इजरायली संसद में भाषण दे रहे थे Donald Trump, दो सांसदों ने काटा बवाल, अमेरिकी राष्ट्रपति का विरोध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इज़राइल की संसद में भाषण दे रहे थे। इसी दौरान दो सांसदों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए हंगामा किया। इन सांसदों की पहचान एमान ओदेह और ओफर कासिफ के रूप में हुई है। दोनों सांसदों ने ट्रंप के सामने "Genocide" (नरसंहार) का साइन दिखाया और उनकी ओर बढ़ने की कोशिश की। हालांकि, इससे पहले कि वे ट्रंप तक पहुंच पाते, संसद मार्शलों ने उन्हें रोककर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस घटना को ट्रंप ने अनदेखा करते हुए अपना भाषण जारी रखा।
फिलिस्तीन को मान्यता देने की मांग
इज़राइली संसद में हदश-ताअल पार्टी के अध्यक्ष आयमेन ओदेह ने ट्रंप के भाषण के दौरान एक तख्ती दिखाई, जिस पर लिखा था - "फिलिस्तीन को मान्यता दो।" इसी पार्टी के एक अन्य सांसद ओफर कासिफ ने भी तख्ती उठाने की कोशिश की। लेकिन सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को संसद भवन से बाहर निकाल दिया। ट्रंप ने घटना के बाद भी अपने संबोधन में कोई व्यवधान नहीं आने दिया।

नोबल न सही, कुछ और सही
इज़राइल के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से डोनाल्ड ट्रंप को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान "योसी मत्तित्याहू" दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, पहले यह चर्चा थी कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिया जा सकता है, लेकिन यह सम्मान वेनेज़ुएला की मारिया कोरिना मचाडो को मिला।
ओबामा भी ले चुके है यह सम्मान
ट्रंप से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी इज़राइल का यह सर्वोच्च सम्मान दिया जा चुका है। यह पुरस्कार वर्ष 2012 में 'प्रेसीडेंशियल मेडल ऑफ ऑनर' के रूप में स्थापित किया गया था, जो सामाजिक, प्रगतिशील और शांति स्थापना कार्यों के लिए दिया जाता है।
क्यों मिला ट्रंप को सम्मान?
डोनाल्ड ट्रंप को यह सम्मान हमास-इज़राइल युद्ध में मध्यस्थता और सीजफायर लागू कराने की कोशिशों के लिए दिया गया। पिछले दो सालों से जारी इस युद्ध को रोकने में ट्रंप ने नेतन्याहू सरकार से सीधी बातचीत की थी। इस जंग में इज़राइल ने हमास के 48 नागरिकों को बंधक बनाया, जिनमें से अब केवल करीब 20 लोग ही जीवित हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी कहा था कि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। कई पश्चिमी देशों ने भी इस पहल का समर्थन किया था। ट्रंप को गाज़ा, फिलिस्तीन, इज़राइल-ईरान जंग और रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए की गई उनकी कूटनीतिक कोशिशों के कारण "विश्व के सबसे प्रभावशाली नेता" के रूप में सराहा गया।
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