मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के बेटे का पेशावर से हुआ अपहरण! किसने दिया इस घटना को अंजाम?
भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी हाफिज सईद के बेटे को किडनैप कर लिया गया है। ऐसी चर्चा कुछ दिनों सोशल मीडिया काफी तेजी से वायरल हो रही है। हाफिज सईद का बेटा कमालुद्दीन सईद कल शाम से लापता है।
सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही खबरों के मुताबिक पाकिस्तान के पेशावर में हाफिज सईद के बेटे कमालुद्दीन सईद को कार सवारों ने किडनैप कर लिया। लेकिन खबर की पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि खबर के वायरल होने के बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) में हड़कंप मच गया है। एजेंसी ने कमालुद्दीन सईद की तलाशी के लिए जमीन आसमान एक कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक अभी कमालुद्दीन का पता नहीं लग सका है। टाइम्स अल्जेब्रा नाम के ट्विटर हैंडल ने दावा किया है कि अज्ञात लोग कमालुद्दीन को लेकर गए हैं। जिसके बाद से सुराग नहीं है।
सवाल उठ रहे हैं कि इस रहस्यमय अपहरण के पीछे कौन है? उनके मकसद क्या हैं? क्या कमालुद्दीन सुरक्षित और स्वस्थ पाया जाएगा, या कुछ और भी भयावह खेल है?
एक पाकिस्तानी वेबसाइट ने लिखा है कि हाफ़िज़ सईद के बेटे कमालुद्दीन सईद के लापता होने से पाकिस्तान में अनिश्चितता का साया मंडरा रहा है। हालांकि उसके अपहरण से जुड़ी परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन एक बात निश्चित है कि जैसे-जैसे इस सवाल का जवाब ढूंढने वालों की तादात तेजी से बढ़ती जा रही है।
ट्विटर पर ये भी दावा किया जा रहा है कि कमालुद्दीन के अपहरण में पाकिस्तान की ही खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) का हाथ हो सकता है।
हाल के समय में पाकिस्तान, कनाडा, अफगानिस्तान, इटली आदि देशों में बड़ी संख्या में भारत विरोधी तत्वों आतंकी मारे गए हैं। ऐसे में आईएसआई पहले से ही उनकी सुरक्षा को लेकर अलर्ट है।
हाल में कनाडा में हुए कुछ मामलों के बाद संभव है कि ISI ने ही कमालुद्दीन को सुरक्षित जगह पर छिपा दिया है। गौरतलब है कि कुछ समय पहले हाफिज के घर के पास एक विस्फोट हुआ था। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें 2 पुलिसकर्मी भी शामिल थे। इसके अलावा घटना में 24 लोग जख्मी भी हुए थे।
पाकिस्तान के तत्कालीन गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह खान ने इस हमले के पीछे भारत का हाथ बताया था। उन्होंने दावा किया था कि इस हमले के पीछे टीटीपी का हाथ था जिसे भारत का समर्थन मिल रहा था।












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