इजराइल की वजह से बिगड़े भारत और कनाडा के संबंध..जानिए क्यों दावा कर रहा है पाकिस्तानी मीडिया?
Is RAW Working with Mossad: भारत और कनाडा के संबंध अब खराब हो चुके हैं और खराब हो चुके इस संबंध में अभी काफी ज्यादा गिरावट का आना बाकी है, क्योंकि दोनों ही देश अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। गुरुवार को नई दिल्ली ने कनाडा में अपने वाणिज्य दूतावासों में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरा बताते, हुए कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को निलंबित कर दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, कि "कनाडाई सरकार की निष्क्रियता के कारण सुरक्षा स्थिति में व्यवधान उत्पन्न हुआ है और हमने वीजा आवेदन निलंबित कर दिए हैं।" उन्होंने घोषणा की है, कि ई-वीजा सहित सभी श्रेणियों के वीजा आवेदनों को अज्ञात अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है।

वहीं, कई कनाडाई राजदूतों को सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने के बाद, भारत में कनाडाई उच्चायोग ने भी घोषणा की है, कि वह देश में अधिकारियों की उपस्थिति को अस्थायी रूप से "समायोजित" करेगा।
हालांकि, जैसा कि भारत और कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी की हत्या के मुद्दे पर विवाद जारी है, सीमा पार पाकिस्तान में पाकिस्तानी मीडिया के पास कहने के लिए कई मनोरंजक कहानियां हैं। पाकिस्तानी मीडिया में भारत-कनाडा संबंधों को लेकर एक से लेकर एक गप दिए जा रहे हैं, जिसमें एक थ्योरी ये है, कि इजराइल की वजह से भारत और कनाडा के बीच संबंध खराब हुए हैं।
भारत-कनाडा तनाव में उछल रहा पाकिस्तान
पूर्व पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत और कनाडा के बीच राजनयिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा, कि भारत एक "शरारती" राष्ट्र बन गया है, जो "नाटो सदस्य देश की संप्रभुता का उल्लंघन करते हुए पकड़ा गया है।"
हालांकि, भारत की तरफ से पाकिस्तान को लेकर कहा गया, कि "पाकिस्तान की बातों को अब कोई गंभीरता से नहीं लेता है।"
वहीं, कनाडाई प्रधान मंत्री के आरोपों के दो दिन बाद, 20 सितंबर को पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित एक संपादकीय में भी इसी तरह की राय व्यक्त की गई थी। पाकिस्तान के लोकप्रिय प्रकाशन 'डॉन' ने एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार को यह एहसास हो रहा होगा, कि अगर स्थिति बिगड़ती है, तो परिणाम शर्मनाक हो सकते हैं।
'डॉन' के संपादकीय में इस राजनयिक संकट के लिए भारत और इजराइल के बीच 'घनिष्ठ संबंध' को जिम्मेदार ठहराया गया है। अख़बार ने लिखा है, कि "भारत जिसे भी आतंकवादी मानता है, उस पर हमला करने का तरीका इज़रायली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद की हैंडबुक से लिया गया है।"
पाकिस्तानी मीडिया में चर्चा की जा रही है, कि मोसाद की तरफ अब भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ भी ऑपरेशंस को अंजाम देता है। आपको बता दें, कि हालिया समय में पाकिस्तान के अंदर भी कई आतंकवादियों की गोली मारकर हत्या की गई है।
एक और पाकिस्तानी अखबार "डेली टाइम्स" ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए कड़ा रुख अपनाने का आग्रह किया है। अखबार ने निज्जर की हत्या की तुलना भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के करीब पकड़े गए आरोपी जासूसों से करने का प्रयास किया।
वहीं, एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, मणिपुर में हाल की हिंसा के आलोक में भारत सिखों के अधिकारों और अपनी नीतियों के संबंध में एक "कठिन चरण" से गुजर रहा है, जो वैश्विक चर्चा का विषय बन गया है, जिससे नई दिल्ली के मानवाधिकार रिकॉर्ड और ट्रीटमेंट सुर्खियों में हैं। इसमें देश में अल्पसंख्यकों को लेकर उल्टी-पुल्टी बातें लिखी गई हैं।

पाकिस्तान और चीनी अखबारों में सुर्खियां
पाकिस्तानी मीडिया जहां भारत और कनाडा के बीच के तनाव के बीच मनोरंजक कहानियां अपने दर्शकों को सुना रहा है, वहीं चीनी सरकार ने अभी तक भारत और कनाडा के बीच राजनयिक संकट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उसके मीडिया ने इस घटनाक्रम का इस्तेमाल अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना करने के लिए किया है।
विशेष रूप से, सभी चीनी मीडिया पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना द्वारा नियंत्रित हैं और कम्युनिस्ट पार्टी की नीति और प्रोपेगेंडा को प्रतिबिंबित करने के लिए कुख्यात हैं।
शिन्हुआ, द पेपर और चाइनान्यूज़.कॉम और चीन के कुछ अन्य न्यूज चैनलों ने खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत और कनाडा द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को हटाने की घटना की रिपोर्ट की है।
हालांकि, ग्लोबल टाइम्स ने 19 सितंबर को कहा, कि "भारत-कनाडा राजनयिक तनाव अमेरिकी मूल्यों पर आधारित गठबंधनों के पाखंड को दर्शाता है।"
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "पश्चिमी देश मानवाधिकारों के रक्षक होने का दावा करते हैं और अक्सर मानवाधिकारों के मुद्दों के लिए अन्य देशों की आलोचना करते हैं।" रिपोर्ट में कहा गया है, कि "भारत की तथाकथित "लोकतंत्र" के लिए उनकी प्रशंसा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक हितों और भारत को उनके चीन विरोधी गठबंधन में शामिल करने की इच्छा से प्रेरित है।"
ग्लोबल टाइम्स में कहा गया है, कि "अमेरिका ने भारत के मानवाधिकारों के हनन के ट्रैक रिकॉर्ड के बारे में जो सोचा है, उस पर उन्होंने आंखें मूंद ली हैं। यह भारत के प्रति पश्चिमी गठबंधन के पाखंड को उजागर करता है।"
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