आसियान में क्यों है भारत की धमक?

Posted By: BBC Hindi
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    आसियान
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    आसियान यानी दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का समूह. दस सदस्यों वाली इस संस्था के गठन का मुख्य मकसद दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में अर्थव्यवस्था, राजनीति, सुरक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाना था.इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे पांच देशों ने साथ मिलकर अगस्त 1967 में जब आसियान का गठन किया था तब इस बात का अनुमान ही नहीं था कि यह संस्था अपने गठन के 50 साल भी पूरा कर सकती है. इस बार इसका 31वां शिखर सम्मेलन मंगलवार को फिलीपींस के मनीला में समाप्त हो रहा है.म्यांमार और थाईलैंड में भारत के राजदूत रहे विवेक काटजू आसियान को खासा सफ़ल मानते हैं.

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    अमरीका और चीन का दख़ल

    काटजू कहते हैं, "इससे 10 देशों की पहचान बनी है. राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से देखें तो इन्हें सफ़लता मिली है. अनौपचारिक रूप से इन्होंने अपने मसलों को ख़ुद सुलझाया है और एक तरह से इसने उन्हें एकजुट और मज़बूत किया है."आज आसियान विकासशील देशों का गुट ज़रूर हो लेकिन उसमें ग़ैर-सदस्य अमरीका, चीन और जापान जैसे शक्तिशाली देश खासी रुचि रखते हैं. यहां तक कि भारत भी इसका सदस्य नहीं है और उसके लिए भी यह संगठन खासा महत्व रखता है.भारत इसमें क्यों खासी रुचि रखता है इसकी वजह मलेशिया में भारत की उच्चायुक्त रहीं वीना सीकरी व्यापार और समुद्री सुरक्षा बताती हैं. वह कहती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार आसियान में जा रहे हैं और हर बार नए मुद्दों पर बात होती है.

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    भारत-प्रशांत क्षेत्र

    सीकरी कहती हैं, "आसियान और भारत के बीच पिछले 25 सालों से बातचीत चल रही है. इससे धीरे-धीरे भारत का व्यापार और सदस्य देशों के साथ दोस्ती बढ़ रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री रास्तों के जुड़ाव पर भी खासा ध्यान दिया है. साथ ही इस इलाके को भारत प्रशांत क्षेत्र कहा जा रहा है जो भारत को पहचान दिला रहा है."वहीं, आसियान में भारत की भूमिका को विवेक काटजू भी महत्वपूर्ण मानते हैं. वह कहते हैं कि आसियान का हर सदस्य देश चाहता है कि भारत की इसमें ज़िम्मेदारी बढ़े इसीलिए उसे बुलाया जाता है.वह कहते हैं, "अमरीका भी भारत की भूमिका को स्वीकार करने लगा है और इस क्षेत्र को पहले एशिया प्रशांत क्षेत्र कहने वाला अमरीका अब इसे भारत-प्रशांत क्षेत्र मानने लगा है."

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    शिखर सम्मेलन खेल है?

    अमरीका और भारत के अलावा आसियान में चीन की बड़ी भूमिका हो चुकी है. इसको काटजू स्वीकार करते हैं और कहते हैं कि इसी कारण अमरीका भारत का अधिक समर्थन कर रहा है.वह कहते हैं कि अमरीका का पहले काफ़ी दबदबा रहा जो चीन के ताकतवर होने के बाद कम हो गया लेकिन वह भारत को आगे कर चीन की ताकत को कम करना चाहता है.वहीं, वरिष्ठ पत्रकार एसडी गुप्ता इस पूरे शिखर सम्मेलन को एक 'खेल' बताते हैं. वह कहते हैं कि आसियान देश चीन पर व्यापार के लिए निर्भर हो गए हैं. अमरीका के तीन से चार आसियान देशों में सैन्य अड्डे रहे हैं लेकिन अब चीन इन देशों के करीब है.एसडी गुप्ता के मुताबिक़, "आसियान देशों और चीन के बीच सबसे बड़ी समस्या दक्षिण चीन सागर है. हालांकि, चीन यहां उस मुद्दे को नहीं उठाने देता है क्योंकि वह व्यापार भी करना चाहता है. अमरीका ने कई बार इस मुद्दे को उठाना चाहा लेकिन उसने हर बार इसे नहीं उठाने दिया."

    साउथ चाइना सी का मुद्दा

    भारत का बड़ा व्यापार दक्षिण चीन सागर से होता है इसीलिए वह इस मुद्दे में दख़ल देता रहा है.गुप्ता कहते हैं, "समुद्री रास्ते से स्वतंत्र रूप से आने जाने की वकालत भारत और अमरीका दोनों करते रहे हैं. भारत का व्यापार इससे प्रभावित हो सकता है. भारत को इस मुद्दे को आसियान में उठाना चाहिए."हालांकि, आसियान के देश खुलकर चीन के सामने जाने से कतराते हैं. गुप्ता कहते हैं कि चीन को यह देश एक अजगर मानते हैं जो उन्हें कभी भी निगल सकता है.वहीं, विवेक काटजू कहते हैं कि चीन और अमरीका के दख़ल के कारण ही आसियान इतना बड़ा गुट बन पाया है जिसमें शक्तिशाली देश रुचि लेते हैं.वीना सीकरी का कहना है कि विवाद सभी देशों के बीच ज़रूर हैं लेकिन वह इतने तल्ख़ नहीं हैं जिससे संबंध ख़राब होने की नौबत आ जाएं, इन्हें बातचीत से ज़रूर सुलझाया जा सकता है.

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    English summary
    India is threat in ASEAN Why

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