रात में देखने की क्षमता, एंटी ड्रोन.. जानिए कैसे इंडियन आर्मी रूसी टैंको को रक्षा कवच से लैस कर रही है?
बीएमपी में इस वक्त रात में लड़ने की क्षमता नहीं है, लिहाजा रात होने के बाद या फिर जब धुआं, धूल या कोहरा होता है, उस वक्त ये टैंक काम करना बंद कर देते हैं।
नई दिल्ली, अगस्त 29: चीन से तनाव के बीच इंडियन आर्मी ने अपने टैंकों को और विनाशकारी और विध्वंसक बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। भारतीय सेना ने 2,500 से ज्यादा रूसी इन्फैंट्री लड़ाकू वाहनों - बीएमपी II को अपग्रेड करने की कोशिश शुरू कर दी है और इस काम के लिए इंडियन आर्मी ने तीन निजी भारतीय कंपनियों को शामिल करते हुए परीक्षण शुरू कर दिया है। ये रूसी टैंक साल 1980 के दशक से ही भारतीय सेना में शामिल हैं और अब उन्हें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, जिनमें रात में भी लड़ने की क्षमता के साथ-साथ ड्रोन से बचने की क्षमता भी शामिल है। इसके साथ ही इन टैंकों में हाई पावर इंजन भी लगाए जाएंगे।

टैंकों को अपग्रेड कर रही है आर्मी
रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि, अपग्रेड करने के प्रोसेस में स्पेशल गोला-बारूद की क्षमता भी शामिल है, जिसे हवा में दागा जा सकता है ताकि एक विशेष आकार के ड्रोन और घूमने वाले युद्धपोतों को हमला करने से पहले ही हवा में ध्वस्त किया जा सके। रक्षा और सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा कि, अपग्रेडेशन का फोकस बीएमपी-2 के गनर मेन साइट, कमांडर पैनोरमिक साइट, फायर कंट्रोल सिस्टम, स्वचालित लक्ष्य ट्रैकर और लेजर रेंज फाइंडर को लक्षित करने वाले व्यापक समाधान पर है। ये रूसी टैंक काफी शानदार माने जाते हैं और पुराना बीएमपी-2 भारत की मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की रीढ़ है और युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसे पूर्वी लद्दाख में चीनियों से निपटने के लिए बड़ी संख्या में तैनात किया गया है।

रूस से मिला है लाइसेंस
रूस से लाइसेंस के तहत भारत सरकार के स्वामित्व वाले आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) द्वारा निर्मित बीएमपी में इस वक्त रात में लड़ने की क्षमता नहीं है, लिहाजा रात होने के बाद या फिर जब धुआं, धूल या कोहरा होता है, उस वक्त ये टैंक काम करना बंद कर देते हैं, लिहाजा इन टैंकों को अपग्रेड करना काफी ज्यादा जरूरी हो गया था, खासकर उस वक्त, जब चीन की तरफ से लगातार खतरा बना हुआ है, लिहाजा इंडियन आर्मी ने इन टैंकों को अपग्रेड करने का फैसला लिया। इन टैंकों को अपग्रेड करने के लिए फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) के लिए एक अलग कार्यक्रम का चल रहा है, जो इन बीएमपी टैंकों को बदल देगा। इस कार्यक्रम को सरकार की iDEX (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) पहल के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है जिसमें तीन फर्मों ने योग्यता प्राप्त की है।

तीन कंपनियां हैं शामिल
सूत्रों ने कहा कि, टैंकों को अपग्रेड करने का जिम्मा तीन कंपनियों, टोनबो इमेजिंग, बिग बैंग बूम और डाइमेंशन एनएक्सजी को सौंपा गया है। संयोग से, बेंगलुरु स्थित टोनबो इमेजिंग एकमात्र स्टार्ट-अप है जिसने एक परिचालन प्रणाली को सिद्ध और सफलतापूर्वक तैनात किया है और, सूत्रों ने कहा, इसने पहले iDEX चुनौती को पूरा किया क्योंकि इसमें पहले से ही एक वर्किंग प्रोडक्ट की क्षमता थी। अन्य कंपनियों में से एक कंपनी के सिस्टम में कुछ फंक्शनल दिक्कतें थीं, वहीं दूसरी कंपनी अभी कंसेप्ट के आधार पर ही काम कर रही है। सूत्रों ने कहा कि, परीक्षण में देरी इसलिए भी हुई है, क्योंकि सेना परीक्षणों के लिए और अधिक कंपनियों को परीक्षण में शामिल करना चाहती थी, और सेना नहीं चाहती थी, कि सिर्फ एक ही कंपनी को पूरा काम दिया जाए, लिहाजा तीन कंपनियों को शामिल किया गया है और इस काम को सफलतापूर्वक मानदंडों के साथ पूरा किया गया है।

पिछले हफ्ते शुरू हुआ परीक्षण
इन टैंकों को अपग्रेड करने के लिए कंपनियों का परीक्षण पिछले हफ्ते हैदराबाद में शुरू हुआ है और इन टैंकों में सबसे बड़ा बदलाव "सी थ्रू आर्मर" होगा जो बीएमपी के अंदर मौजूद जवान को बाहर की स्थिति का पूरा जायजा लेने की शक्ति देगा, चाहे वो दिन का समय हो या फिर रात का वक्त। एक सूत्र ने कहा, "सी-थ्रू कवच एक बड़ी तकनीकी छलांग होने जा रहा है जो मौके मुताबिक जागरूकता को बढ़ाएगा।" द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में भी "सी थ्रू आर्मर" को लेकर एक फिजिकल प्रजेंटेशन किया गया था और इस टेक्नोलॉजी के चलते टैंक में मौजूद जवान को 360 डिग्री बाहर के दृश्यों को देखने का मौका मिलता है, जिसकी वजह से टैंक चालक 360 डिग्री हमला करने में सक्षम होने के साथ साथ दुश्मनों की गतिविधियों को आसानी से देख सकता है। यह तकनीक वाहन की चौतरफा उत्तरजीविता को बढ़ाती है और युद्ध में एक अतिरिक्त बढ़त प्रदान करती है।

कैसे दूर किया जाएगा कमजोरी?
बीएमपी टैंकों की कमजोरी का समधाना अत्याधुनिक कैमरे और चुंबकीय ट्रैकर्स होते हैं, जिन्हें बीएमपी टैंकों में लगाया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, टैंक में 6 कैमरे फिट किए जाएंगे, जिन्हें हेलमेट डिस्पे से फिट किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा, कि जब कमांडर दाहिनी ओर मुड़ता है, तो हेडगियर आसपास की तस्वीरों को टैंक के अंदर प्रदर्शित करेगा और उसके सामने हर एक तस्वीर दिखाएगा। इसके साथ ही, एक चुंबकीय ट्रैकर पहनने वाले के सिर की गति को भांप लेता है और उसी दिशा से वीडियो प्रदर्शित करता है।












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