एक हफ्ते में जर्मनी में तीसरा हमला, रिफ्यूजी अब बन रहे हैं मुसीबत
बर्लिन। दक्षिण जर्मनी के बावारिया में रविवार को एक सीरियन रिफ्यूजी ने सुसाइड अटैक की कोशिश की लेकिन उसकी इस कोशिश में उसकी ही मौत हो गई। साथ ही 12 लोग बुरी तरह से घायल हो गए। जर्मनी में एक हफ्ते में यह तीसरा हमला है।
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जर्मनी के गृह मंत्री जाओचिम हेर्रमैन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस हमलावर की उम्र 27 वर्ष थी। बताया जा रहा है कि इस व्यक्ति को पॉप म्यूजिक से जुड़े एक कांसर्ट में दाखिला देने से इंकार कर दिया गया था।
इसे जर्मनी में शरण देने से मना कर दिया गया था और अगले कुछ दिनों में इसे बुल्गारिया भेजा जाने वाला था।
नूरेमबर्ग के पास आंसबाख के सेंट्रल में स्थित एक बार के सामने रविवार रात को जर्मनी के समयानुसार करीब 10 बजे ब्लास्ट हुआ। ब्लास्ट के बाद कांसर्ट से करीब 2500 लोगों को निकाला गया।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए आखिर कैसे एक वर्ष में जर्मनी पहुंचे रिफ्यूजी इस शहर को एक खतरनाक जगह में तब्दील करते जा रहे हैं।

पॉलिसी को लेकर शुरू हुई बहस
जर्मनी में फिर एक रिफ्यूजी ने हमला किया है। एक हफ्ते के भीतर यह तीसरा हमला है जिसके बाद रिफ्यूजी पॉलिसी को लेकर शुरू में छिड़ी बहस फिर से शुरू हो गई।

मार्केल की मुश्किलें बढ़ी
इस नए हमले के बाद जर्मन चासंलर एंजेला मार्केल के लिए मुश्किल भी बन गई है क्योंकि युद्ध पीड़ित रिफ्यूजियों के लिए उन्होंने बाहें खोल दी थीं और काफी विरोध के बावजूद उनका स्वागत किया था।

11 लाख रिफ्यूजी को जगह
जर्मनी में पिछले एक वर्ष में करीब 11 लाख रिफ्यूजियों को दाखिला मिला है। इस नीति को लेकर चांसलर मार्केल को विरोध भी झेलना पड़ा है लेकिन उन्होंने पूरी सख्ती के साथ इस विरोध का सामना किया है।

जर्मनी में तैनात हो सेना
जर्मनी में अब हमलों के समय सेना की तैनात करने की मांग बढ़ती जा रही है लेकिन जर्मनी का कानून इसके आड़े आ रहा है।

जर्मनी में सेना तैनाती का कानून
जर्मनी के कानून के मुताबिक देश में किसी जगह पर सेना तभी तैनात की जा सकती है जबकि कोई नेशनल इमरजेंसी हो। हालांकि जर्मनी में विशेषज्ञ मौजूदा स्थिति की तुलना इमरजेंसी से कर रहे हैं।












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