसान

Iran-Israel Conflict: ईरान ने पहली बार इजराइल के खिलाफ युद्ध शुरू करने की गुस्ताखी की है और ये पहली मर्तबा है, जब ईरान ने इजराइली सीमा के अंदर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को इजराइल ने आसमान में ही मार गिराया है।

इजराइली डिफेंस फोर्स ने कहा है, कि ईरानी हमले में उसके एक एयरबेस को थोड़ा नुकसान पहुंचा है, लेकिन इजराइल को कुछ ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। हालांकि, ईरान ने इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था, लेकिन संकेत मिल रहे हैं, कि इस हमले को इस तरह से डिजाइन किया गया था, कि इजराइल आसानी से मिसाइलों को आसमान में मार गिराए और इसे नुकसान ना हो।

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1979 की इस्लामी क्रांति से चली आ रही दशकों की दुश्मनी के बावजूद, ईरान ने कभी भी इजराइल पर सीधा सैन्य हमला नहीं किया था। इजराइल की सेना ने कहा कि 100 से ज्यादा ड्रोन दागे गए थे, लेकिन इजराइली डिफेंस सिस्टम ने ईरानी हमलों को नाकाम कर दिया है।

क्या ईरान ने इजराइल पर किया है डर-डरकर हमला?

1- हमले के फौरन बाद ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में अपना बयान दाखिल किया है और कहा है, कि 'अब मामले को खत्म माना जाए।' यानि, ईरान चाहता है, कि ये संघर्ष अब और ना भड़के। यानि, ये कुछ इस तरह की बात हुई, जब ईरान ने पाकिस्तानी की सीमा क्षेत्र में हमला किया और जवाब में पाकिस्तान ने ईरान में हमला किया और फिर दोनों शांत हो गये। लेकिन, क्या इजराइल ऐसा करेगा?

2- ईरान ने इजराइल के ऊपर जो ड्रोन दागे हैं, वो लंबी दूरी से धीमी गति से चलने वाले ड्रोन हैं। यानि, इसे काफी आसानी से ना सिर्फ इंटरसेप्ट किया जा सकता है, बल्कि काफी आसानी से मार गिराया जा सकता है। इसके अलावा, ईरान ने ड्रोन हमला करने के फौरन बाद ही हमले की रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी, और उस वक्त कर वो ड्रोन इजराइली सीमा क्षेत्र से काफी दूर थे, जाहिर तौर पर, इससे यही पता चलता है, कि ईरान का मकसद इजराइल को नुकसान पहुंचाना नहीं था।

3- ईरान ने जो क्रूज मिसाइल और ड्रोन इजराइल पर दागे हैं, उसका मकसद इजराइली डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचाना नहीं था। तो फिर ईरान ने ये फैसला क्यों किया? इसका मतलब साफ है, ईरान चाहता था, कि ये तनाव एक निश्चित सीमा के नीचे रहे!

4- ईरान ने जो हमला किया है, उस हमले के पैकेज में क्या था? 200 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमलों में वास्तव में कितनी बैलिस्टिक मिसाइलें थीं? यह संख्या मायने रखती है, क्योंकि बैलिस्टिक मिसाइल ही इजराइल को नुकसान पहुंचा सकती थीं और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में भी काफी ज्यादा मशक्कत करना पड़ता।

5- क्या ईरान ने केवल विशिष्ट लक्ष्यों पर हमला करने के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है? इजराइल ने स्वीकार किया है, कि देश के दक्षिणी हिस्से में एक सैन्य अड्डे पर हमला किया गया था, तो क्या बैलिस्टिक मिसाइलें केवल इसी लक्ष्य के लिए थीं या इसी तरह के एक छोटे लक्ष्य के लिए थीं?

6- क्या ईरान कम दूरी की मिसाइलों का उपयोग किया है? जिनकी मारक क्षमता काफी ज्यादा सटीक होती है? नहीं। ईरान के पास फतेह-110 मिसाइलों का इस्तेमाल करने का विकल्प मौजूद था। हिजबुल्लाह और सीरिया (एम-600 वेरिएंट) दोनों के पास स्पष्ट रूप से मिसाइलें हैं और वे घातक हमले शुरू करने के लिए अपने क्षेत्र का उपयोग कर सकते हैं।

फतेह-110 मिसाइल का इस्तेमाल न करने से पता चलता है, कि ईरान ने उस शस्त्रागार का उपयोग नहीं किया, जिससे इजराइल को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंच सकता था। इसके अलावा, फ़तेह-110 का इस्तेमाल नहीं करने से ये दावा भी खारिज हो जाएगा, कि ईरान की ये मिसाइल हकीकत में एक फ्लॉप मिसाइल है, जो इजराइली डिफेंस सिस्टम के सामने नहीं ठहर सकती है।

लेकिन, क्या इजराइल इसका जवाब नहीं देगा? हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से जो फोन पर बात की है, उसमें उन्होंने ईरानी हमले के खिलाफ जवाबी कार्रवाई नहीं करने के लिए कहा है, लेकिन इस बात की न्यूनतम उम्मीद है, कि इजराइल खामोशी के साथ इस हमले को बर्दाश्त कर ले।

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