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Tata, Adani और Mahindra जैसे दिग्गज पिछड़े, बेंगलुरु की इस छोटी कंपनी ने बेच डाले सबसे ज्यादा हथियार

Defence News: पिछले एक दशक में भारत ने हथियारों की बिक्री में तेजी से छलांग लगाई है और इसी का नतीजा है, कि कई विनाशक हथियारों की बिक्री भारत ने शुरू कर दी है। पिछले 10 सालों में भारत की हथियारों की बिक्री 30 गुना बढ़ गई है।

रिपोर्ट्स से पता चला है, कि वित्त वर्ष 2024-2025 की पहली तिमाही में हथियार निर्यात 78% बढ़कर 6,915 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3,885 करोड़ रुपये था। वहीं, सबसे दिलचस्प बात ये है, कि अमेरिका, भारत से सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाला देश बनकर उभरा है।

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भारतीय हथियार बाजार का विस्तार

और इस फ्रेम में परखें, तो पता चलता है, कि भारत ने साल 2013-14 के पूरे वर्ष में जितने हथियार ($110 मिलियन) बेचे, उससे भी ज्यादा के हथियार भारत ने इस साल के सिर्फ तीन महीनों में हासिल कर लिया! भारत ने वित्त वर्ष 2023-2024 में 21,083 करोड़ रुपये (लगभग 2.63 बिलियन डॉलर) के हथियार बेचे, जबकि पिछले वर्ष 15,920 करोड़ रुपये (1.99 बिलियन डॉलर) से 32.5% ज्यादा है।

रिपोर्ट्स देखने पर पता चलता है, कि भारत के डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) में, सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी म्यूनिशंस इंडिया, जो रॉकेट, तोपखाने के गोले और अन्य युद्ध सामग्री बनाती है, वो रक्षा निर्यात में सबसे आगे है।

जब निजी क्षेत्र की बात आती है, तो कई लोग मान सकते हैं, कि टाटा, अडानी, महिंद्रा या कल्याणी ग्रुप जैसे जाने-माने समूह इस लिस्ट में सबसे ऊपर होंगे। लेकिन, इस धारणा के विपरीत, रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है, कि बेंगलुरु स्थित इंडो-एमआईएम (Indo-MIM) हथियारों का निर्यात करने वाली सबसे बड़ी भारतीय कंपनी बनकर ऊभरी है।

बेंगलुरु का सीक्रेट हथियार

बेंगलुरु स्थित कंपनी इंडो-एमआईएम मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (MIM) पार्ट्स की अग्रणी निर्माता है, जिसका संचालन कई क्षेत्रों में फैला हुआ है।

1996 में AF टेक्नोलॉजीज इंडिया के रूप में स्थापित, उत्तरी अमेरिकी MIM कंपनी प्रिसिजन कास्टपार्ट्स कॉर्प - एडवांस्ड फॉर्मिंग टेक्नोलॉजीज (PCC-AFT) और इंडो-अमेरिकन उद्योगपति डॉ. कृष्णा चिवुकुला के बीच 50-50 ज्वाइंट वेंचर, इंडो-एमआईएम मेटल इंजेक्शन मोल्डिंग (MIM) टेक्नोलॉजी में एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है।

इस ज्वाइंट वेंचर का मकसद भारत में एमआईएम उत्पादों के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। पीसीसी के साथ इस साझेदारी ने इस नई कंपनी को एक मजबूत तकनीकी आधार और महत्वपूर्ण अमेरिकी बाजार तक पहुंच प्रदान की है।

2001 में डॉ. कृष्णा चिवुकुला सीनियर ने PCC-AFT से वेंचर का पूर्ण स्वामित्व प्राप्त कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप इंडो-एमआईएम का निर्माण हुआ। कृष्णा चिवुकुला सीनियर, जिन्होंने पहले अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, उन्होंने बाद में 2004 में अपने बेटे कृष्णा चिवुकुला जूनियर को नेतृत्व सौंप दिया।

वर्तमान में, कृष्णा चिवुकुला जूनियर इंडो-एमआईएम प्राइवेट लिमिटेड के CEO के रूप में काम करते हैं, जबकि परशुरामन बालासुब्रमण्यम CFO का पद संभालते हैं। दोनों इंडो-एमआईएम टीपीटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के रूप में भी कार्य करते हैं।

अमेरिकी कंपनी के साथ ज्वाइंट वेंचर ने इंडो-एमआईएम के उत्तरी अमेरिकी एमआईएम बाजार से मजबूत संबंध बना दिए हैं। समय के साथ, कंपनी ने अपनी वैश्विक उपस्थिति का विस्तार किया है और यूएसए, चीन, जापान, कोरिया, ताइवान और जर्मनी में ऑपरेशन स्थापित किया है।

इंडो-एमआईएम 50 से ज्यादा देशों में ग्राहकों को सेवाएं देता है और एमआईएम को अपनी मुख्य विनिर्माण तकनीक के रूप में इस्तेमाल करते हुए कई तरह के सटीक इंजीनियर्ड उत्पाद पेश करता है। कंपनी ने सिरेमिक इंजेक्शन मोल्डिंग, इन्वेस्टमेंट कास्टिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, प्रिसिज़न मशीनिंग और ऑटोमेशन सॉल्यूशन को शामिल करने के लिए अपनी विशेषज्ञता का विस्तार भी किया है।

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इनोवेशन के जरिए कंपनी का विस्तार

इंडो-एमआईएम के पास दुनिया का सबसे बड़ा एमआईएम प्रोडक्शन बुनियादी ढांचा और एमआईएम उद्योग के भीतर सबसे बड़ा इन-हाउस टूल रूम है। कंपनी की वृद्धि का श्रेय काफी हद तक 2014 में मोदी सरकार की तरफ से शुरू की गई भारत की संशोधित रक्षा निर्यात रणनीति को जाता है।

मोदी सरकार की तरफ से किए गये इस नीतिगत बदलाव ने भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को नाटकीय रूप से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एमकेयू, एसएसएस डिफेंस और टोनबो इमेजिंग जैसी अन्य निजी क्षेत्र की कंपनियां भी वैश्विक रक्षा बाजार में महत्वपूर्ण प्रगति कर रही हैं।

भारत वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को मजबूत कर रहा है, ऐसे में इंडो-एमआईएम जैसी कंपनियां रक्षा क्षेत्र में विकास और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बनाए रखने में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। भारत के रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि वैश्विक बाजारों के लिए हाई क्वालिटी वाले सैन्य उपकरण बनाने में देश के बढ़ते प्रभाव और क्षमता को उजागर करती है।

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