Imran Khan: पाकिस्तान में पहली बार सेना के खिलाफ विद्रोह.. इमरान खान की गिरफ्तारी ला पाएगी 'क्रांति'?
इमरान खान को मंगलवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद से पाकिस्तान में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। अपुष्ट रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक 47 लोग मारे गये हैं, जबकि सरकारी आंकड़ा 10 लोगों की मौत का है।

Imran Khan News: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेट के दिग्गज रहे इमरान खान की इस हफ्ते हुई गिरफ्तारी ने देश भर में सेना के खिलाफ गुस्से को भड़का दिया है। पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हो रहा है, कि उसके हेडक्वार्टर्स पर हमले हो रहे हैं।
पाकिस्तान में सेना के खिलाफ प्रदर्शन होगा, उसके दफ्तरों पर हमले होंगे, ये सोचना नामुमकिन था, लेकिन पहली बार जनता सवाल पूछ रही है, कि सेना का राजनीति में क्या काम है? पाकिस्तान में पहली बार सेना को कहा जा रहा है, कि उसने 'दुश्मनों' से तो एक भी जंग नहीं जीता है, और उसका काम देश की जनता को कंट्रोल करना है।
मंगलवार को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से पाकिस्तान में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं और देश भर में हिंसक प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। इमरान खान के समर्थन माने जाने वाले कई पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया है।
यानि, पिछले साल इमरान खान के संसद में अविश्वास प्रस्ताव हारने और सत्ता से बेदखल होने के बाद से पाकिस्तान का राजनीतिक संकट काफी बिगड़ गया है। तब से, इमरान खान की लोकलुभावन बयानबाजी ने समाज को बांट दिया है, जिससे पाकिस्तान में पहली बार एक अलग किस्म का ध्रुवीकरण हुआ है, जिसमें लोग सेना के खिलाफ खड़े हुए हैं और इस सप्ताह हमने हिंसक प्रतिक्रियाएं देखी हैं।
पाकिस्तानी समाज का विभाजन
इतिहास रहा है, कि सेना के सामने पाकिस्तान के चुने हुए नेता हमेशा चुप ही रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा होता है। लेकिन, पिछले साल अप्रैल में सत्ता छोड़ने के बाद से इमरान खान ने सेना को हमेशा से आड़े हाथों लिया है।
पाकिस्तान में समाज का विभाजन हो गया है और इमरान खान ने पद छोड़ने से पहले ही इन विभाजनों को बोना शुरू कर दिया था। अपनी बर्खास्तगी से पहले, उन्होंने पाकिस्तान के एक समय के करीबी सहयोगी, संयुक्त राज्य अमेरिका पर उनकी सरकार के खिलाफ साजिश रचने और उन्हें सत्ता से धकेलने की कोशिश करने का आरोप लगाया था।
उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, का अपने राजनीतिक विरोधियों को पश्चिमी देशों का गुलामों के रूप में लेबल करने का एक लंबा इतिहास रहा है, इसलिए यह इमरान खान के समर्थक, उनके हर विरोधी को पश्चिम का गुलाम समझते हैं। हालांकि, ये बात अलग है, कि खुद इमरान खान की एक अच्छी खासी जिंदगी पश्चिमी देशों में अय्याशी करते हुए गुजरी है।
इमरान खान ने सत्ता से बेदखल होने का भड़ास पूर्व पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल बाजवा के खिलाफ निकालना शुरू कर दिया और दावा किया, कि उनकी सरकार गिराने की साजिश बाजवा ने रची थी।
इस दौरान इमरान खान पर दो बार जानलेवा हमले किए गये। पिछले साल नवंबर में इमरान खान के ऊपर गोलियां चलाई गईं, जिसमें उनके पैरों में तीन गोलियां लगी थीं। हालांकि, वो बच गये, लेकिन उन्होंने तीन लोगों का नाम लिया, शहबाज शरीफ, आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह और आईएसआई के नंबर-2 फैसल नसीर का। हालांकि, पाकिस्तानी सेना ने इमरान खान के आरोपों को सिरे से नकार दिया।
शहबाज सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
पाकिस्तान में राजनीतिक हिंसा का एक लंबा इतिहास रहा है, और पिछले साल अप्रैल में सत्ता से बर्खास्त किए जाने के बाद इमरान खान ने शहबाज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा भी था, कि 'अगर उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाया गया, तो वो खतरनाक हो जाएंगे' और वाकई में ऐसा ही हुआ। उन्होंने शहबाज सरकार के खिलाफ जनता के मन में बुरी तरह से नफरत भर दिया।
वहीं, शहबाज सरकार ने काउंटर करते हुए इमरान खान को मुकदमों में लाद दिया, जिससे इमरान खान के आरोपों को बल मिला।
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इस बीच "तोशखाना मामले" में शहबाज सरकार ने इमरान खान और उनकी पत्नी पर अवैध रूप से अन्य देशों द्वारा दिए गए उपहारों को रखने के लिए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। मामला इलेक्शन कमीशन और कोर्ट में कहा। इलेक्शन कमीशन ने इमरान खान के ऊपर पांच सालों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया, जबकि बुधवार को पाकिस्तानी अदालत ने तोशाखाना मामले में इमरान खान को दोषी ठहरा दिया है।
हालांकि, इमरान के खिलाफ हो रहे इन कार्रवाइयों ने जनता में गुस्सा भरा। क्योंकि जनता भी इस बात को जानती है, कि सत्ता में बैठे हुए लोग भी दूध के धुले नहीं है। जबकि, इमरान खान अपनी करिश्माई तस्वीर को भुनाने में कामयाब रहे हैं। लिहाजा, बहुत समय तक पाकिस्तानी सेना भी इमरान पर हाथ डालने से डरती रही और जब उन्हें गिरफ्तार किया, तो पूरा पाकिस्तान ही जल उठा।
इमरान खान गिरफ्तार होने से पहले देश की एक बड़ी आबादी को ये समझाने में कामयाब रहे, कि पाकिस्तान की बर्बादी के लिए पाकिस्तान की सेना जिम्मेदार है, क्योंकि उसी ने पिछले 75 सालों में पाकिस्तान की नीतियां बनाई हैं। इमरान खान ने इसके लिए भारत की विदेश नीति का बार बार हवाला दिया। उन्होंने देश की जनता को बताया, कि पाकिस्तानी सेना, भारत से चार लड़ाईयां हारी हैं, इमरान खान जनता समाझाने में कामयाब रहे, कि सेना और पाकिस्तान की पिछली सरकारों ने देश को लूटा है और आज इमरान खान के लिए जिस तरह से लोग बाहर निकल रहे हैं, उससे यही समझ में आता है, कि इमरान खान पाकिस्तानी समाज को देश की सेना के खिलाफ करने में कामयाब रहे हैं।
हालांकि, बड़ा सवाल अभी भी यही है, कि जनता कब तक इमरान खान के साथ खड़ा रहेगी? ये प्रदर्शन कब तक चलेगा, क्योंकि अब इमरान खान जेल से सुरक्षित बाहर आ पाएंगे, ये इसी बात पर निर्भर करता है, कि देश की सड़कों पर जनता कितने दिनों तक रहती है। क्योंकि अगर जनता वापस अपने घरों में गई, तो इमरान खान की राजनीति यहीं खत्म समझिए।












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