चीन की साजिशों का मुंहतोड़ जबाव देंगे ‘पहाड़ी योद्धा’, 10 हजार जवानों की स्पेशल ट्रेनिंग
इंडियन आर्मी 10 हजार ऐसे जवानों को स्पेशल ट्रेनिंग देगी, जिनका काम सिर्फ चीनी सैनिकों की किसी भी घुसपैठ को रोकना होगा।
नई दिल्ली: चीन की किसी भी साजिश का मुंहतोड़ जबाव देने की प्लानिंग भारत ने शुरू कर दी है और भारत के नॉर्दर्न बॉर्डर पर 10 हजार से ज्यादा 'पहाड़ी योद्धाओं' की तैनाती की जाएगी। इन योद्धाओं को खासतौर पर चीनी सेना से लड़ने की ट्रेनिंग दी जाएगी और इनकी तैनाती खास तौर पर चीनी सेना की किसी भी घुसपैठ को रोकने और बदमाशी करने पर उन्हें ठोकने के लिए की जाएगी। इंडियन आर्मी 10 हजार ऐसे जवानों को अपनी टीम में शामिल कर रही है, जिनका सिर्फ एक लक्ष्य होगा, चीन को रोकना।

पीएलए को मुंहतोड़ जबाव
इंडियन आर्मी ने माउंटेन स्ट्राइक ग्रुप को मजबूत करने का फैसला लिया है। इंडियन आर्मी ने ये फैसला सिर्फ और सिर्फ चीन को ध्यान में रखते हुए लिया है और इन 10 हजार जवानों को पहाड़ों पर लड़ने की स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी और फिर इनकी तैनाती उन जगहों पर की जाएगी जहां से चीन की पीएलए अकसर घुसपैठ करती रहती है। इंडियन आर्मी के इन स्पेशल जवानों को काफी ज्यादा आक्रामक बनाया जाएगा ताकि किसी भी परिस्थिति में चीन को मुंहतोड़ जबाव दे। भारतीय सेना इन जवानों की तैनाती पाकिस्तान के वेस्टर्न बॉर्डर से चीन की सीमा की सीमा की तरफ करेगी।

10 हजार जवानों को ट्रेनिंग
भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक 10 हजार सैनिकों को 17 माउंटन स्ट्राइक कॉर्प्स के साथ तैनात किया गया है, जिसका हेडक्वार्टर पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में है। भारत सरकार के सूत्र के मुताबिक 'माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स बनाने की मंजूरी करीब 10 साल पहले ही मिल गई थी, लेकिन इसको लेकर सिर्फ एक डिविजन का निर्माण किया गया था लेकिन अब इसमें लेटेस्ट अपडेट ये है कि इन जवानों को काफी ज्यादा आक्रामक बनाया जाएगा और इसमें ज्यादा से ज्यादा जवानों की भर्ती की जाएगी और इनका सिर्फ एक ही काम होगा'।

फोकस में चीन
भारतीय सेना ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कई परिवर्तन करने शुरू किए हैं साथ ही भारतीय सेना को कई और जिम्मेदारियां दी गई हैं। खासकर चीनी बॉर्डर को लेकर स्पेशल कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। पिछले साल लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के बाद अब भारतीय सेना चीनी सैनिकों से लड़ने, खासकर लद्दाख और चीन से जुड़े दूसरे सरहदी इलाकों की क्षेत्रीय परिस्थितियों के हिसाब से सैनिकों को ट्रेनिंग की जाएगी। वहीं, गर्मी बढ़ने के साथ एक बार फिर से इंडियन आर्मी और दूसरे सिक्योरिटी फोर्सेस लद्दाख और दूसरे पहाड़ी सरहदी क्षेत्रों में पेट्रोलिंग के लिए लौटने लगे हैं।

सरहद पर तनाव
पिछले एक साल से भारत और चीन के हजारों सैनिक भारत-चीन बॉर्डर पर लगातार गश्ती कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की सेनाओं ने पीछे हटना जरूर शुरू कर दिया है लेकिन चीनी सैनिकों के फिर से आने का खतरा बना हुआ है। वहीं, मथुरा का वन स्ट्राइक कॉर्प्स को भी नॉर्दर्न बॉर्डर को फिर से चीनी सीमा की तरफ भेजा जाएगा, जबकि इसका एक ग्रुप लगातार बॉर्डर पर डटा हुआ है। वहीं इंडियन आर्मी सुगर सेक्टर, सेन्ट्रल सेक्टर और नॉर्थ इस्टर्न सेक्टर में जवानों की संख्या बढ़ाकर अपनी स्थिति और भी ज्यादा मजबूत करना चाहती है। लगातार बातचीत के बाद भारत ने पैंगोंग सो से चीनी सैनिकों को हटने के लिए मजबूर कर दिया है और बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट के लिए भारत और चीन के सैनिक लगातार बात भी कर रहे हैं, लेकिन इंडियन आर्मी इन सबके बावजूद अपनी शक्ति को और ज्यादा मजबूत करना चाहती है, लिहाजा 10 हजार से ज्यादा स्पेशल जवानों को परिस्थिति के हिसाब से स्पेशल ट्रेनिंग की जाएगी।

अमेरिकी अधिकारी की चिंता
दरअसल, कुछ दिन पहले अमेरिकी सेना के बड़े पूर्व अधिकारी ने खुलासा किया था कि इस साल दिसंबर तक फिर से चीनी सैनिक फिंगर-8 तक आने की कोशिश करेंगे और वो जाड़े का फायदा उठाकर भारत के साथ धोखा करने की कोशिश करेंगे, लिहाजा अब भारत सरकार कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती है और इंडियन आर्मी ने सिर्फ चीन को ध्यान में रखकर अपने 10 हजार जवानों को स्पेशल ट्रेनिंग देने की प्लानिंग की है।












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