Explainer: चीन के साथ घट गया भारत का व्यापार घाटा... मेक इन इंडिया या मोदी सरकार की सख्ती का है असर?
India-China Trade Deficit: इस कैलेंडर वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम हो गया है और विशेषज्ञों का कहना है, कि व्यापार घाटा, पिछले साल के 100 अरब डॉलर के आंकड़े से कम होने की संभावना है।
व्यापार घाटा तब उत्पन्न होता है, जब कोई देश निर्यात से ज्यादा आयात करता है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) के डेटा से पता चलता है, कि जनवरी से नवंबर 2023 के बीच में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 90.27 अरब डॉलर हुआ है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 2.16 अरब डॉलर कम है।

व्यापार घाटा कम होने की वजहें?
ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस वर्ष चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे में आई कमी की सबसे बड़ी वजह भारत के निर्यात में वृद्धि नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी वजह चीनी अर्थव्यवस्था में आया धीमापन है।
GACC डेटा से पता चलता है, कि चीन को भारतीय निर्यात जनवरी-नवंबर 2023 में बढ़कर 16.99 अरब डॉलर हो गया, जो 2022 की समान अवधि में 16.25 अरब डॉलर था, यानि इसमें सिर्फ 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस बीच, भारत में चीनी निर्यात जनवरी-नवंबर 2023 में गिरकर 107.27 अरब डॉलर हो गया है, जो 2022 की समान अवधि में 108.69 बिलियन डॉलर था, यानि इसमें 1.3 प्रतिशत की कमी आई है।
ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक फंडामेंटल्स (बीआरआईईएफ) और इंडिया चाइना इकोनॉमिक एंड कल्चरल काउंसिल (आईसीईसी) के संस्थापक मोहम्मद साकिब ने कहा, कि "चीन को भारत के निर्यात में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, लेकिन यही कारण नहीं है, कि व्यापार घाटे में थोड़ी गिरावट नहीं दिख रही है।"
दिप्रींट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, कि "बहुत सारा भारतीय निर्यात चीनी कच्चे माल पर निर्भर करता है, इसलिए यह विघटन का संकेत नहीं है। अन्य कारक भी भूमिका निभा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "भारत का कुल व्यापारिक व्यापार इस साल सिकुड़ गया है और चीन में काफी आर्थिक मंदी आई है। डॉलर में उतार-चढ़ाव का असर माल व्यापार में इस्तेमाल होने वाली विदेशी मुद्रा पर भी पड़ सकता है। इन कारकों का असर व्यापार घाटे पर हो सकता है।"

कैसा चल रहा है भारत-चीन के बीच का व्यापार?
कुल व्यापार के संदर्भ में देखा जाए, तो चीन जितना सामान भारत में बेचता है, भारत उसका 10वां हिस्सा ही चीन में बेच पाता है।
भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के प्रोफेसर बिस्वजीत नाग ने तर्क दिया, कि 2023 में अब तक चीन को भारतीय निर्यात में वृद्धि "न्यूनतम" रही है। उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ''हम इसे एक ट्रेंड नहीं मान सकते।''
उन्होंने कहा, कि यह भी कोई गारंटी नहीं है और चीनी कैलेंडर वर्ष में साल के खत्म होने के बाद इस व्यापार घाटे को फिर से 100 अरब डॉलर के पार दिखाया जा सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि व्यापार घाटे की असली तस्वीर को समझने के लिए इस साल के खत्म होने के बाद सामने आने वाले डेटा का इंतजार किया जाना चाहिए।

साल-दर-साल व्यापार घाटे में 'मामूली' गिरावट
दिप्रिंट की एक रिपोर्ट में इस साल जनवरी-नवंबर के चीनी सीमा शुल्क डेटा का विश्लेषण किया गया है, जिससे पता चला कि जून से, चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे के आंकड़ों में साल-दर-साल थोड़ी गिरावट का रुख देखा गया है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय के अनुसार, यह गिरावट "काफी मामूली" है और चीन में भारतीय निर्यात में देखी गई वृद्धि कैलेंडर वर्ष के पहले 11 महीने इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स, कपास, लोहा और इस्पात और लौह अयस्क के व्यापार में वृद्धि के कारण हैं।
सहाय ने कहा, "व्यापार घाटे में गिरावट का रुख मामूली है और हम 100 अरब डॉलर के आंकड़े से पीछे रह सकते हैं।" उन्होंने कहा, कि "चीन को भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद और कपास, लोहा और इस्पात और लौह अयस्क जैसे कच्चे माल शामिल हैं। बेशक, हम मूल्य-संवर्द्धन उत्पादों और प्रसंस्कृत क्षेत्र में और अधिक वृद्धि देखना चाहेंगे।''
उन्होंने कहा, कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना, जिसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करके घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है, वो फिलहाल "अभी तक फल देने वाली" नहीं है, क्योंकि अभी इसके तहत निवेश होना बाकी है और इसका रिजल्ट देखने में अभी कुछ साल और लग सकते हैं।












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