UNSC में पहली बार भारत ने रूस के खिलाफ डाला वोट, यूक्रेन पर मोदी सरकार ने पुतिन को छोड़ा!

ये पहली बार हुआ है, कि यूएनएससी में भारत ने रूस के खिलाफ मतदान किया है, लेकिन भारत ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी आक्रामकता के लिए रूस की आलोचना अब तक नहीं की है।

न्यूयॉर्क, अगस्त 25: यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से अभी तक भारत सरकार ने तटस्थ रूख अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वोटिंग से गैर-हाजिर रहने का विकल्प चुना था, लेकिन पहली बार यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में भारत ने रूस के खिलाफ वोट डाला है। भारत ने बुधवार को पहली बार यूक्रेन संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में "प्रक्रियात्मक वोट" के दौरान रूस के खिलाफ मतदान किया है।

रूस के खिलाफ भारत ने डाला वोट

रूस के खिलाफ भारत ने डाला वोट

रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यीय शक्तिशाली निकाय ने एक वीडियो टेली-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से एक बैठक को संबोधित करने के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की को आमंत्रित किया था। फरवरी में रूसी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद यह पहली बार है, जब भारत ने यूक्रेन के मुद्दे पर रूस के खिलाफ मतदान किया है। अब तक, नई दिल्ली ने यूक्रेन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वोटिग में हिस्सा ही नहीं लिया था, जिसकी वजह से लगातार भारत की आलोचना होती रही है और अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने खुलकर भारत की आलोचना भी की। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी भारत के वोटिंग से गैर-हाजिर रहने पर बयान दिया था, लेकिन अब पहली बार भारत ने यूक्रेन संकट पर अपने स्टैंड में बदलाव किया है और रूस के खिलाफ वोट डाला है। आपको बता दें कि, 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, जिसके बाद अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने रूस पर बड़े आर्थिक और अन्य प्रतिबंध लगाए हैं।

रूस की अबतक नहीं की है आलोचना

रूस की अबतक नहीं की है आलोचना

हालांकि, ये पहली बार हुआ है, कि यूएनएससी में भारत ने रूस के खिलाफ मतदान किया है, लेकिन भारत ने यूक्रेन के खिलाफ अपनी आक्रामकता के लिए रूस की आलोचना अब तक नहीं की है। नई दिल्ली ने बार-बार रूसी और यूक्रेनी पक्षों से कूटनीति और बातचीत के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया है, और दोनों देशों के बीच संघर्ष को समाप्त करने के सभी राजनयिक प्रयासों के लिए अपना समर्थन भी व्यक्त किया है। लेकिन, अब जब पहली बार भारत ने यूएनएससी में रूस के खिलाफ मतदान किया है, तो सवाल उठ रहे हैं, कि क्या अब भारत रूस की आलोचना भी करेगा? आपको बता दें कि, भारत वर्तमान में दो साल के कार्यकाल के लिए UNSC का एक अस्थायी सदस्य है, और भारत का कार्यकाल इस साल दिसंबर में खत्म होने वाला है। वहीं, इस साल दिसंबर महीने में ही भारत यूएनएससी की अध्यक्षता भी करेगा। बुधवार को यूएनएससी ने यूक्रेन की आजादी की 31वीं वर्षगांठ पर छह महीने से चल रहे इस संघर्ष का जायजा लेने के लिए एक बैठक की थी, जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति को अपनी बात कहने के लिए आमंत्रित करने के लिए वोटिंग की गई थी, जिसके पक्ष में भारत ने वोट डाला है।

