चीन ने भारत पर कसा तंज, एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने पर नहीं अर्थव्यवस्था पर ध्यान दें
चीन के सरकारी अखबार ने कहा भारत को एयरक्राफ्ट कैरियर तैयार करने की बजाए अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के उपाय सोचना चाहिए। कोचिन शिपयार्ड में वर्ष 2018 तक तैयार हो जाएगा आईएनएस विक्रांत।
बीजिंग। चीन के सरकारी मीडिया ने भारत पर तंज कसते हुए कहा है कि चीन को रोकने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने की जगह भारत को अपनी अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के बारे में सोचना चाहिए। चीन की सत्ताधारी कम्यूनिस्ट पार्टी की ओर से संचालित ग्लोबल टाइम्स ने यह टिप्पणी की है।

निर्माण में आएंगी कई रुकावटें
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, 'नई दिल्ली शायद एक एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के लिए अपना धैर्य खो रहा है। यह देश अभी औद्योगीकरण के शुरुआती स्तर में है और एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण के रास्ते में कई तरह की तकनीकी रुकावटें होंगी।' ग्लोबल टाइम्स ने आर्टिकल में आगे लिख है कि भारत और चीन ने एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण में अलग-अलग रास्ते अपनाए हैं। लेकिन दोनों ही देशों ने आर्थिक विकास की अहमियत की ओर अलग-अलग नतीजों को हासिल किया है। आर्टिकल के मुताबिक भारत को भारतीय महाद्वीप में चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर के निर्माण में कम उत्साह दिखाने की जरूरत है। चीन ने रविवार को अपनी नौसेना के संस्थापन के 68 वर्ष पूरे करने का जश्न मनाया है। तीन चीनी जहाजों की एक फ्लीट इस मौके पर सुबह शंघाई से एशिया, यूरोप और अफ्रीका के 20 देशों के मित्र दौरे के लिए रवाना हुई हैं। ग्लोबल टाइम्स की ही एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के विदेशी व्यापार में विस्तार और 'वन बेल्ट और वन रोड' पहल ने चीन की नेवी को एक नया मिशन दिया है और यह मिशन है देश के विदेशी हितों की रक्षा करना।
यहां पर चीन से एक कदम आगे है भारत
मिलिट्री एक्सपर्ट सोंग झोनपिंग का कहना है कि चीन की मिलिट्री स्ट्रैटेजी अब इसकी नेवी के लिए बदल गई है और अब यह विदेशों में अपनी पहुंच को बढ़ा रही है। चीनी नेवी अब अपने लियोओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण कर रही है जिसे इसकी नेवी के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। जहां चीनी नेवी बलूचिस्तान के ग्वादर और भारतीय महाद्वीप के दिजीबूती के जरिए विदेशी जमीन पर अपना प्रभाव बड़ा रही है तो वहीं चीन की आधिकारिक मीडिया भारत की ओर से एयरक्राफ्ट कैरियर के डेप्लॉयमेंट पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन अब अपने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा बेहतरी से कर सकता है। चीन के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण इसके आर्थिक विकास का ही नतीजा है। चीन ने से अलग भारत वर्ष 1961 से एयरक्राफ्ट कैरियर का प्रयोग कर रहा है। आईएनएस विक्रांत को वर्ष 1957 में खरीदा गया और इसने वर्ष 1971 में पाकिस्तान के साथ जंग में एक अहम भूमिका अदा की। आईएनएस विराट को वर्ष 1987 में कमीशंड किया गया। हाल ही में विराट को चार दशकों के बाद रिटायर कर दिया गया। वर्ष 2013 से भारत रूस का एयरक्राफ्ट कैरियर एडमिाल गोर्शिकोव का प्रयोग कर रहा है जिसे आईएनएस विक्रमादित्य के तौर पर जाना जाता है।












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