बांग्लादेश की इकोनॉमी का बज गया बैंड! विदेशी मुद्रा भंडार गिरने के बाद IMF की चेतावनी, मुसीबत में शेख हसीना
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था सही जा रही थी, लेकिन पहले कोविड संकट और फिर यूक्रेन युद्ध ने देश की इकोनॉमी को गहरा नुकसान पहुंचाया है।

Bangladesh economy: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। बांग्लादेश में मुद्रास्फीति काफी बढ़ती जा रही है, वहीं विकाल के काम धीमे पड़ते जा रहे हैं और इन सबके बीच, देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से सिकुड़ रही है।
आईएमएफ के साथ बांग्लादेश 4.7 अरब डॉलर के ऋण प्रोग्राम से जुड़ा हुआ था, जो अभी अभी ही खत्म हुआ है, लेकिन इस मिशन के खत्म होने के बाद ही बांग्लादेशी अर्थव्यवस्था पर जोखिम बढ़ गये हैं। आईएमएफ और बांग्लादेश के बीच कर्मचारी स्तर की बातचीत की गई है, जिसके लिए आईएमएफ के अधिकारियों ने ढाका का दौरा किया था।
आईएमएफ ने बजाई खतरे की घंटी
बांग्लादेश दौरे को लेकर आईएमएफ ने जो प्रेस रिलीज जारी किया है, उसमें कहा गया है, कि "लगातार महंगाई के दबाव, वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ती अनिश्चितता और प्रमुख एडवांस ट्रेड पार्टनर्स देशों के विकास में आई मंदी ने बांग्लादेश की मुद्रा को प्रभावित किया है और ये प्रभाव अभी भी जारी है।"
आईएमएफ की तरफ से 7 मई को जारी बयान में कहा गया है, कि "आईएमएफ इस साल के अंत में बांग्लादेश के साथ अपनी विस्तारित क्रेडिट सुविधा, विस्तारित फंड सुविधा और लचीलापन और स्थिरता सुविधा व्यवस्था को लेकर पहली समीक्षा करेगा"।
अगले दो हफ्तों तक व्यापारिक बिलों का भुगतान करने के बाद बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 29.86 अरब डॉलर तक आ जाएगा, जो पिछले सात सालों में न्यूनतम स्तर पर है। बताया जा रहा है, कि बांग्लादेश के कपड़ों के खुदरा विक्रेताओं को ऑर्डर मिलने कम हो गये हैं, जिससे बांग्लादेश का निर्यात, पिछले साल अप्रैल के मुकाबले 16.5 प्रतिशत से गिरकर 3.96 अरब डॉलर हो गया है।
वहीं, विदेशों में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिक, जो देश में डॉलर भेजकर देश की अर्थव्यवस्था को संतुलन प्रदान करते हैं, इसमें भी पिछले साल करे मुकाबले 16 प्रतिशत की गिरावट आई है और वो 1.68 अरब डॉलर पर आ गया है।
आईएमएफ से बांग्लादेश को मदद
इस साल फरवरी महीने में, आईएमएफ ऋण की पहली किस्त के रूप में बांग्लादेश को 476 मिलियन डॉलर मिले थे, जबकि दूसरी किश्त इस साल नवंबर महीने में बांग्लादेश को मिलने की संभावना है। और अगर इतने महीनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो आईएमएफ नई किश्त जारी करने पर रोक लगा सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था की बैंड बज जाएगी।
बांग्लादेश ने 25 अप्रैल से 7 मई तक देश का दौरा करने वाली आईएमएफ टीम को अधिक लचीली एक्सचेंज रेट और बैंकों की उधार दर में सुधार पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही बांग्लादेश ने अपने बैंकों को भी कई सुधार प्रक्रियांओं पर काम करने के निर्देश दिए है, ताकि संभावित आर्थिक संकट को आने से पहले ही रोक दिया जाए।
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हालांकि, इन सबके बीच शेख हसीना सरकार काफी मुश्किल में पड़ती दिख रही है, क्योंकि देश में इस साल चुनाव भी होने वाले हैं और महंगाई को विपक्ष ने मुख्य मुद्दा बनाया हुआ है, लिहाजा देश की जनता के सामने अपनी बातों को रखना, सरकार के लिए चुनौती साबित हो सकती है।












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