अभी और तेज रफ्तार से गिरेगा भारतीय रुपया, विदेशी कर्ज से मुसीबत में फंस सकती है देश की अर्थव्यवस्था

ताजा आंकड़ों से पता चला है कि, भारत का व्यापार घाटा सिर्फ जून महीने में बढ़कर रिकॉर्ड 25.63 अरब डॉलर हो गया है, जो भारत सरकार के लिए बड़ा टेंशन है, क्योंकि भारत सरकार की कोशिश लगातार व्यापार घाटे को पाटने की रही है...

नई दिल्ली, जुलाई 06: भारतीय करेंसी रुपया, जो रिकॉर्ड स्तर 80 को पार कर गया है, आने वाले वक्त में भी उसके सुधरने के संकेत नहीं दिख रहे हैं और विदेशी कर्ज के भुगतान की वजह से आने वाले वक्त में रुपये का फिसलना और भी तेज रफ्तार से जारी रह सकता है। भारत के सामने मुसीबत सिर्फ इतना नहीं है, कि विदेशी कर्ज काफी ज्यादा हो चुका है, इसके साथ ही भारत के व्यापार घाटे में भी जून महीने में भारी इजाफा हो गया है और इस वजह से भी रुपये पर प्रेशर बढ़ा है।

विदेशी कर्ज बना बड़ी चुनौती

विदेशी कर्ज बना बड़ी चुनौती

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले भारत पर विदेशी कर्ज में 47.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है और इस वित्तीय वर्ष में भारत पर कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 620.7 अरब डॉलर हो गया है। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना करें, तो विदेशी कर्ज हमारी कुल जीडीपी का 19.9 प्रतिशत रह गया था, जो उससे पिछले वित्त वर्ष यानि 2020-21 में 21.2 प्रतिशत था। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के ऊपर दीर्घकालिक कर्ज (मूल परिपक्वता एक साल से ज्यादा) 499.1 अरब डॉलर हो गया है, जो मार्च 2021 की तुलना में 26.5 अरब डॉलर ज्यादा है। जबकि, इस वित्तीय वर्ष में भारत पर अल्पकालिक कर्ज में 19.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो एक साल पहले 17.6 प्रतिशत था। लेकिन, अल्पकालिक कर्ज ने ही भारत सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है, क्योंकि भारत को इस साल ही अल्पकालिक ऋण का भुगतान करना है।

भारत को कितना कर्ज चुकाना है?

भारत को कितना कर्ज चुकाना है?

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि, भाकत पर जो कुल करीब 621 अरब डॉलर का कर्ज है, उसका करीब 40 प्रतिशत हिस्सा, यानि 267 अरब डॉलर का विदेशी ऋण भारत सरकार को अगले 9 महीने में चुकाने हैं और भारत के लिए ये एक बहुत बड़ी चुनौती है। यह पुनर्भुगतान भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लगभग 44% के बराबर है। यानि, भारत अगर इस कर्ज को चुकाता है, तो भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार काफी तेजी से नीचे आ जाएगा और भारत में दैनिक सामानों की कीमत में भारी इजाफा हो सकता है। वहीं, करेंसी टेंडर्स का कहना है कि, कई कॉरपोरेट्स ने अमेरिकी डॉलर में मूल्यवर्ग के ऋण को चुकाने के लिए या तो नए सिरे से ऋण लिया है, या संचित निर्यात आय के साथ समझौता किया होगा, लेकिन इन फंडों को चुकाने की कम समय अवधि रुपये पर दबाव डाल सकती है।

तेज रफ्तार से फिसल सकता है रुपया

तेज रफ्तार से फिसल सकता है रुपया

डीबीएस बैंक इंडिया के प्रबंध निदेशक आशीष वैद्य ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, "मौजूदा स्थानीय मैक्रो सेटअप मुख्य रूप से तेल आयात के कारण रिकॉर्ड चालू खाता घाटे से प्रेरित है।" उन्होंने कहा कि, "इसके साथ-साथ, उच्च अमेरिकी रेट ट्रेजेक्टरी और जोखिम लेने की भावना भी घटी है, जिसकी वजह से अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है और भारतीय रुपये पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। आशीष वैद्य ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि, 'विदेशी कर्ज की मैच्योरिटी पूरा होने की वजह से भारतीय रुपये पर प्रेशर और भी ज्यादा बढ़ जाएगा'। उन्होंने कहा कि, 'अगले तीन से 6 महीनों के बीच स्थिति खराब हो सकती है और बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है, हालांकि, उसके बाद इसमें सुधार का दिखना शुरू हो जाएगा'

