Hungary Election 2026: 16 साल के ओर्बन साम्राज्य का अंत, पीटर मग्यार की तिस्जा पार्टी ने कैसे पलटा गेम?

Hungary Election 2026: यूरोप के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त सत्ता परिवर्तन की हवा चल रही है। हंगरी में हुए संसदीय चुनावों में भारी उलटफेर करते हुए विपक्षी नेता पीटर मग्यार (Peter Magyar) और उनकी 'तिस्ज़ा' (Tisza) पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

इस हार के साथ ही पिछले 16 वर्षों से सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन (Viktor Orban) का दबदबा खत्म हो गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पीटर मग्यार को इस शानदार जीत पर बधाई देते हुए भारत और हंगरी के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है।

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Peter Magyar की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा- श्री पीटर मग्यार और तिस्ज़ा पार्टी को आपकी शानदार चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई। भारत और हंगरी गहरे संबंधों, साझा मूल्यों और स्थायी पारस्परिक सम्मान से बंधे हैं। मैं द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने और हमारे लोगों की समृद्धि के लिए भारत-यूयू रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।

Hungary में 16 साल का 'ओर्बन युग' का अंत: Viktor Orban ने खुद स्वीकार की हार

हंगरी की राजनीति में पिछले डेढ़ दशक से सबसे शक्तिशाली चेहरा रहे विक्टर ओर्बन ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। रविवार, 12 अप्रैल को विपक्षी नेता पीटर मग्यार ने बताया कि ओर्बन ने खुद उन्हें फोन कर जीत की बधाई दी।बुडापेस्ट में समर्थकों को संबोधित करते हुए ओर्बन ने कहा, मैंने विजयी पार्टी को बधाई दी है।

अब हम विपक्ष में रहकर हंगरी राष्ट्र और अपनी मातृभूमि की सेवा करेंगे। ओर्बन की इस हार को यूरोप के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वे डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के करीबी सहयोगी माने जाते थे।

हंगरी के इतिहास में इस बार रिकॉर्ड 77% मतदान हुआ, जो पोस्ट-कम्युनिस्ट काल में अब तक का सबसे अधिक है। पीटर मग्यार ने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि अगर नतीजे उम्मीदों के मुताबिक रहे, तो देश में एक 'बड़ा हंगेरियन कार्निवल' मनाया जाएगा।

पीटर मग्यार की 'तिस्ज़ा' पार्टी ने कैसे पलटी बाजी?

पीटर मग्यार ने इस चुनाव को महज एक राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि एक 'वैचारिक चुनाव' करार दिया था। उन्होंने मतदान के बाद कहा था कि यह चुनाव पूर्व या पश्चिम, प्रोपेगेंडा या ईमानदार संवाद, और भ्रष्टाचार या स्वच्छ सार्वजनिक जीवन के बीच का चुनाव है।

ओर्बन के 16 साल के कार्यकाल के दौरान उन पर मीडिया को नियंत्रित करने और संस्थानों को बदलने के आरोप लगे थे। साथ ही, यूक्रेन युद्ध और रूस के साथ संबंधों को लेकर वे अक्सर यूरोपीय संघ (EU) से टकराते रहे थे। अब मग्यार के आने से हंगरी का झुकाव पश्चिमी देशों और ईयू की ओर बढ़ने की संभावना है।

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