भारत के हाथ लगा है रूसी यूराल तेल का खजाना, जी-जान झोंककर खरीद रही हैं तेल कंपनियां, जानें कितने अरब डॉलर बचाए
India tops Russian Urals oil: कोविड के पहले लॉकडाउन के बाद जब सऊदी अरब ने तेल को लेकर भारत के सामने भाव दिखाना शुरू किया था, उस वक्त यही लगा था, कि भारत में तेल इतना महंगा हो जाएगा, कि लोगों के लिए खरीदना मुश्किल हो जाएगा। सऊदी अरब की मनमानी करीब डेढ़ साल तक जारी रही और भारत की मान-मनौव्वल की हर कोशिश नाकाम रही।
लेकिन, पिछले साल 24 फरवरी को ये गेम बदल गया। 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जैसे ही पश्चिमी देशों ने रूस को प्रतिबंधों के जाल में जकड़ा, राष्ट्रपति पुतिन ने ठीक वैसे ही रूसी तेल के खजाने की चाबी भारत के हाथों में सौंप दी। भारत इसी मौके के इंतजार में था और करीब डेढ़ सालों के बाद, रूस ना सिर्फ भारत का नंबर-1 तेल सप्लायर बन चुका है, बल्कि भारत, यूराल तेल का 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले ही खरीद लेता है।

यूराल तेल का 60 प्रतिशत हिस्सा खरीदता भारत
यूराल, रूस का पर्वतीय इलाका है, जहां भारी मात्रा में तेल का उत्पादन होता है। यूराल क्षेत्र में जो क्रूड ऑयल निकाला जाता था, पहले उसे यूरोपीय देशों में बेचा जाता था। लेकिन, जब यूरोपीय देशों ने रूस से तेल की खरीददारी बंद करनी शुरू कह दी, तो भारत ने उसकी भरपाई शुरू कर दी।
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रिफाइनर्स की मजबूत मांग के बीच भारत ने जून में सभी रूसी यूराल तेल निर्यात का लगभग 60% हिस्सा अकेले ही खरीद लिया है। भारत ने चीन को यूराल तेल खरीदने के मामले में पीछे छोड़ दिया है और इसकी सबसे बड़ी वजह, चीन के निर्यात में आई 7 प्रतिशत की गिरावट है, जिससे चीन को अपना प्रोडक्शन कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने व्यापारिक स्रोतों के हवाले से इसकी जानकारी दी है।
रूस में जितना कच्चे तेल निकाला जाता है, उसका आधे से ज्यादा हिस्सा यूराल तेल का होता है, जो यूरोपीय बंदरगाहों से डायरेक्ट जुड़ा हुआ है, लिहाजा यूक्रेन युद्ध और उसके बाद तक सबसे ज्यादा यूराल तेल यूरोप ही खरादता था, लेकन बाद में यूरोप ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया और अब यूरोप, भारत के रास्ते रूसी तेल खरीदता है, जिसका जबरदस्त फायदा भारतीय तेल कंपनियों को हो रहा है।
यह देश, यूक्रेन में अपने कार्यों पर गंभीर पश्चिमी प्रतिबंधों के अधीन है, अपने प्रशांत बंदरगाहों, अपने आर्कटिक बंदरगाहों और चीन को सीधी पाइपलाइन के माध्यम से तेल निर्यात भी करता है। यूराल तेल का निर्यात रूस जहाजों के जरिए भी प्रशांत महासागर के बंदरगाहों, आर्कटिक बंदरगाहों को करता रहा है, वहीं चीन को डायरेक्ट पाइपलाइन के जरिए ही यूराल क्रूड ऑयल बेचता है।
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने भारत को करीब 40 प्रतिशत के डिस्काउंट पर यूराल तेल बेचना शुरू किया, जिसका दोनों हाथों से फायदा भारतीय तेल कंपनियों ने उठाया है।
रूसी तेल का नंबर-1 खरीददार बना भारत
आंकड़ों से पता चला है, चीन और तुर्की के बाजारों में आई सुस्ती की वजह से इन देशों ने रूसी तेल की खरीददारी कम कर दी है, जबकि भारत की खरीददारी उसी तरह से बनी हुई है और रूसी तेल खरीदने में भारत नंबर-1 बना हुआ है।
वहीं, रूस ने सोमवार को घोषणा की है, कि वो एक अगस्त से प्रति दिन 5 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन कम करेगा। सऊदी अरब के कहने पर रूस ने ये फैसला तेल की कीमत को बढ़ाने के लिए लिया है। सऊदी अरब में इन दिनों कई ऐसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसके लिए सऊदी अरब को जल्द से जल्द बहुत ज्यादा पैसा चाहिए, लिहाजा सऊदी अरब की कोशिश लगातार, तेल उत्पादन में कटौती कर, डिमांड में तेजी लाना है, ताकि तेल की कीमत बढ़ाई जा सके।
Refinitiv डेटा और स्रोतों के आधार पर रॉयटर्स की गणित के मुताबिक, जून में भारत में यूराल तेल शिपमेंट का 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले ही खरीदा है और मई में भी भारतीय तेल खरीदी का यही आंकड़ा था। कुल मिलाकर, भारत में रूसी तेल का आयात जून में प्रतिदिन रिकॉर्ड 2.2 मिलियन बैरल तक पहुंच गया है, और भारतीय खरीददारी लगातार 10वें महीने बढ़ा है। वहीं, केप्लर डेटा के मुताबिक, सऊदी अरब और इराक, जो भारत के तेल सप्लायर हैं, उन दोनों को मिलाकर, उससे दोगुना तेल भारत अकेले रूस से खरीदने लगा है।
मई में भी भारत ने रूस से प्रतिदिन रिकॉर्ड 1.95 मिलियन बैरल आयात किया था, जो देश को कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का लगभग 40% था। वहीं, ताजा आंकड़ों से पता चला है, कि डिस्काउंटेड रूसी तेल की वजह से भारतीय तेल कंपनियों के 7 अरब डॉलर बचे हैं, जो एक विशालकाय आंकड़ा है और निश्चित तौर पर इसका बड़ा फायदा भारत को मिल रहा है।
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