UNSC में यूक्रेन युद्ध पर वोटिंग से फिर गैर-हाजिर रहा भारत, सरकार का फैसला कितना सही, कितना गलत?
यूक्रेन संकट पर यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में रूस की आक्रामकता को लेकर फिर से बैठक बुलाई गई थी, जिसमें यूक्रेन संकट पर विशेष आपात सत्र बुलाए जाने पर वोटिंग की गई।
न्यूयॉर्क/मॉस्को/कीव, फरवरी 28: भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर से यूक्रेन युद्ध के समय तटस्थ रहने का फैसला किया है और पिछले एक हफ्ते में ये दूसरा मौका है, जब भारत ने चीन और संयुक्त अरब अमीरात के साथ वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहा है। हालांकि, भारत ने यूक्रेन और रूस के बीच प्रस्तावित बैठक का जरूर स्वागत किया है,

वोटिंग से फिर गैर हाजिर रहा भारत
यूक्रेन संकट पर यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में रूस की आक्रामकता को लेकर फिर से बैठक बुलाई गई थी, जिसमें यूक्रेन संकट पर विशेष आपात सत्र बुलाए जाने पर वोटिंग की गई। लेकिन, भारत एक बार फिर से वोटिंग से दूर रहा। भारत के अलावा चीन और संयुक्त अरब अमीरात भी वोटिंग से गैर-हाजिर रहा। यहां तक कि नई दिल्ली ने बेलारूस में वार्ता आयोजित करने के मास्को और कीव के फैसले का स्वागत किया। लेकिन, 11 वोट के साथ यूक्रेन मुद्दे पर यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली का दुर्लभ सत्र बुलाने का फैसला किया गया है। वहीं, 1982 के बाद ये पहला मौका है, जब यूएनएससी ने विशेष आपातकालीन सत्र के लिए मामले को यूएनजीए में भेजने का फैसला किया गया है।
यूएनएससी में भारत ने क्या कहा?
भारत ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में एक बार फिर से यूक्रेन मुद्दे पर संतुलित रूख अपनाने की कोशिश की और यूएनएससी में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरूमूर्ति ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि, ''हम यूक्नेन संकट पर हिंसा और दुश्मनी का फौरन अंत करने की बात को दोहराते हैं और हमारे प्रधानमंत्री ने रूस के राष्ट्रपति और यूक्रेन के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया है।'' भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि, ''हम बेलारूस सीमा पर दोनों पक्षों की तरफ से की गई बातचीत की घोषणा का स्वागत करते हैं और हम बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, जो अभी भी यूक्रेन संकट के बीच फंसे हुए हैं''। उन्होंने कहा कि, ''सीमा पर परिस्थितियां जटिल हैं और यूक्रेन से भारतीयों को निकालने में दिक्कतें हुई हैं और हमने तमाम परिस्थितियों को देखते हुए वोटिंग से परहेज करना का फैसला किया है''।

यूक्रेन पर भारत का स्टैंड क्या है?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने सोमवार के वोट के स्पष्टीकरण में कहा कि, "यह खेदजनक है कि इस मामले पर परिषद के आखिरी बार बुलाई गई बैठक के बाद से यूक्रेन में स्थिति और खराब हो गई है।" भारत के स्थाई प्रतिनिधि तिरुमूर्ति ने रेखांकित करते हुए कहा कि "कूटनीति और संवाद के रास्ते पर लौटने के अलावा और कोई चारा नहीं है।" उन्होंने कहा, "हम दोनों पक्षों द्वारा बेलारूस सीमा पर वार्ता करने की आज की घोषणा का स्वागत करते हैं।" राजदूत ने कहा कि भारत अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों सहित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है, जो अभी भी यूक्रेन में फंसे हुए हैं।

अमेरिका ने यूएनएससी पर क्या कहा?
वहीं, यूएनएससी में अमेरिका ने कहा कि, ''हम एक ऐसे प्रस्ताव पर अपना वोट डालेंगे, जो रूस के अक्षम्य कार्यों और उसके उल्लंघनों के लिए उसे जिम्मेदार ठहराएगा''। अमेरिका ने कहा कि, 'पूरे यूक्रेन में रॉकेट की बरसात की जा रही है और रूस ने अनुचित हमले के लिए एक झूठा वातावरण बनाया है और रूस लगातार यूक्रेन को लेकर झूठा प्रचार करता है'। आगे अमेरिका ने कहा कि, 'आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस के परमाणु फोर्स को हाई-अलर्ट पर रखा है, जबकि रूस एक ऐसे देश पर हमले कर रहा है, जिसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं और रूस को नाटो से भी कोई खतरा नहीं है।'

यूक्रेन युद्ध पर UN में दो बैठकें
यूक्रेन युद्ध पर आज संयुक्त राष्ट्र में दो महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन होगा। संयुक्त राष्ट्र के दो प्रमुख निकाय- 193-राष्ट्र महासभा और 15-सदस्यीय सुरक्षा परिषद की यूक्रेन पर रूस के आक्रमण पर सोमवार को अलग-अलग बैठकें करेंगे, जो तत्काल संघर्ष विराम की व्यापक अंतरराष्ट्रीय मांगों को लेकर है। युद्ध में फंसे लाखों यूक्रेनियन की दुर्दशा पर चिंता जताई गई है। करीब चालीस सालों के बाद महासभा के पहले आपातकालीन सत्र के लिए रविवार को सुरक्षा परिषद ने हरी झंडी दे दी। यह संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्यों को सोमवार को युद्ध के बारे में बोलने और वोट डालने का मौका देगा। वहीं, अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने कहा है कि "रूस को उसके अनिश्चित कार्यों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। ।"












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