भारत का रिकॉर्ड व्यापार घाटा

भारत का रिकॉर्ड व्यापार घाटा

ताजा आंकड़ों से पता चला है कि, भारत का व्यापार घाटा सिर्फ जून महीने में बढ़कर रिकॉर्ड 25.63 अरब डॉलर हो गया है, जो भारत सरकार के लिए बड़ा टेंशन है, क्योंकि भारत सरकार की कोशिश लगातार व्यापार घाटे को पाटने की रही है, ताकि देश का निर्यात बढ़ाने के साथ साथ विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाया जाए, लेकिन इस पहल में सरकार को बड़ा झटका लगा है। रिकॉर्ड व्यापार घाटे के पीछे की सबसे बड़ी वजह पेट्रोलियम, कोयले और सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी को बताया जा रहा है, वहीं जून महीने में भारत के निर्यात में भारी गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे रुपये में और गिरावट आई है और बड़े करेंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) के बारे में चिंता बढ़ गई है। सोमवार को जारी भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि, जून में भारत का व्यापारिक निर्यात 16.8% बढ़कर 37.9 अरब डॉलर हो गया है, जो मई के मुकाबले 20.5% से कम था, जबकि भारत के आयात में 51% का उछाल आया है और जून महीने में भारत का आयात बढ़कर 63.58 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, पिछले साल से तुलना करें, तो साल 2021 के जून महीने में भारत का व्यापार घाटा 9.61 अरब डॉलर था।

डॉलर के मुकाबले रुपये का बुरा हाल

डॉलर के मुकाबले रुपये का बुरा हाल

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का अनुमान है कि, इन परिस्थितयों के बीच फिलहाल डॉलर के मुकाबले रुपया और गिर सकता है। उन्होंने कहा कि, 'वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों और डॉलर की मजबूती को देखते हुए, बढ़ते व्यापार घाटे के साथ, दूसरी तिमाही में भारतीय रुपया और कमजोर हो सकता है और ये 80-81 तक जा सकता है'। आपको बता दें कि, सोमवार को भारतीय मुद्रा सोमवार को डॉलर के मुकाबले 78.95 पर बंद हुई।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा प्रभाव

भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा प्रभाव

भारत सरकार ने 5 ट्रिलियन इकोनॉमी तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मौजूदा हालात में इसे बड़ा झटका लगता दिख रहा है। वहीं, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों के दौरान व्यापार घाटा एक साल पहले की समान अवधि में 31.42 अरब डॉलर से बढ़कर 70.25 अरब डॉलर हो गया है। इंडियन रेटिंग्स एंड रिसर्च के चीफ इकॉनोमिस्ट डीके पंत कहते हैं कि, "जैसा कि विकसित दुनिया में मंदी वैश्विक वस्तुओं के निर्यात की मांग को कम कर रही है, विश्व व्यापार संगठन ने पहले ही अपने पूर्वानुमान को कम कर दिया है और भारतीय निर्यात पर इसका असर सीधा देखने को मिल रहा है। वहीं, तेल आयात पर भारत की उच्च निर्भरता के कारण भारत का व्यापार घाटा और भी ज्यादा बढ़ गया है'।

घट रहा है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

घट रहा है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

हालांकि, भारत के पास अभी विदेशी मुद्रा भंडार पर्याप्त मात्रा में है, लेकिन इसका घटना भी शुरू हो चुका है, क्योंकि आरबीआई ने फरवरी से रिकॉर्ड पोर्टफोलियो निकासी के प्रभाव को कम करने के लिए $ 41 बिलियन की बिक्री की है। 3 सितंबर 2021 को भारत के पास 642.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, लेकिन 24 जून तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 593.3 अरब डॉलर हो गया। विदेशी फंडों ने इस साल 4 जुलाई तक भारतीय वित्तीय संपत्तियों की कुल 30.67 अरब डॉलर की बिक्री की, जैसा कि एनएसडीएल, एक डिपॉजिटरी के आंकड़ों से पता चलता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+