Middle-East: भारत की नई रणनीति मिडिल-ईस्ट में चीन को कैसे काउंटर कर रहा है? जानिए विशालकाय प्लान

भारत, इजरायल, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात ने मिलकर I2U2 ग्रुप का निर्माण किया था, जिसमें मिडिल ईस्ट में विशालकाय रेल परियोजना के निर्माण को लेकर बातचीत की गई है।

india Middle-East plan

India in Middle-East: खाड़ी में चीन के बढ़ते कदम का मुकाबला करने के लिए, भारत एक महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजना की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य नई दिल्ली को मध्य पूर्व से जोड़ना है। भारत का ये मेगा प्लान अचानक दुनिया के सामने आया है, जिसने चीन को भी चौंका दिया है।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने यूएस और यूएई समकक्षों के साथ फिछले हफ्ते बैठक की, जिसमें सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी भाग लिया था। इस दौरान सभी देशों के प्रतिनिधियों ने मध्य पूर्व में एक संयुक्त बुनियादी ढांचा परियोजना पर चर्चा की, जो मध्य पूर्वी देशों को विशालकाय रेल नेटवर्क के जरिए आपस में कनेक्ट करेगा।

भारत के लिए मध्य-पूर्व को कनेक्ट करने वाला महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजना, विशालकाय प्लान का हिस्सा है, जिसका मूल उद्येश्य भविष्य में चीन को ना सिर्फ काउंटर करना है, बल्कि एक व्यापारिक रास्ते का भी निर्माण करना है, जिसके बाद भारत मिडिल ईस्ट में बहुत आसानी से अपने सामान पहुंचा सकता है।

एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में I2U2 समूह की बैठकों के दौरान पहली बार ये विचार सामने आया था, जिसमें इजरायल भी शामिल है और अब यह परियोजना आगे बढ़ निकली है।

मिडिल ईस्ट में I2U2 प्लान

I2U2 समूह, जो मध्य पूर्व में यूएस-भारत सहयोग के लिए एक अपेक्षाकृत नया चैनल है, उसको लेकर सोचा नहीं गया था, कि ये चीन को काउंटर करने वाला टूल बन सकता है। लेकिन, ये खुलकर चीन के खिलाफ खड़ा हुआ है, जिसमें इजरायल भी शामिल है।

सऊदी अरब ने इज़राइल के साथ संबंधों को औपचारिक रूप नहीं दिया है, जिसका अर्थ है, कि फिलहाल इजरायल इस परियोजना का औपचारिक हिस्सा नहीं है, लेकिन I2U2 में इसकी सदस्यता से पता चलता है कि इस परियजोना में इसकी अहम भूमिका होगी।

कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट से पता चलता है, कि अब्राहम समझौते से भारत कितना लाभान्वित हो रहा है। ये वो समझौता है, जिसे ट्रम्प-युग में अंजाम दिया गया था, जिसने इजरायल और उसके कई अरब पड़ोसियों के बीच संबंधों को सामान्य किया।

मध्यपूर्ण में रेल परियोजना भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका की वो पहल है, जिसने इंडो-पैसिफिक में चीन को काउंटर करने के बाद मध्य-पूर्व में फैलाया गया कदम है।

कनेक्टिविटी से भारत को फायदा क्या होगा?

अब यह साफ है, कि बाइडेन प्रशासन कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट को मध्य-पूर्व में चीनी शक्ति को संतुलित करने के एक तरीके के रूप में देखता है। इजरायल के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने एक्सियोस को बताया, "I2U2 को किसी ने जोर देकर नहीं कहा, कि ये चीन के खिलाफ है, लेकिन असल में ये पहले दिन से ही चीन के खिलाफ था।"

मध्य पूर्व में रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता के रूप में भारत की क्षमता का लाभ उठाना है। इस प्रोजेक्ट में भारत का काम, मध्य पूर्व में किस तरह से रेल लाइन बिछाई जाएगी, उसका काम देखना है।

भारत का रेल नेटवर्क प्रणाली दुनिया में पहले नंबर पर है, इसके साथ ही सीमा पार बिजली-साझाकरण व्यवस्था में भी भारत का काफी अहम योगदान शामिल है। भारत अपने पड़ोसी देशों, जैसे बांग्लादेश और नेपाल को बिजली सप्लाई करता है, लिहाजा भारतीय अधिकारियों को चीन के BRI का मुकाबला करने के लिए मध्य पूर्व में एक मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित करने की उम्मीद है।

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    शक्तिशाली होता भारत

    भारत के लिए सबसे बेहतरीन स्थिति ये है, कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर भारत ग्रीस के पीरियस बंदरगाह तक और यूरोप में आगे बढ़ने वाले भूमि और समुद्री व्यापार मार्गों को कनेक्ट करे और उसका फायदा उठाए।

    बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) निवेश और ईरान के साथ हाल के रणनीतिक समझौते ने निश्चित तौर पर मध्य-पूर्व में चीन को बढ़त दी है, लेकिन भारत, अमेरिका, और इजरायल का मध्य पूर्व में प्रोजेक्ट, चीन को पीछे धकेलने का काम करेगा।

    चीन ने हाल ही में सऊदी अरब और ईरान के बीच समझौता करवाया है और एक संकेत दे दिया है, कि अब चीन वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका मुकाबला भारत को करना ही होगा। मध्य पूर्व भारत के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है, जहां भारत के कई व्यापारिक हित हैं, जहां रहने वाले कई लाख लोग, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाते हैं।

    भारत के पास अब भारत-प्रशांत क्षेत्र से अलावा अपना प्रभाव, व्यापार और कूटनीति को बढ़ाने के अवसर हैं और जी-20 की अध्यक्षता करते हुए, तेजी से आर्थिक विकास का आनंद लेते हुए, और दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पछाड़ते हुए, भारत के पास आने वाले वक्त में दुनिया के प्लेटफॉर्म पर शक्तिशाली देश के तौर पर पहचान बनाने का बेहतरीन मौका है।

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