भारत-चीन के बीच 16वें दौर में 12 घंटे हुई चर्चा, फिर भी नहीं निकला कोई ठोस नतीजा
भारत और चीन के बीच 16वें दौर की बैठक रविवार सुबह साढ़े नौ बजे से चल रही थी जो रात के 10 बजे खत्म हुई है। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंदय सेनगुप्ता कर
बीजिंग/नई दिल्ली, 18 जुलाई : भारत-चीन कमांडर्स की बीच 16वें दौर की वार्ता (India-China CommanderLevel Talks) खत्म हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक नतीजा नहीं निकला है। हालांकि, समय-समय पर हो रही वार्ता से दोनों देशों के बीच की नाराजगी थोड़ा शांत अवश्य हुआ होगा। जानकार बताते हैं कि, शीर्ष भारतीय और चीनी सैन्य अधिकारियों के बीच निरंतर बातचीत के बाद भी अप्रैल 2020 तक भारत जिस स्थिति की मांग कर रहा है, वह आपको कही देखने को नहीं मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, लद्दाख में यथास्थिति बहाल करने को लेकर भारत-चीन सैन्य वार्ता में कोई नतीजा नहीं निकला। भारत ने चीन से साफ कहा है कि अप्रैल 2020 में जिस तरह की सैन्य स्थिति और परिस्थिति एलएसी पर थी, वैसा ही फिर से हो तभी भारतीय सेना पीछे हटेगी।
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अब अगले दौरे की वार्ता का इंतजार!
भारत और चीन (India China Commander level talks) के बीच रविवार को 16वें दौर की वार्ता खत्म हो चुकी है। दोनों देशों के बीच यह वार्ता भारतीय क्षेत्र चुशुल-मोल्डो में हुई। बता दें कि भारत और चीन के बीच 16वें दौर की बैठक सुबह साढ़े नौ बजे से चल रही थी जो रात के 10 बजे समाप्त हुई। बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंदय सेनगुप्ता ने किया तो वहीं, चीन के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई दक्षिण शिनजियांग सैन्य जिला प्रमुख मेजर जनरल यांग लिन ने की।

गलवान घाटी में क्या हुआ था, जानें
बता दें कि, 6 जून, 2020 को, दो परमाणु शक्तियों (चीन और भारत) के बीच गतिरोध और बढ़ते तनाव को हल करने के लिए पहली बार कोर कमांडर-स्तरीय बैठक हुई थी। उसके एक सप्ताह या कुछ अधिक समय के बाद 15 जून को, भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ गया और जिसका नतीजा भारत को अपने 20 सैनिकों को खो कर चुकानी पड़ी थी। चीनियों ने भारतीय सेना पर लोहे की छड़ों और हथियारों से हमला किया था, जो उसके बर्बरतापूर्ण कृत्यों को दर्शाता है। लेकिन इसके बाद भी दोनों देशों की बीच बातचीत जारी रही, और अगले छह महीनों के भीतर सात दौर की सैन्य कमांडर वार्ता हुई। लेकिन इसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं देखा गया।

नहीं निकला कोई ठोस नतीजा
16वें दौर की बैठक को लेकर कहा जा रहा है कि हॉट स्प्रिंग क्षेत्र के पैट्रोलिंग पॉइंट 15 में पूरी तरह से सेना को पीछे हटाने को लेकर भी बातचीत में प्रगति होने की संभावना जताई गई है। रविवार को हुई 16वें राउंड की सैन्य वार्ता में भारत ने चीन से अप्रैल 2020 से पहले एलएसी पर जारी यथास्थिति को फिर से बरकरार रखने की बात की। बता दें कि, अप्रैल 2020 के बाद से ही दोनों देशों के बीच एलएसी पर गतिरोध जारी है।

15वें चरण में भी स्थिति जस के तस
भारत लगातार यह कहता रहा है कि एलएसी पर शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए काफी जरूरी है। दूसरी तरफ भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच 11 मार्च को हुई 15वें चरण की बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान में कहा था कि मुद्दों के समाधान से क्षेत्र में शांति और सामंजस्य बहाल करने में मदद मिलेगी और द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति होगी।

मई 2020 से जारी है गतिरोध
गौरतलब है कि भारत और चीन के सशस्त्र बलों के बीच मई, 2020 से पूर्वी लद्दाख में सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.वहीं, भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में जारी गतिरोध को सुलझाने के लिए अब तक कई दौर की सैन्य एवं राजनयिक वार्ता कर चुकी है, लेकिन इसका अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. हालांकि, दोनों पक्षों के बीच राजनयिक और सैन्य वार्ता के परिणामस्वरूप कुछ इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने का काम भी हुआ है। अभी दोनों देशों में से प्रत्येक ने एलएसी पर संवेदनशील सेक्टर में करीब 60 हजार से अधिक सैनिक तैनात कर रखे हैं।

जयशंकर ने वांग यी को दोस्ती का मंत्र दिया था
गौरतलब है कि सात जुलाई को G-20 बैठक से इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के उनके समकक्ष वांग यी ने बाली में पूर्वी लद्दाख में स्थिति पर बातचीत की थी। करीब एक घंटे तक चली मुलाकात में जयशंकर ने वांग को पूर्वी लद्दाख में सभी लंबित मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता के बारे में बताया था। साथ ही उन्होंने भारत-चीन के बीच की दोस्ती आगे तक कैसे ले जाया जा सकता है, इसके लिए जयशंकर ने वांग यी को मूल मंत्र भी बताया था।

समस्या का समाधान निकलेगा तभी बात बनेगी
विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद एक बयान में कहा था, 'विदेश मंत्री ने गतिरोध वाले कुछ क्षेत्रों से सैनिकों के पीछे हटने का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि शेष सभी इलाकों से पूरी तरह से पीछे हटने के लिए इस गति को बनाए रखने की जरूरत है ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल की जा सके.' जयशंकर ने द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकाल तथा पूर्व की बातचीत के दौरान दोनों मंत्रियों के बीच बनी समझ का पूरी तरह से पालन करने के महत्व को भी दोहराया था।












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