संयुक्त राष्ट्र में भारत ने इजराइल के खिलाफ प्रस्ताव का किया समर्थन, फिलीस्तीन पर नहीं बदली है नीति!

Israel-Hamas conflict: दो हफ्ते पहले भारत ने इजराइल को लेकर संयुक्त राष्ट्र में पेश किए गये जॉर्डन के प्रस्ताव पर वोटिंग से गैर-हाजिर रहने का फैसला किया था। लेकिन, भारत अब उन 145 देशों में शामिल है, जिसने संयुक्त राष्ट्र में फिलीस्तीन के पक्ष और इजराइल के खिलाफ लाए गये गये प्रस्ताव के समर्थन में वोटिंग की है।

संयुक्त राष्ट्र में फिलीस्तीन के पक्ष में और इजराइल के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमें "पूर्वी यरुशलम सहित अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र और सीरियाई गोलान में" में इजरायली के कब्जे वाली गतिविधियों की निंदा की गई थी।

india supports united nations resolutions againts israel

संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के खिलाफ भारत

संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के खिलाफ जो मसौदा प्रस्ताव लाया गया, उसका शीर्षक था "पूर्वी यरुशलम और कब्जे वाले सीरियाई गोलान सहित कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजरायली बस्तियां", उसे 9 नवंबर को भारी बहुमत से पारित किया गया था।

वहीं, इस प्रस्ताव के खिलाफ सात देशों ने वोट किया, जिनके नाम हैं, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, हंगरी, इजराइल, मार्शल द्वीप, संघीय राज्य माइक्रोनेशिया और नाउरू, जबकि 18 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया।

इस प्रस्ताव के पास होने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने क्षेत्रों में इजराइल की निपटान गतिविधियों की निंदा की, और भूमि की जब्ती, संरक्षित व्यक्तियों की आजीविका में व्यवधान, नागरिकों के जबरन स्थानांतरण और भूमि के कब्जे से जुड़ी किसी भी गतिविधि की निंदा की, चाहे वह वास्तविक हो या राष्ट्रीय कानून के माध्यम से।

जॉर्डन के प्रस्ताव के खिलाफ क्यों था भारत?

28 अक्टूबर को, भारत ने जॉर्डन के मसौदा प्रस्ताव पर वोटिंग से गैर-हाजिर रहने का फैसला किया था, जिसमें शत्रुता की समाप्ति के लिए तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष विराम का आह्वान किया गया था। लेकिन, उस प्रस्ताव में उग्रवादी समूह हमास का कोई जिक्र नहीं किया गया था और भारत को इससे आपत्ति था।

भारत का आधिकारिक स्टैंड ये है, कि हमास ने 7 अक्टूबर को जो इजराइल के ऊपर हमला किया था, वो एक आतंकवादी हमला था और भारत उस हमले की निंदा करता है।

हालांकि, उस प्रस्ताव के पक्ष में 121 वोट, उसके विरोध में 14 वोट पड़े थे, जबकि, 44 देशों ने उस प्रस्ताव पर वोटिंग से गैर-हाजिर रहने का फैसला किया था।

उस समय, भारत ने कहा था, कि आतंकवाद एक "दुर्भावना" है और इसकी कोई सीमा, राष्ट्रीयता या नस्ल नहीं होती है और दुनिया को आतंकवादी कृत्यों के औचित्य पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

उस प्रस्ताव में पूरे गाजा पट्टी में नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के तत्काल, निरंतर, पर्याप्त और निर्बाध प्रावधान की भी मांग की गई थी। उस संकल्प का शीर्षक था "नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी और मानवीय दायित्वों को कायम रखना।"

9 नवंबर को भारत का मतदान, इजराइल-फिलिस्तीन मुद्दे पर दिल्ली की पारंपरिक स्थिति को दर्शाता है, जहां उसने बातचीत के आधार पर दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है, जिससे इजराइल के साथ शांति के साथ सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर रहने वाले फिलिस्तीन के एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य राज्य की स्थापना हो सके।

लिहाजा, अगर देखा जाए, तो ऐसा लगता है, कि इजराइल और फिलीस्तीन को लेकर मोदी सरकार, भारत के पुराने रूख पर ही कायम है और भारत टू स्टेट पॉलिसी का अभी भी समर्थन करता है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+