इंसानों के लिए कब्रगाह बना ईरान, 2022 में 582 लोगों को दी फांसी, छोटी-छोटी बातों पर भी मौत की सजा
ईरान की इस्लामिक सरकार सख्त शरिया कानून के लिए कुख्यात है। वहीं, देश में पिछले साल 22 साल की कुर्द लड़की महसा अमीनी की मौत के बाद जोरदार प्रदर्शन किए गये। जिसमें 4 लोगों को फांसी दी गई।

Iran Execution: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, विरोधियों और प्रदर्शनकारियों के लिए ईरान कब्रगाह बन गया है और साल 2022 में ईरान में 582 लोगों को फांसी से लटकाया गया है।
मानवाधिकार समूहों का कहना है, कि साल 2021 के मुकाबले ईरान में साल 2022 में 75 प्रतिशत ज्यादा लोगों को मौत की सजा दी गई है।
नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) और पेरिस स्थित टुगेदर अगेंस्ट द डेथ पेनल्टी (ECPM) ने गुरुवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि पिछले साल के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के बाद चार लोगों को फांसी दी गई थी।
ईरान में बात बात पर फांसी की सजा
पिछले साल सितंबर महीने में पुलिस हिरासत में 22 साल की कुर्द लड़की महसा अमीनी की संदिग्ध मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। माना जाता है, कि महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन में 20 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल में रखा गया था।
मानवाधिकार समूहों ने कहा है, कि ईरान में साल 2021 में 333 लोगों को फांसी की सजा दी गई थी और 2022 में डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों को और फांसी दी गई और कुल मिलाकर 582 लोगों को मौत की सजा दी गई।
ईरान के मानवाधिकार डायरेक्टर महमूद अमीरी-मोघद्दाम ने कहा, कि चार प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा देने के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ से काफी सख्त प्रतिक्रिया दी गई। जिसके बाद ईरान की सरकार के लिए और लोगों को मौत की सजा देना मुश्किल हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि अगर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया नहीं दी जाती, तो और भी ज्यादा लोगों को मौत की सजा दे दी जाती।
महमूद अमीरी-मोघद्दाम ने कहा, कि ईरान की सरकार ने लोगों में भय फैलाने के लिए और सरकार के खिलाफ बोलने पर उनमें डर भरने के लिए लोगों को मौत की सजा दी गई है।
उन्होंने कहा, कि "ईरान में ज्यादातर फांसी की सजा राजनीति से प्रेरित होते हैं, जिनमें आरोपों की परवाह नहीं की जाती है।" उन्होंने कहा कि "ड्रग्स या छोटी मोटी दूसरे अपराधों पर भी लोगों को फांसी की तख्ती से लटका दिया जाता है।"
रिपोर्ट के अनुसार, विरोध शुरू होने के बाद से मारे गए लोगों में से आधे से ज्यादा लोगों को नशीली दवाओं से संबंधित आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई थी। 2022 में, हत्या के आरोपों में 49% फांसी दी गई थी।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है, कि अपराधों की सजा सुनाने में पारदर्शिता की भारी कमी होती है। उन्होंने कहा, कि सभी मृत्युदंडों में से 88% से अधिक और नशीली दवाओं से संबंधित हैं, जिनमें से 99% मामले में अधिकारियों के द्वारा उनके अपराध साबित नहीं किए गये।












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