INS Vikrant एयरक्राफ्ट कैरियर पर दिखी रहस्यमयी चीज, भारत ने ये क्या अदृश्य बला बनाई?
अब ये तय हो चुका है, कि इंडो-पैसिफिक युद्ध का नया मैदान बनने वाला है और इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और चीन के बीच का तनाव काफी ज्यादा बढ़ने वाला है, लिहाजा भारत भी अपनी ताकत मजबूत कर रहा है।
नई दिल्ली, जुलाई 12: समुद्र का सिकंदर बनने के लिए इंडियन नेवी अपने बेड़े में नये नये विध्वंसक हथियारों को शामिल कर रही है और भारत का महाशक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर एक ऐसा अदृश्य वारक्राफ्ट दिखा है, जिसने दुनियाभर में हलचल मचा दी है। आईएनएस विक्रांत पर रखा गया भारत का ये वारक्राफ्ट करीब करीब अदृश्य है और बारीकि से देखने पर इसे देखा जा सकता है। इस वारक्राफ्ट के बारे में अब सैन्य एक्सपर्ट्स ने खुलासा किया है, कि ये क्या है और आईएनएस विक्रांत पर रखे जाने का इसका मकसद क्या है?

आईएनएस विक्रांत पर वारक्राफ्ट
मेड इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भारत की सेनाएं अब देश में ही बने हाईटेक उपकरणों, लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को प्राथमिकता दे रही हैं। इस बीच स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत ने अपने चौथे चरण का ट्रायल पूरा कर लिया। इस दौरान उसके सभी उपकरण सही तरीके से काम कर रहे थे और अब ये युद्धपोत 15 अगस्त को भारतीय नौसेना में शामिल हो जाएगा। लेकिन, जब इस भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर की नई तस्वीर सामने आई, तो सैन्य जगत में खलबली मच गई, क्योंकि इस एयरक्राफ्ट कैरियर के बैकग्राउंड में रखे एक वारक्राफ्ट ने सबकी नजर अपनी तरफ खींच लिया। पहली नज़र में ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे किसी विमान पर कोई अदृश्य लबाजा ओढ़ा दिया गया हो, लेकिन असल में ये एक मिग-29 है, जिसे आईएनएस विक्रांत पर रखा गया है।

एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिग 29
आईएनएस विक्रांत के डेक पर असल में एक मिग29 वारक्राफ्ट का रेप्लिका रखा गया है और इसके पीछे एक बहुत बड़ा मकसद है। ये रेप्लिका काफी ज्यादा रहस्यमयी लग रही है, लेकिन नौसेना ने काफी खास मकसद से इसे आईएनएस विक्रांत के डेक पर रखा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, मिग 29 के इस रेप्लिका को दरअसल, आईएनएस विक्रांत पर काम करन वाले क्रू मेंबर्स को इस एयरक्राफ्ट के रख-रखाव की ट्रेनिंग देने के लिए रखा गया है। सबसे पहले एख डिफेंस जर्नलिस्ट ने इसका फोटो शेयर किया था, जिसके बाद इस रहस्यमयी दिखने वाले मिग29 को लेकर दिलचस्पी काफी बढ़ गई। उन्होंने लिखा है कि, इसे डेक हैंडलिंग ट्रेनिंग के लिए आईएनएस विक्रांत के डेक पर रखा गया है। आपको बता दें कि, भारत के एक और एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य के डेक पर भी एक हेलीकॉप्टर के रेप्लिका को रखा गया था।

