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रिसर्च की आड़ में जासूसी करेगा चीन! श्रीलंका पहुंच रहा 'ड्रैगन' का खोजी जहाज, भारत नाराज

शोध और सर्वेक्षण की आड़ में चीन का एक जासूसी जहाज को श्रीलंका के बंदरगाह पहुंचने वाला है। भारतीय नौसेना ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

कोलंबो/नई दिल्ली, 5 अगस्त : भारत और चीन में एक बार फिर से तनाव बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। भारत और चीन के बीच बढ़ते तनाव की वजह चीन का खोजी जहाज यूआन वांग 5 (Yuan Wang 5) हैं। दरअसल, चीन का यह जासूसी जहाज पड़ोसी देश श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। भारत ने इस पर पहले ही ऐतराज जता चुका है। भारतीय नौसेना ने श्रीलंका से आग्रह किया था कि, वो चीन के इस खोजी जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की इजाजत ना दे लेकिन श्रीलंका माना नहीं और भारत के इस अनुरोध को दरकिनार कर चीन के इस खोजी जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की इजाजत दे दी (India miffed at sri lanka for allowing PLA satellite tracker ship in Hambantota)। भारत के अनुरोध को अंदेखी करने से नई दिल्ली कोलंबो से नाराज है।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ती

भारत ने जताई कड़ी आपत्ती

शोध और सर्वेक्षण की आड़ में चीन का एक जासूसी जहाज को श्रीलंका के बंदरगाह पहुंचने वाला है। भारतीय नौसेना ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। हालांकि, श्रीलंका ने भारत के अनुरोध को नजरअंदाज करते हुए चीन के इस खोजी जहाज को अपने बंदरगाह में रुकने की इजाजत दे दी है। यह चीनी 'वैज्ञानिक शोध जहाज' 11 अगस्‍त को हंबनटोटा बंदरगाह पर पहुंचेगा जिसे श्रीलंका ने पैसा नहीं चुका पाने की एवज में चीन को 99 साल की लीज पर दे दिया है।

शोध की आड़ में जासूसी!

शोध की आड़ में जासूसी!

भारत को आशंका है कि इस जहाज पर लगे शक्तिशाली एंटीना सामरिक और सैन्‍य प्रतिष्‍ठानों की जासूसी करने में सक्षम हैं। फिलहाल, भारत इस पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। खबर है कि, 071 टाइप लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (एलपीडी) लुयांग क्लास गाइडेड मिसाइल विध्वंसक भी हिंद महासागर को पार कर रहा है और अफ्रीका के पूर्वी समुद्र तट पर जिबूती में चीनी बेस की ओर बढ़ रहा है।

हंबनटोटा बंदरगाह चीन को दिया गया है

हंबनटोटा बंदरगाह चीन को दिया गया है

बता दें कि, श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे की सरकार ने चीन के उपग्रह ट्रेकर सैन्य जहाज युआन वांग 5 को हंबनटोटा में आने की मंजूरी दी है। बता दें कि, रानिल विक्रमसिंघे जब प्रधानमंत्री थे, उस समय श्रीलंका ने रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह को औपचारिक तौर पर चीन को 99 साल के पट्टे पर दे दिया था।

श्रीलंका की सफाई

श्रीलंका की सफाई

दूसरी तरफ, चीन के खोजी जहाज के हंबनटोटा बंदरगाह पर आने को लेकर श्रीलंका ने सफाई देते हुए कहा कि, चीन का यह जहाज केवल ईंधन भरने के लिए आ रहा है। दो अगस्त को श्रीलंकाई कैबिनेट के प्रवक्ता बंदुला गुणवर्धन ने कहा, "राष्ट्रपति ने कैबिनेट को बताया कि दोनों देशों के साथ काम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए जाएंगे ताकि कोई समस्या पैदा न हो।

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