यूक्रेन के पक्ष में भारत ने डाला वोट

जैसे ही बैठक शुरू हुई, संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वसीली ए नेबेंजिया ने वीडियो टेली-कॉन्फ्रेंस द्वारा बैठक में यूक्रेनी राष्ट्रपति की भागीदारी के संबंध में एक प्रक्रियात्मक वोट का अनुरोध किया। उनके और अल्बानिया के राजदूत फेरिट होक्सा के बयानों के बाद, यूएनएससी ने ज़ेलेंस्की को वीडियो टेली-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में भाग लेने के मतदान का आयोजन किया गया। वोटिंग के दौरान रूस ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की के संबोधित करने के खिलाफ वोट डाला, जबकि चीन बैठक से गैर-हाजिर रहा। वहीं, 15 सदस्यीय यूएनएससी में 13 देशों ने यूक्रेनी राष्ट्रपति के वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करने के पक्ष में वोट डाला, जिसमें भारत भी शामिल था।

रूस ने अपने विरोध में क्या कहा?

रूस ने अपने विरोध में क्या कहा?

यूएनएससी बैठक के दौरान रूस के राजदूत ने अपने बयान में कहा कि, रूस यूएनएससी में यूक्रेन के राष्ट्रपति के शामिल होने का विरोध नहीं करता है, लेकिन उनकी ये भागीदारी व्यक्तिगत तौर पर होनी चाहिए, ना कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए। आपको बता दें कि, कोविड महामारी की वजह से यूएनएससी की ज्यादातर बैठकें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही हो रही हैं और रूस का तर्क था, कि यूक्रेनी राष्ट्रपति को बैठक में शारीरिक तौर पर शामिल होना चाहिए। रूसी राजदूत ने जोर देते हुए कहा कि, उनके देश की आपत्ति विशेष रूप से वीडियो टेली-कॉन्फ्रेंस द्वारा राष्ट्रपति की भागीदारी से संबंधित है, उन्होंने इस मामले पर एक प्रक्रियात्मक वोट का आह्वान किया, जिस पर भारत और 12 अन्य देश सहमत नहीं थे और वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से परिषद को संबोधित करने के लिए ज़ेलेंस्की का समर्थन किया। लेकिन, अल्बानिया के राजदूत होक्सा ने तर्क दिया कि, यूक्रेन युद्ध में शामि है, और ऐसे वक्त में उस देश के राष्ट्रपति को अपने ही देश में रहने की जरूरत है। लिहाजा, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए यूएनएससी की बैठक में शामिल होना चाहिए।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने क्या कहा?

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अपनी टिप्पणी में रूसी संघ को यूक्रेन के खिलाफ आक्रामकता के अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया। उन्होंने कहा कि, "अगर मास्को को अभी नहीं रोका गया, तो ये सभी रूसी हत्यारे अनिवार्य रूप से दूसरे देशों को भी समाप्त कर देंगे।'' उन्होंने कहा कि, ''अब यूक्रेन की धरती से तय होगा, कि दुनिया का भविष्य क्या होगा और हमारी स्वतंत्रता आपकी सुरक्षा है।'' ज़ेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस ने ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र को युद्ध क्षेत्र में बदलकर दुनिया को परमाणु तबाही के कगार पर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि संयंत्र में छह रिएक्टर हैं और चेरनोबिल में केवल एक विस्फोट हुआ और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को जल्द से जल्द स्थिति पर स्थायी नियंत्रण करना चाहिए। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रूस से अपने "परमाणु ब्लैकमेल" को रोकने और संयंत्र से पूरी तरह से हटने का आह्वान किया।

यूएन अध्यक्ष ने जताई गंभीर चिंता

यूएन अध्यक्ष ने जताई गंभीर चिंता

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र और उसके आसपास की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और उन्होंने कहा कि, हमारे सामने चेतावनी की रोशनी चमक रही है। उन्होंने कहा कि, परमाणु संयंत्र की भौतिक अखंडता, सुरक्षा या सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कोई भी कार्रवाई अस्वीकार्य है, और स्थिति के आगे बढ़ने से आत्म-विनाश हो सकता है। उन्होंने, परमाणु सुविधा के लिए संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया। पूरी तरह से नागरिक बुनियादी ढांचे के रूप में और आईएईए के लिए जल्द से जल्द साइट पर एक मिशन का संचालन करने के लिए फिर से स्थापित किया जाए।

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