Indonesia Election: इंडोनेशिया में वोटों की गिनती जारी, प्रबोवो सुबियांतो ने किया जीत का दावा, जानें कौन हैं?
Indonesia Election Result News: इंडोनेशिया चुनाव में वोटिंग खत्म होने के बाद पूर्व सेना जनरल प्रबोवो सुबियांतो ने जीत हासिल करने का दावा किया है। 72 वर्षीय रक्षा मंत्री प्रबोवो सुबिआंतो ने खुद को वर्तमान राष्ट्रपति जोको विडोडो के उत्तराधिकारी के रूप में प्रस्तुत किया।
अनौपचारिक परिणामों का हवाला देते हुए, सुबियांतो ने राजधानी जकार्ता में हजारों समर्थकों से कहा कि उनकी जीत "सभी इंडोनेशियाई लोगों की जीत है।" हालांकिअभी चुनाव अधिकारियों द्वारा कोई घोषणा नहीं की गई है। इसके साथ ही चुनाव सड़ रहे दो अन्य उम्मीदवारों ने अभी हार नहीं मानी है।

इंडोनेशिया चुनाव की बड़ी बातें
इंडोनेशियाई मतदान एजेंसियों द्वारा की गई अनौपचारिक गणनाओं के अनुसार, सुबियांतो को 57% से 59% वोट मिले हैं।हालाँकि आधिकारिक परिणाम मार्च तक ज्ञात नहीं होंगे, लेकिन उनमें बहुत अधिक अंतर होने की उम्मीद नहीं है।
सुबियांतो ने एक खेल स्टेडियम से राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित भाषण में कहा, यह जीत सभी इंडोनेशियाई लोगों की जीत है।सुबियांतो ने अपने समर्थकों से कहा कि अभी हमें विनम्र रहना होगा। हमें अहंकारी नहीं होना चाहिए। हमें घमंड नहीं करना चाहिए।
पोल्स्टर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि प्रबोवो सुबियांतो के जीतने की संभावना प्रबल हो गई है और वोटों की गिनती पूरा होने के बाद प्रबोवो सुबियांतो का राष्ट्रपति बनना करीब करीब तय हो गया है। लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि प्रबोवो सुबियांतो कौन हैं? और उनकी जीत, कैसे इंडोनेशिया को बदलकर रख देगी?
प्रबोवो सुबियांतो कौन हैं?
महत्वाकांक्षी और चंचल, एक अंधेरे अतीत के साथ, पूर्व सेना जनरल प्रबोवो सुबियांतो ने इंडोनेशियाई राजनीति में शीर्ष स्थान पर काबिज होने के लिए कदम बढ़ा दिया है।
प्रबोवो सुबियांतो जोजोहादिकुसुमो एक सच्चा इंडोनेशियाई ब्लूब्लड है। उनका परिवार राष्ट्रीय नायक डिपोनेगोरो के वंशज होने का दावा करता है, जो मातरम सल्तनत के राजकुमार थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी में डच औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ जावा युद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया था।
प्रबोवो के दादा इंडोनेशिया के पहले स्टेट बैंक के संस्थापक और इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख सदस्य थे। उनके पिता एक प्रमुख अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने सरकार में वित्त मंत्री, व्यापार मंत्री और अनुसंधान मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके भाई एक अमीर टाइकून है।
प्रबोवो भी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में प्रखर रहे हैं और उन्हें एक ऐसे महत्वाकांक्षी सैन्य अधिकारी के तौर पर याद किया जाता है, जो ज्यादातर विशेष बलों (कोपासस) में कार्यरत था।
प्रबोवो ने इंडोनेशिया के तानाशाहों की तरह शासन करने वाले पूर्व राष्ट्रपति सोहार्टो की बेटी से शादी की, जिसने उनकी राजनीति को तेजी से आगे बढ़ाया। प्रबोवो लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचे और अंत में, राजधानी जकार्ता में शक्तिशाली आर्मी स्ट्रैटेजिक रिजर्व (कोस्ट्राड) के कमांडर के प्रमुख पद पर पहुंचे।
ससुर के लिए चलाया गुप्त अभियान
लेकिन, जब 1997 के वित्तीय संकट के बीच जैसे ही सोहार्टो का शासन लड़खड़ाने लगा, प्रबोवो अपने आलोचकों के खिलाफ सोहार्टो की सेना समर्थित और दमनकारी न्यू ऑर्डर शासन की रक्षा के लिए गुप्त अभियानों में शामिल हो गए।
प्रबोवो की ब्रिगेड पर 20 से ज्यादा छात्र प्रदर्शनकारियों को अगवा करने और उन्हें बुरी तरह से टॉर्चर करने का आरोप लगा, जिनमें से 13 अभी भी लापता हैं, और अब उन्हें मृत मान लिया गया है। प्रबोवो ने अपहरण की बात स्वीकार कर ली थी, लेकिन किसी भी हत्या में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
लेकिन, प्रबोवो को कभी मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ा, जबकि उनके कई सैन्य अधिकारियों पर मुकदमा चलाया गया और उन्हें दोषी ठहराया गया। उनके ख़िलाफ़ आरोपों की वजह से उन्हें वर्षों तक अमेरिका में प्रवेश के लिए वीज़ा नहीं दिया गया।
उन्होंने इन आरोपों से भी इनकार किया, कि वह 1998 में राजधानी में हुए हिंसक दंगों की साजिश रचने में शामिल थे, जिसने उनके ससुर के शासन के पतन में योगदान दिया।
तीन बार और लड़ चुके हैं राष्ट्रपति चुनाव
प्रबोवो 2009 तक, वह एक धनी कारोराबी थे और उन्होंने अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी, गेरिन्द्रा की स्थापना की थी। उन्होंने 2009 के चुनावों में पूर्व राष्ट्रपति मेगावती सोकरनोपुत्री के टिकट पर उपराष्ट्रपति पद के लिए अपनी किस्मत आजमाया, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।
2014 में प्रबोवो ने दोबारा कोशिश की। इस बार वह जोको "जोकोवी" विडोडो के खिलाफ राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। प्रबोवो ने एक राष्ट्रवादी व्यक्ति के तौर पर अपने कैम्पेन को आगे बढ़ाया और उन्होंने वर्दी पहनकर घोड़े की सवारी की और नए आदेश के सत्तावादी मॉडल की वापसी का वादा किया। लेकिन वह चुनाव हार गये।
2019 में उन्होंने एक बार फिर जोकोवी के खिलाफ चुनावी मैदान में शीर्ष पद के लिए ताल ठोकी और इस बार उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में इस्लाम को शामिल किया और रूढ़िवादी इस्लामवादियों की ओर रुख किया। जबकि, जोकोवी की मां एक ईसाई थीं और भाई अभी भी ईसाई हैं। जबकि, 2014 के चुनावी अभियान में, उन्होंने इस्लामवादियों के खिलाफ धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करने का भी वादा किया था।
2019 के धार्मिक चुनाव प्रचार ने इंडोनेशिया की जनता में की बीच वोटों का ध्रुवीकरण किया, जिससे इंडोनेशिया में कट्टरपंथी इस्लामी समूहों का हाथ मजबूत हुआ और आने वाले वर्षों में धार्मिक समुदायों के बीच तनाव गहरा हो गया।
लेकिन प्रबोवो वह चुनाव भी हार गए। उन्होंने राष्ट्रपति जोकोवी पर धोखाधड़ी करने, जकार्ता में दंगा भड़काने का आरोप लगाया, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई।
लेकिन, इसके कुछ समय बाद उन्होंने आश्चर्यजनक फैसला किया और अपने समर्थकों को पीछे छोड़कर राष्ट्रपति जोकोवी के मंत्रिमंडल में ही बतौर रक्षा मंत्री शामिल हो गये। दोनों पूर्व शत्रुओं का एक साथ आना काफी असाधारण था और सोशल मीडिया पर उनको लेकर काफी चुटकुले बनाए गये।
अगले चार वर्षों तक, प्रबोवो ने निष्ठापूर्वक वफादार रक्षा मंत्री की भूमिका निभाई - तब भी जब जोकोवी की सरकार कुछ इस्लामी संगठनों के खिलाफ एक्शन ले रही थी।

