कनाडा से आजादी मांग रहा क्यूबेक, BJP नेता ने कहा- भारत को भी करना चाहिए अलगाववादियों का समर्थन

खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर भारत और कनाडा के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव के बीच, भारतीय जनता पार्टी के बैजयंत जय पांडा जैसे भारतीय नेताओं ने क्यूबेक जनमत संग्रह पर ध्यान आकृष्ट कराया है।

पीएम ट्रूडो की ओर से भारत पर लगाए संगीन आरोपों की प्रतिक्रिया में पांडा ने कहा कि कनाडा सरकार क्यूबेक अलगाववादियों के लिए जनमत संग्रह की अनुमति नहीं देती है, लेकिन खालिस्तानी अलगाववादियों से उन्हें कोई समस्या नहीं है।

referendum for independence of Quebec

भाजपा नेता ने कहा कि खालिस्तान समर्थक कनाडा में ना सिर्फ जनमत संग्रह कराते हैं, बल्कि हिंसात्मक कृत्यों का जश्न भी मनाते हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा में भी क्यूबेक जनमत संग्रह जैसे अलगाववादी आंदोलन होते हैं, वहां की सरकार उन्हें खालिस्तान आंदोलन जितनी स्वतंत्रता नहीं देती।

भाजपा नेता ने इशारा किया कि यदि कनाडा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों की अनुमति देता है और खालिस्तानी तत्वों का समर्थन करता रहता है, तो भारत को भी क्यूबेक की स्वतंत्रता के लिए प्रयास करने वालों का स्वागत करना चाहिए।

आपको बता दें कि क्यूबेक, कनाडा का एक प्रमुख हिस्सा है। आबादी के मामले में क्यूबेक देश में पहले और क्षेत्रफल के मामले में दूसरे नंबर का राज्य है। क्यूबेक में फ्रेंच बोलने 90 फीसदी लोगों का वर्चस्व है। वहीं, बाकी कनाडा में अंग्रेजी का वर्चस्व है।

कनाडाई फ्रेंचवासी खुद को अंग्रेजी बोलने वाले कनाडाई से अलग मानते हैं और अंग्रेजी बोलने वाले कनाडाई लोगों के प्रति श्रेष्ठता की भावना रखते हैं। कनाडा के ये लोग अपने फ्रेंच भाषा और संस्कृति को बचाने के लिए प्रयास करते रहे हैं।

कनाडा में क्यूबेक आंदोलन समय-समय पर जोर पकड़ता है। इस आंदोलन में एक रेफरेंडम की भी बात की जाती है जिसमें कनाडा से अलग देश बनाने ‌के बारे में लोगों को सीधा वोट देने की व्यवस्था होनी है।

कनाडा में वर्ष 1980 और 1995 में दो बार क्यूबेक की आजादी के मुद्दे पर रेफरेंडम हो चुका है।

1980 में हुए जनमत संग्रह का परिणाम एकडुट कनाडा के पक्ष में रहा था। 59 फीसदी लोगों ने कनाडा का हिस्सा बने रहने के पक्ष में वोट किया था। जबकि 40 प्रतिशत लोगों ने अलग क्यूबेक के पक्ष में वोट किया

15 साल बाद अक्टूबर 1995 में हुए रेफरेंडम में कनाडा के साथ रहने वाले 50.06 प्रतिशत के मुकाबले कनाडा का साथ न चाहने वालों की संख्या 49.04 प्रतिशत थी। जाहिर है कि क्यूबेक जनमत संग्रह बेहद मामूली अंतर से हार गया था।

दिलचस्प बात ये है कि इतने नजदीकी मुकाबले के बाद कभी भी कनाडा में फिर से जनमत संग्रह कराने की जरूरत नहीं समझी गई।

पिछले 28 सालों में क्यूबेक का मिजाज बदला है?

क्यूबेक में सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी के पास 35 सांसद हैं। वहीं क्यूबेक अलगाव की राजनीति करने वाली पार्टी ब्लॉक क्यूबेकॉइस के पास प्रांत के 78 निर्वाचित सांसदों में से 32 हैं। जाहिर है कि 30 अक्टूबर 1995 के जनमत संग्रह के नतीजे आज भी अपना महत्व बनाए हुए हैं।

1995 के जनमत संग्रह में, क्यूबेक के 125 चुनावी प्रभागों में मतदान किया गया था। इस जनमत संग्रह में 93.52% मतदान के साथ कुल 47,57,509 वोट पड़े थे। 54,000 से कुछ अधिक वोटों के साथ, क्यूबेक जनमत संग्रह हार गया। क्यूबेक की संप्रभुता के पक्ष में जहां 23,08,360 वोट पड़े, वहीं कनाडा से अलगाव न चाहने के विकल्प के पक्ष में 2,362,648 वोट पड़े।

कनाडा की प्रमुख जनमत और बाजार अनुसंधान फर्म मेनस्ट्रीट रिसर्च ने जून 2022 में क्यूबेक की संप्रभुता पर एक सर्वेक्षण किया था। लगभग 33 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने स्वतंत्रता के पक्ष में मतदान किया, जबकि 67 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि क्यूबेक को कनाडा का हिस्सा बने रहना चाहिए।

कनाडा की सबसे बड़ी मार्केट रिसर्च और एनालिटिक्स कंपनी लीगर 360 द्वारा क्यूबेक की स्वतंत्रता पर किए गए नवीनतम सर्वेक्षण सर्वेक्षण ने संप्रभुता आंदोलन वाले लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी थीं।

लीगर के फरवरी 2023 सर्वेक्षण के अनुसार, जहां 33 प्रतिशत क्यूबेकवासियों ने स्वतंत्रता के लिए मतदान किया, वहीं कनाडा के साथ रहने के पक्ष में 51 प्रतिशत लोग थे। लगभग 10 फीसदी मतदाताओं ने 'पता नहीं' का विकल्प चुना।

रिपोर्ट के मुताबिक यह कनाडा के साथ रहने का विकल्प चुनने वाले उत्तरदाताओं की संख्या में गिरावट है जिसने क्यूबेक संप्रभुता आंदोलन की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। इस बीच, भारत में, यह भाजपा वीपी पांडा जैसे राजनेता हैं जो कनाडा को क्यूबेक संप्रभुता आंदोलन की याद दिलाकर परेशान कर रहे हैं।

इंडिया टुडे से बात करते हुए पांडा ने कहा, "कनाडा में भी अलगाववादी आंदोलन हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख क्यूबेक है। यदि वे आतंकवादियों को आश्रय देते हैं जो भारतीयों के खिलाफ हिंसा करते हैं और अलगाववादी आंदोलन के लिए कनाडाई लोगों के खिलाफ भी हिंसा करते हैं। मेरा व्यंग्यात्मक ट्वीट था कि क्या हमें इस तरह का मैत्रीपूर्ण व्यवहार वापस करना चाहिए।"

पांडा ने पोलिटिको में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि "मतदान संख्या क्यूबेक को कनाडा से अलग होने और स्वतंत्र होने के लिए अधिक समर्थन दिखाती है। लेकिन वे वर्तमान में जनमत संग्रह की अनुमति नहीं दे रहे हैं"।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कई भारतीय हैं जो इस उद्देश्य के लिए ऑनलाइन जनमत संग्रह की सुविधा प्रदान कर सकते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+