कैसा है कहर बरपाने वाला MQ-9B predator ड्रोन? अमेरिका से बस फाइनल ही होने वाली है भारत की डील
भारत सरकार की हिंद महासागर और चीन से लगती सीमा वाले इलाकों में सर्विलांस क्षमता में इजाफा करना चाहती है, लिहाजा ये ड्रोन इस काम में माहिर है। इसके अलावा इस ड्रोन के जरिए बम भी गिराए जा सकते हैं।

MQ-9B predator drone deal: एक दिन पहले पेश किए गये भारतीय रक्षा बजट में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और भारत के बीच विध्वंसक MQ-9B predator ड्रोन को लेकर सौदा जल्द ही फाइनल हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार इस अमेरिकी विध्वंसक ड्रोन की तैनाती चीन की सीमा के साथ साथ हिंद महासागर में भी करना चाहती है, लिहाजा दोनों देशों के बीच जल्द ही MQ-9B predator ड्रोन को लेकर सौदा फाइनल होने वाला है।

MQ-9B predator ड्रोन को लेकर सौदा
भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच 3 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की लागत से 30 MQ-9B प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन को लेकर सौदा फाइनल होने वाला है, जिससे नई दिल्ली को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर अपने समग्र निगरानी तंत्र को मजबूत करने में मदद करेगा और हिंद महासागर में भी भारत के सर्विलांस ताकत में भारी इजाफा होगा। दोनों देशों के बीच चल रहे इस ड्रोन डील में शामिल कुछ अधिकारियों का कहना है, कि भारत सरकार के पाले में गेंद है और भारत को तय करना है, कि उसे ये ड्रोन खरीदना है या नहीं। MQ-9B प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन, भारतीय सेना की तीनों सेवाओं के लिए काफी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है और रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार सेना के तीनों हिस्सों को 10-10 ड्रोन उपलब्ध करवाने पर विचार कर रही है।

सारे बाधा हो चुके हैं समाप्त
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने हालांकि ज्यादा विस्तार से इस डील को लेकर जानकारी नहीं दी है, लेकिन अधिकारियों ने इस डील के रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा से इनकार कर दिया है औऱ कहा है, कि इस डील के बीच में कोई नौकरशाही या नियामक बाधाएं नहीं हैं। वहीं, अमेरिका की राजनीतिक सैन्य मामलों की सहायक विदेश मंत्री जेसिका लेविस ने 2017 की गर्मियों में घोषित इस सौदे में देरी होने को लेकर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, कि "मुझे इसे वापस लेना होगा, और उस पर जांच करनी होगी।" आपको बता दें, कि भारत और अमेरिका के बीच इस ड्रोन को लेकर सौदा 2017 में ही की जानी थी, लेकिन अज्ञात कारणों से इस डील को लेकर बात नहीं बन रही थी। हालांकि, माना जा रहा है, जब भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष जैक सुलिवन के साथ बैठक की थी, तो इस ड्रोन को लेकर भी बातचीत की गई थी।

डील में देरी की वजह अज्ञात
माना जा रहा है, कि बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने यह देखने की उत्सुकता जताई, कि ड्रोन सौदे में तेजी लाई जाए। भारत उत्सुक है, कि एक प्रारंभिक निर्णय से उसे MQ-98 प्रीडेटर आर्म्ड ड्रोन की शीघ्र डिलीवरी प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जो न केवल हिंद महासागर में, बल्कि LAC के साथ-साथ उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करेगा। वहीं, बाइडेन प्रशासन जल्द से जल्द इस सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक है और इस डील में हो रहे डेवलपमेंट्स पर नजर रखने वाले अधिकारियों के मुताबिक, अगर अमेरिका भारत के साथ इस डील को फाइनल कर लेता है, तो अमेरिका में आने वाले राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन को फायदा मिल सकता है।
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कितना खतरनाक है MQ-9B ड्रोन?
जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल कॉरपोरेशन के CEO विवेक लाल ने पीटीआई को बताया, कि "MQ-9B अपने भारतीय सैन्य उपयोगकर्ताओं को इस श्रेणी की किसी भी चीज़ की तुलना में अधिक दूर तक उड़ान भरने, हवा में ज्यादा समय बिताने और किसी भी अन्य समान विमान की तुलना में मिशन को ज्यादा विविधता से संभालने में सक्षम करेगा"। उन्होंने कहा, कि इस ड्रोन के जरिए दिन या रात या फिर किसी भी तरह के मौसम में सर्विलांस और हमला किया जा सकता है। उन्होंने कहा, कि इस ड्रोन में कई प्रकार के पेलोड को फिट किया जा सकता है और मिशन को अपने मन मुताबिक अंजाम दिया जा सकता है"। उन्होंने कहा, कि ये ड्रोन एक स्काईगार्जियन एक सीगार्डियन बन जाता है, जब यह 360 डिग्री समुद्री खोज रडार रखता है, जो उपयोगकर्ताओं को समुद्री डोमेन में ज्यादा से ज्यादा क्वालिटी के साथ सर्विलांस की क्षमता प्रदान करका है।

कई क्षमताओं से लैस है ड्रोन
विवेक लाल ने कहा, कि इस ड्रोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अन्य सोफिस्टिकेटेड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसका इस्तेमाल करते वक्त काफी शानदार जानकारियां मिलती हैं, जैसा किसी और यंत्र से मिलना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, कि इस ड्रोन का इस्तेमाल समुद्र के अलावा जमीन से, आकाश में और अन्य खुफिया ऑपरेशंस के दौरान किया जा सकता है। इस एयरक्राफ्ट ड्रोन के जरिए खोज और बचाव कार्य भी किया जा सकता है और इसके जरिए जंगल में लगी आग से लड़ने में भी मदद ली जा सकती है। उन्होंने कहा, कि सीमा पर नजर रखने और नौसैनिक बलों के लिए ये ड्रोन काफी शानदार है।

भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में तेजी
वहीं, इस डील को लेकर राजनीतिक सैन्य मामलों के सहायक विदेश मंत्री लेविस ने संवाददाताओं से कहा,कि भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में तेजी आई है। उन्होंने कहा, कि "जब हम भारत के साथ संबंधों और भारत के साथ हमारे सुरक्षा सहयोग और पिछले 10 वर्षों या उससे भी अधिक समय में भारत के साथ रक्षा संबंधों को देखते हैं, तो हमने वास्तव में देखा है,कि हमने देखा है, कि संबंधों में विकास और विस्तार का परिवर्तन हुआ है, जो बहुत सकारात्मक है।" आपको बता दें, कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत ने रक्षा उपकरणों की खरीददारी में विविधता को शामिल किया है और अब भारत हथियारों के लिए सिर्फ रूस पर निर्भर नहीं रहना चाहता है, लिहाजा अब भारत रूस के अलावा फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल से भी हथियारों की खरीददारी करता है।
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