विवादास्पद राजनीतिक चालें
72 साल के हो चुके प्रबोवो की महत्वाकांक्षाएं अभी भी कम नहीं हुई हैं, लेकिन उनकी रणनीति एक बार फिर नाटकीय रूप से बदल गई है।
राष्ट्रपति पद के लिए अपनी वर्तमान रेस में, प्रबोवो ने जोकोवी के बेटे, जिब्रान राकाबुमिंग राका को अपने उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में चुना है। और जोकोवी अब स्वयं उसका समर्थन कर रहे हैं।
जोकोवी ने प्राबोवो और उनकी गेरिन्द्रा पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि संवाधानिक वजहों से वो फिर से राष्ट्रपति बन नहीं सकते, लेकिन अगर प्राबोवो राष्ट्रपपति बनते हैं, तो जोकोवी राजनीति के सेंटर में रहेंगे। वहीं, उनके बेटे का उप-राष्ट्रपति बनना भी निश्चित हो चुका है।
अक्टूबर में राष्ट्रपति पद की शपथ
इंडोनेशिया के नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण अक्टूबर में होगा। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को जीत का दावा करने के लिए कुल वोट का 50 प्रतिशत और प्रत्येक प्रांत में कम से कम 20 प्रतिशत वोट की आवश्यकता होती है।
यदि कोई भी दावेदार सीमा पार नहीं करता है, तो 26 जून को दूसरे और अंतिम दौर का चुनाव फिर से आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, राजनीतिक दलों को संसद में प्रवेश के लिए 4 प्रतिशत वोट की आवश्यकता होती है।
लोगों को उम्मीद थी, कि गंजर प्रणोवो चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, खासकर जब वह इंडोनेशियाई डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ स्ट्रगल (पीडीआई-पी) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, वह पार्टी जिसने दो कार्यकाल के लिए जोकोवी का समर्थन किया था। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया, क्योंकि राष्ट्रपति जोकोवी ने प्राबोवो को अपना समर्थन दे दिया।
इंडोनेशिया चुनाव क्यों है महत्वपूर्ण?
भारतीय और प्रशांत महासागरों के बीच स्थित, इंडोनेशिया दुनिया का चौथा सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है।
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विविध प्राकृतिक संसाधनों को समेटे हुए, यह देश दुनिया की सबसे बड़ी द्वीप श्रृंखला भी है और न्यूयॉर्क से लंदन तक समान दूरी तक फैला है।
इंडोनेशिया के 27 करोड़ लोगों में से लगभग 90 प्रतिशत मुस्लिम हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल देश बनाता है।
इंडोनेशिया की रणनीतिक स्थिति इसे भू-राजनीतिक महत्व भी देती है, और जी20 और आसियान सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य के रूप में, यह क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इंडोनेशिया की राजनीतिक स्थिरता क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
राष्ट्रपति पद के अलावा, 18 राजनीतिक दलों के लगभग 10,000 उम्मीदवार, आज राष्ट्रीय संसद की 580 सीटों के लिए भी चुनाव लड़ रहे हैं। कुल मिलाकर, लगभग 20,000 राष्ट्रीय, प्रांतीय और जिला संसदीय पद के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें हजारों उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।












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