वैश्विक आर्थिक सुस्ती में भी भारतीय ट्रेड पर नहीं पड़ा असर, अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सरकार की बड़ी जीत!

वैश्विक आर्थिक मंदी-2022 के परिणाम इस मासिक आंकड़ों में स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में निर्यात और आयात की गतिशीलता अपेक्षाकृत मजबूत थी।

India trade unimpacted in Slowdown: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने अपनी रिपोर्ट में शानदार खबर दी है और एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने अपनी लेटेस्ट ग्लोबल ट्रेड मॉनिटर रिपोर्ट में कहा है, कि भारत का व्यापार आर्थिक मंदी से प्रभावित नहीं लगता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, विश्व की शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में भारत के पास अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से सबसे सकारात्मक संभावनाएं हैं। ये रिपोर्ट उस वक्त आई है, जब दुनिया के ज्यादातर देश आर्थिक मंदी के भंवर में फंसते हुए नजर आ रहे हैं और साल 2023 ग्लोबल अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी खराब होने की संभावना जताई जा रही है।

भारतीय ट्रेड पर असर नहीं

भारतीय ट्रेड पर असर नहीं

विश्व की टॉप 10 अर्थव्यवस्थाएं, अमेरिका, यूरोपीय संघ27, चीन, जापान, यूके, भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, कनाडा और रूस, विश्व जीडीपी के लगभग चार/पांचवें और वैश्विक निर्यात के तीन/चौथाई के लिए जिम्मेदार हैं और वैश्विक व्यापार का ज्यादातर ट्रेड इसी समूह के भीतर किया जाता है। इस रिपोर्ट के मासिक ऐतिहासिक आंकड़ों से पता चला है, कि शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में समूह के भीतर ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं में निर्यात मुख्य रूप से धीमा हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, "भारत को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, वो आयात के लिए थोड़ी ज्यादा आशावादी है। हालांकि, इसके बाद भी आने वाले महीनों में निर्यात और आयात की स्थिति बिगड़ने की उम्मीद है, जो कि हाल के पीएमआई नेक्सो रीडआउट्स से भी जाहिर होता है।"

आर्थिक मंदी का असर देखा जाना बाकी

आर्थिक मंदी का असर देखा जाना बाकी

रिपोर्ट में कहा गया है कि, वैश्विक आर्थिक मंदी-2022 के परिणाम इस मासिक आंकड़ों में स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में निर्यात और आयात की गतिशीलता अपेक्षाकृत मजबूत थी। एसएंडपी की रिपोर्ट के मुताबिक, "वैश्विक निर्यात का विकास साल 2022 में वार्षिक दृष्टिकोण के लिहाज से अभी भी सकारात्मक वृद्धि की तरफ बढ़ना चाहिए, फिर भी 2023 में वैश्विक व्यापार संकुचन की उम्मीद की जा सकती है। हालांकि, जीटीएएस ने अपने पूर्वानुमान में कहा है, कि साल 2024 की शुरूआत के बाद से एक बार फिर से ट्रेड में रिकवर शुरू हो जाएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर से स्थायी विकास के रास्ते पर लौट आएगी"।

वैश्विक जीडीपी को लेकर अनुमान

वैश्विक जीडीपी को लेकर अनुमान

एसएंडपी की रिपोर्ट में वैश्विक जीडीपी के विकास दर में भारी गिरावट आने की संभावना है और रिपोर्ट में कहा गया है, कि वैश्विक विकास दर साल 2021 के 5.9 प्रतिशत के मुकाबले धीमी होकर इस साल 2.8 प्रतिशत तक होने और साल 2023 में और गिरकर 1.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। खास तौर पर S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस ने 2023 की विकास दर को पिछले महीने के पूर्वानुमान से 0.6 प्रतिशत और कम कर दिया है, लेकिन रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि आर्थिक विकास को लेकर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, आने वाले महीनों में यूरोप, अमेरिका, कनाडा और लैटिन अमेरिका के कुछ हिस्सों में मंदी आने की संभावना है। वहीं, एशिया-पैसिफिकि, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में मध्यम वृद्धि देखी जाएगी, लिहाजा विश्व अर्थव्यवस्था मंदी से बच सकती है, लेकिन विकास की रफ्तार न्यूनतम रहेगा।

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