रिसर्च में भारत पूरी दुनिया में सबसे कम करता है खर्च, कैसे पूरा होगा विश्व गुरु बनने का सपना?

भारत को असर टेक्नोलॉजी के लिए विकसित देशों, जैसे अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन या फिर रूस के सामने गिड़गिड़ाना पड़ता है और ये देश टेक्नोलॉजी शेयर करने के नाम पर भारत को या तो ब्लैकमेल करते हैं, या फिर देते ही नहीं हैं।

नई दिल्ली, जुलाई 21: कहते हैं, बार बार फेल होकर ही वैज्ञानिक सफलता हासिल की जा सकती है और बिना वैज्ञानिक सफलता हासिल किए हुए कोई भी देश कामयाबी की मंजिल को नहीं छू सकता है, लेकिन भारत को लेकर आई एक रिपोर्ट चिंताजनक है। सरकारी थिंक-टैंक NITI Aayog और इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्पिटिटिवनेस ने मिलकर एक अध्ययन किया है, जिसमें पता चला है कि, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R & D) पर पूरी दुनिया में सबसे कम खर्च भारत करता है।

रिसर्च पर भारत का ध्यान नहीं!

रिसर्च पर भारत का ध्यान नहीं!

भारत में अनुसंधान एवं विकास निवेश, यानि रिसर्च एंड डेवलपमेंट में वास्तव में काफी कम खर्च किया जाता है और पता चला है कि, ममनोहन सरकार में रिसर्च पर जितना खर्च किया जाता था, उसे मोदी सरकार में और कम ही कर दिया गया है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2008-09 में भारत की कुल जीडीपी का रिसर्च एंड डेवलपमेंट में 0.8% खर्च किया जाता था, जो साल 2017-18 में घटाकर 0.7% हो गया है। इस रिपोर्ट में दिए गये आंकड़ों से पता चला है कि, भारत का रिसर्च एंड डेवलपमेंट अन्य ब्रिक्स देशों की तुलना में काफी कम है। ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका क्रमश: 1.2%, 1.1%, 2% से अधिक और 0.8% खर्च करते हैं। वहीं, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर विश्व का औसत लगभग 1.8% है।

रिसर्च पर नहीं ध्यान, कैसे बनेंगे महान?

रिसर्च पर नहीं ध्यान, कैसे बनेंगे महान?

भारत जैसे विकासशील देशों में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर कम खर्च करने के पीछे, कई कारणों में से एक कारण यह भी है, कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश करने के बाद उसका परिणाम आने में काफी वक्त लगने की संभावना तो होती ही है, इसके अलावा भी यह नहीं कहा जा सकता है, कि रिसर्च कामयाब ही रहेगा। महान से महान वैज्ञानिक भी अगर रिसर्च करते हैं, तो कामयाबी की गारंटी नहीं रहती है। जबकि, भारत जैसे देशों में भूख, रोग नियंत्रण, और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने जैसे बड़े मुद्दे हैं और अधिकारियों ने उनसे निपटने के लिए संसाधनों को मोड़ दिया है। अध्ययन में कहा गया है, कि "हालांकि, यह तर्क दिया जा सकता है कि इन दबाव वाली चिंताओं को एक बाधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए,बल्कि आर एंड डी के दायरे को व्यापक बनाने का अवसर होना चाहिए।"

टेक्नोलॉजी का नहीं हो पाता विकास

टेक्नोलॉजी का नहीं हो पाता विकास

भारत को असर टेक्नोलॉजी के लिए विकसित देशों, जैसे अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन या फिर रूस के सामने गिड़गिड़ाना पड़ता है और ये देश टेक्नोलॉजी शेयर करने के नाम पर भारत को या तो ब्लैकमेल करते हैं, या फिर देते ही नहीं हैं। बावजूद इसके भारत में रिसर्च पर ध्यान नहीं दिया जाता है। डेटा से पता चलता है कि, रिसर्च पर कम खर्च करने वाले देश लंबे समय में अपनी मानव पूंजी को बनाए रखने में विफल रहते हैं। इस रिसर्च में कहा गया है कि, "आर एंड डी पर कम खर्च, और कम अभिनव अवसर लोगों को बेहतर अवसर के लिए एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र -राज्य/देश में स्थानांतरित करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इस घटना को ब्रेन ड्रेन के रूप में जाना जाता है और एक राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को कम करता है, जो देश की समग्र अर्थव्यवस्था को और प्रभावित करता है। हालांकि, पीएम मोदी रिसर्च एंड डेवलपमेंट की बात काफी करते हैं, लेकिन इसके बाद भी बजट का नहीं बढ़ना हैरान करने वाला है।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट और पीएम मोदी

रिसर्च एंड डेवलपमेंट और पीएम मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले साल स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर ध्यान देने का ऐलान किया था। पीएम मोदी ने कहा था, कि उनकी सरकार ब्रांड इंडिया को मजबूत करने के लिए संकल्पित है और भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर गंभीरता से काम किया जाना जरूरी है। हालांकि, पीएम मोदी ने इस बात को कबूल किया था, कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश को कई गुना बढ़ाना होगा, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ये बात भी जोड़ दिया था, कि ये सिर्फ सरकारी प्रयास से संभव नहीं होने वाला है, बल्कि इसमें निजी क्षेत्र के लोगों का भी जुड़ना जरूरी है।

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