कोरोना से हुई चीन की अंतरराष्ट्रीय बदनामी, क्या पटखनी दे सकता है भारत?

कोरोना से हुई चीन की अंतर्राष्ट्रीय बदनामी, क्या पटखनी दे सकता है भारत?

क्या चीन को पटखनी देने के लिए भारत के पास ये सबसे मुनासिब मौका है ? क्या चीन के फरेब से नाराज दुनिया अब भारत की तरफ आशा भरी नजरों से देख रही है ? आर्थिक विशेषज्ञों की राय है कि भारत, चीन को पछाड़ कर वर्ल्ड सप्लाई चेन पर कब्जा कर सकता है। अगर चीन आर्थिक रूप से टूट गया तो वह सामरिक रूप से भी टूट जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चीन विरोधी भावना भारत की इस कोशिश को आसान कर देगी। इस समय भारत सीमा विवाद पर भी चीन को बैकफुट पर धकेल सकता है। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश चीन से नाराज हैं। इस स्थिति में चीन, भारत के प्रति आक्रामक नीति नहीं अपना सकता। चीन को पहली बार इतना बड़ा अंतर्राष्ट्रीय दबाव झेलना पड़ रहा है।

क्या अमेरिका और चीन में युद्ध होगा?

क्या अमेरिका और चीन में युद्ध होगा?

समाचार एजेंसी रायटर ने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है, "कोरोना के कारण चीन विरोधी भावनाएं अपने चरम बिंदु पर हैं। अधिकांश देशों की राय है कि चीन ने कोरोना वायरस की जानकारी छिपायी जिसकी वजह से स्थिति इतनी भयावह हो गयी। इस रिपोर्ट में कहा गया कि चीन को अमेरिका के साथ सबसे भयंकर युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।" इससे चीन की चिंता बढ़ी है। चीन के खिलाफ विश्वजनमत तैयार होने से एशिया के शक्ति और व्यापार का संतुलन प्रभावित हुआ है। चीन से व्यापारिक रिश्ते रखने वाले अधिकतर देश अब उस पर भरोसा नहीं कर रहे। चीन से बिजनेस रिलेशन के कारण ही दुनिया के कई हिस्सों में कोरोना फैला। चीन की साख खत्म होने से विश्व व्यापार में एक शून्य पैदा हो रहा है। कोरोना लॉकडाउन से चीन की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है। अगर चीन की आर्थिक शक्ति खत्म हो जाएगी तो इसकी सामरिक शक्ति किसी काम की नहीं रहेगी। यही वह समय है जब भारत चीन से आगे निकल सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत चीन के खाली किये हुए स्थान को भर सकता है। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल की राय है कि भारत इंजीनियरिंग और चमड़ा उत्पाद से जुड़े निर्यात में चीन के खाली स्थान को भर सकता है।

चीन के खिलाफ जनमत और व्यापार

चीन के खिलाफ जनमत और व्यापार

कोरोना का विस्फोट सबसे चीनी शहर वुहान में हुआ था। इस घातक वायरस से दुनिया में 2 लाख अस्सी हजार लोग मर चुके हैं। सबसे अधिक अमेरिका में जनहानि हुई है। अमेरिका में 81 हजार से अधिक लोग कोरोना से जान गंवा चुके हैं। इसलिए चीन के खिलाफ सबसे अधिक गुस्सा अमेरिका में ही है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संकट के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था 0.9 फीसदी सिकुड़ गयी है। फ्रांस, ब्रिटेन जैसे विकसित देशों की माली हालत डांवाडोल हो गयी है। हजारों की मौत से इन दोनों देश में घोर निराश है। अगर कोरोना न होता तो ये हालत न होती। अमेरिका के बाद फ्रांस और ब्रिटेन भी चीन पर भड़के हुए हैं। जर्मनी भी चीन के खिलाफ है। चीन के कारण यूरोपीय यूनियन में दरार पड़ गयी है। चीन की विभाजनकारी विदेश नीति से यूरोपीय यूनियन में फूट पड़ गयी है। इटली चीन के पक्ष में बोल रहा है। यूरोप में हजारों लोगों की मौत के समय भी चीन अपने व्यापारिक और कूटनीति हित साधने में लगा रहा। इससे कई देश चीन की मंशा को लेकर सशंकित हैं। चीन के खिलाफ इस जनभावना का भारत फायदा उठा सकता है। अभी भारत दवा और कपड़ा निर्यात के मामले में चीन को पछाड़ सकता है। लचीले लोहे के पाइप के निर्यात में चीन पहले नम्बर पर है और भारत का दूसरा स्थान है। अब भारत चीन के इस स्थान को छीन सकता है। चूंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय पाइप का मूल्य चीन से कम है इसलिए भारत को कामयाबी मिल सकती है।

भारत के पास चीन को पछाड़ने का मौका

भारत के पास चीन को पछाड़ने का मौका

कम्प्यूटर और इलेक्ट्रोनिक सेगमेंट में चीन बहुत आगे है। इस मामले में भारत उसका मुकाबला नहीं कर सकता। इसलिए भारत को उन उद्योगों पर फोकस करना होगा जिसमें वह चीन को पछाड़ सकता है। अगर भारत ने एक बार दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया तो चीन को झटका लग सकता है। कोरोना संकट के समय दुनिया के देश पीपीई किट को लेकर जिस तरह चीन पर निर्भर रहे वह काफी निराश करने वाला था। चीन के पीपीई किट मानक के अनुरूप नहीं पाये गये। भारत इस क्षेत्र में क्वालिटी प्रोडक्ट बना कर चीन को चुनौती दे सकता है। अब भारत सरकार पर निर्भर हैं कि वह निर्यात युद्ध में चीन को हराने के लिए क्या क्या फैसले लेती है। अभी कोरोना से जुड़े चिकित्सा उत्पाद की दुनिया भर में बेहद मांग है। इलेक्ट्रोनिक और कम्प्यूटर उपकरणों के निर्यात में भले भारत चीन का मुकाबला नहीं कर सकता लेकिन फर्मास्यूटिकल और सर्जिकल प्रोडक्ट में वह चीन को पीछे छोड़ सकता है। लेकिन इसके लिए भारत को दिनरात एक करनी होगी। चीन में पहले ही लॉकडाउन टूट गया है इसलिए वहां इंडस्ट्री शुरू हो गयी है। भारत को तेजी से इस मामले में पहल करनी होगी क्यों कि दुनिया के देश अब चीन का विकल्प खोजने लगे हैं। चीन से चिढ़े हुए ये देश भारत की तरफ रुख कर सकते हैं।

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