भारत और पाकिस्तान ने एक साथ शुरू किया था सफर, शुरुआत में आगे निकलने के बाद आखिर कैसे पिछड़ गया पड़ोसी मुल्क?
अंग्रेजों ने लगभग 150 वर्षों तक शासन करने के बाद अगस्त 1947 में भारत छोड़ दिया। जाने से पहले उन्होंने उपमहाद्वीप को दो भागों में विभाजित भी कर दिया। भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों को समान अर्थव्यवस्थाएं विरासत में मिलीं और दोनों देशों ने एक साथ अपनी विकास यात्राएं शुरू कीं।
अब अपनी आजादी के 76 साल बाद भारत, पाकिस्तान से हर मामले में कहीं अधिक आगे निकल चुका है। भारत जहां दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, वहीं, पाकिस्तान आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है खुद का अस्तित्व बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है।

विश्व बैंक के अनुसार, 2022 तक भारत की जीडीपी 3.39 ट्रिलियन डॉलर थी, जो पाकिस्तान की 376.53 बिलियन डॉलर की जीडीपी से 800 फीसदी अधिक है। अगर प्रति व्यक्ति जीडीपी की बात की जाए तो जबकि दोनों देशों ने लगभग समान आंकड़ों के साथ शुरुआत की थी, अगर आज की स्थिति में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी पाकिस्तान की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है।
आजादी के बाद भारत ने जहां गुट निरपेक्ष आंदोलन का रास्ता चुना, वहीं पाकिस्तान, पश्चिमी देशों की गोद में जाकर बैठ गया। हालांकि इसका उसे शुरुआत में काफी फायदा भी मिला। साल 1960 में पाकिस्तान की पर कैपिटा जीडीपी 83.33 डॉलर थी जबकि तब भारत की पर कैपिटा जीडीपी 82.2 डॉलर थी।
1990 तक भी भारत और पाकिस्तान की जीडीपी करीब एक बराबर 370 डॉलर पर प्रति व्यक्ति थी। कई बार ऐसे मौके भी आए जब पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से आगे निकल गई।
दरअसल भारत सरकार की संरक्षणवादी नीतियों की वजह से विकास धीमा हो चुका था। वहीं, पाकिस्तान, पूर्वी पाकिस्तान के व्यापार से काफी समृद्ध हो रहा था। इस अवधि के दौरान अमेरिका और पश्चिम एशियाई देशों द्वारा दी गई अरबों डॉलर की विदेशी सहायता ने भी पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के विकास को गति दी।
विदेशी मुद्रा भंडार
1960 पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार 0.32 अरब डॉलर था जबकि भारत का फॉरेक्स रिजर्व 0.67 अरब डॉलर था। जाहिर है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग दोगुना था। लेकिन कुछ सालों बाद पाकिस्तान ने तेजी से तरक्की की और 1975 में वह विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में भारती की बराबरी कर चुका था।
लेकिन 1991 में उदारीकरण की नीति अपनाने के बाद भारत ने तेजी से तरक्की की और पाकिस्तान लगातार पिछड़ता गया। 2023 में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 567 बिलियन डॉलर को पार कर गया है, जबकि पाकिस्तान का के पास महज 9.93 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। इसमें से दोगुने हाल में ही कर्ज के रूप में पाकिस्तान को मिले हैं।
जीवन स्तर
दोनों देशों के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि गरीबी के मामले में दोनों देश समान दिखाई पड़ रहे हैं। दोनों ही देशों में राष्ट्रीय गरीबी रेखा से नीचे के लोगों का प्रतिशत 21.9 प्रतिशत है। हालांकि, विकास की अन्य रूपरेखाओं पर हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि भारत आगे बढ़ गया है।
आज से ठीक 25 साल पहले 1998 में भारत में केवल 56.2 प्रतिशत लोगों के पास बिजली थी, जबकि पाकिस्तान में लगभग 70.5 प्रतिशत लोगों के पास बिजली थी। 2023 तक 99.6 प्रतिशत भारतीयों तक बिजली पहुंच चुकी है, जबकि पाकिस्तान में यह आंकड़ा 94.9 प्रतिशत है।
राजनीतिक स्थिति
1970 के दशक के बाद से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में निराशाजनक वृद्धि के पीछे एक प्रमुख कारक देश में लगातार राजनीतिक अस्थिरता है। पाकिस्तान के निर्माण के बाद से, देश में कभी भी ऐसा प्रधानमंत्री नहीं रहा जिसने पूर्ण कार्यकाल पूरा किया हो। 1953 के संवैधानिक तख्तापलट सहित, पाकिस्तान ने 4 तख्तापलट और कई तख्तापलट के प्रयास देखे हैं और गैर-लोकतांत्रिक सैन्य शासन के तहत दशकों बिताए हैं।
वहीं भारत की बात की जाए तो, 1975-77 के आपातकाल की अवधि को छोड़ दें तो, वहां राजनीतिक रूप से स्थिर लोकतंत्र बना रहा है। आज़ादी के बाद पाकिस्तान के इतिहास में आतंकवाद भी एक कांटा रहा है।
आतंकवाद
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2023 के अनुसार, 2022 में आतंकवाद से होने वाली सबसे अधिक मौतों के मामले में देश चौथे स्थान पर है, जो वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से होने वाली मौतों का 10 प्रतिशत है।
पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जहां वर्ष के दौरान आतंकवाद से होने वाली मौतों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई, वहीं भारत उन देशों में आठवें स्थान पर है, जहां आतंकवाद से होने वाली मौतों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई।
30 सालों में बदली स्थिति
भारत ने आजादी के बाद कृषि प्रधान देश के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। लेकिन अगले ही कुछ वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर पर भी मजबूती से ध्यान दिया। आज भारत में सर्विस सेक्टर सबसे तेजी से बढ़ रहा सेक्टर है। इसका इकॉनमी में 60 फीसदी से अधिक योगदान है। रोजगार में इसकी 28 फीसदी हिस्सेदारी है।
वहीं, पाकिस्तान में अस्थिर सरकार, सैन्य तानाशाही, सत्ता के विरोधाभासी केंद्रों और आतंकी संगठनों को समर्थन देने की नीति से इकॉनमी को गहरा झटका लगा है। भारत में जहां दुनिया की लगभग हर बड़ी कंपनी अपना उद्योग स्थापित कर रही है या करना चाह रही है, पाकिस्तान में कोई भी कंपनी कारोबार करने को तैयार नहीं है। उल्टे यहां पर से उद्योग-धंधे बाहर जा रहे हैं।
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