आईएनएस विक्रांत का इतिहास
आपको बता दें कि, आईएनएस विक्रांत का निर्माण रॉयल नेवी ने एचएमएस हरक्यूलस (आर 49) के रूप में किया था और टाइन नदी में 12 नवंबर 1943 में इसे पहली बार उतारा गया था। लेकिन इसे 22 सितंबर 1945 में लॉन्च किया गया, लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध की वजह से इसका निर्माण कार्य रोक दिया गया। भारतीय नौसेना की बॉम्बे इकाई में शामिल इस युद्धपोत के पहले कमांडिंग ऑफीसर कैप्टन प्रीतम सिंह थे। भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान विक्रांत को चित्तगंग में तैनात किया गया था। नौसेना के खुफिया विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान नौसेना ने 4 दिसंबर 1971 को विक्रांत पर हमला करने के तमाम प्रयास किये, लेकिन नाकाम रहे। तब जाकर विशेष तौर पर विक्रांत को निशाना बनाने के लिये पाकिस्तान ने समुद्र के अंदर एक पंडुब्बी उतारी, जिसका नाम था पीएनएस गाज़ी। लेकिन इससे पहले गाज़ी विशाखापट्नम पहुंचती, भारत के युद्धपोत आईएनएस राजपूत ने गाज़ी को समुद्र के अंदर ही ध्वस्त कर दिया था।

आईएनएस विक्रांत की खासियत
आईएनएस विक्रांत 262 मीटर लंबा, 62 चौड़ा और ऊपरी ढांचे समेत कुल 59 मीटर ऊंचा है। इसमें कुल 14 डेक हैं, जिनमें से 5 ऊपरी ढांचे में हैं। इस जहाज में 2,300 से ज्यादा कंपार्टमेंट हैं, जिसमें 1,700 से ज्यादा लोग रह सकते हैं। इनमें महिला अफसरों के लिए खासतौर पर बनाए गए स्पेशलाइज्ड केबिन भी शामिल हैं। इंडियन नेवी के लिए बनाए गए इस जहाज की मशीनरी को ऑटोमेशन में संचालन, नेविगेशन और अपनी सुरक्षा के हितों को देखते हुए डिजाइन किया गया है।

चीन ने उतारा फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर
आपको बता दें कि, पिछले महीने चीन ने भी अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान को समुद्र में उतार दिया है और फुजियान की चर्चा पूरी दुनिया में की गई है। चीन दावा करता है, कि 003 फुजियान विमानवाहक पोत अत्याधुनिक हथियारों और विमान-प्रक्षेपण से लैस है। जबकि, भारत के पास फिलहाल दो ही एयरकाफ्ट कैरियर हैं, आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य। चीन अपने एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या में इजाफा करेगा और इसकी वजह से हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र। हालाकि, फिलहाल विक्रांत के नौसेना में शामिल होते ही, दोनों देश विमान वाहक युद्धपोत के मामले में बराबर आ जाएंगे। लेकिन, अगला जंग का मैदान इंडो-पैसिफिक बनेगा, ये भी तय हो चुका है।

इंडो-पैसिफिक... जंग का नया मैदान
अब ये तय हो चुका है, कि इंडो-पैसिफिक युद्ध का नया मैदान बनने वाला है और इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और चीन के बीच का तनाव काफी ज्यादा बढ़ने वाला है, लिहाजा चीन के फ़ुज़ियान जैसे विमान वाहक युद्धपोत को अमेरिकी नौसेना और जापानी नौसेना के साथ मुकाबला करना होगा, जिनके पास असीमित शक्तियां हैं। लिहाजा, भारत के लिए हिंद महासागर में भूमिका और बढ़ जाती है, क्योंकि भारतीय नौसेना को हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभानी होगी, और क्योंकि यह केवल कुछ समय की बात है जब चीनी वाहक कार्य बल अपने समुद्री प्रतिरोध तैनाती के हिस्से के रूप में हिंद महासागर में प्रवेश कर सकते हैं। लिहाजा, भारत भी तेजी से अपनी नौसेना शक्ति का विस्तार कर रहा है और अब क्वाड के सदस्य देश चीन की नौसेना और उसके एयरक्राफ्ट कैरियर्स की ताकत का नजदीकी से जायजा ले रहे हैं। (आईएनएस विक्रमादित्य)
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