कितनी उम्र तक जीवित रह सकता है एक इंसान, वैज्ञानिक शोध में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
सिंगापुर, 2 जून: सदियों से मानव में अमरत्व प्राप्त करने की आम प्रवृत्ति रही है। भारतीय धर्म शास्त्रों में इसके बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों से वरदान लेकर 'एको अहम् द्वितीयो नास्ति' के मनोभाव वाले राक्षसी तत्वों की बचपन से हम कई सारी कहानियां सुनते आए हैं। लेकिन, शायद मनुष्य की अधिकतम उम्र पर पहली बार एक वैज्ञानिक अध्ययन हुआ है, जिसमें यह बात सामने आई है कि जीव वैज्ञानिक तौर पर एक इंसान का शरीर ऐसा बना हुआ है कि वह ज्यादा से ज्यादा 150 वर्षों तक जीवित रह सकता है। यह रिसर्च रक्त कोशिकाओं के विस्तार से विश्लेषण के आधार पर सामने आया है, जिसमें कई देशों के लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े जुटाकर उससे सहायता ली गई है।

सिंगापुर के बायोटेक कंपनी में हुआ रिसर्च
सिंगापुर में शोधकर्ताओं के एक ग्रुप ने इस सवाल पर रिसर्च किया है कि मानव के शरीर को यदि सभी आदर्श स्थिति उपलब्ध कराई जाए तो वह अधिकतम कितने वर्षों तक जी सकता है या वह कितने साल तक जिंदा रह सकता है। अभी तक आमतौर पर माना जाता है कि लोग 100 साल जीवित रह सकते हैं और कोई उससे ज्यादा वसंत देखने में सफल रहा तो इसे उसका सौभाग्य मान लिया जाता है। वैसे तथ्य ये है कि धरती पर सबसे ज्यादा उम्र तक जिंदा रहने का जो रिकॉर्ड मौजूद है, वह फ्रांस के जीन्ने कामेंट के नाम है। उनका निधन 122 साल की उम्र में हुआ था। लेकिन, क्या इससे ज्यादा उम्र तक कोई इंसान नहीं जी सकता? इसी पर सिंगापुर स्थित एक बायोटेक कंपनी गेरो के शोधकर्ताओं का रिसर्च पेपर नेचर कम्युनिकेशन प्वाइंट जर्नल में 'पेस ऑफ एजिंग' पर फोकस करके प्रकाशित हुआ है।

ब्लड मार्कर के विश्लेषण पर आधारित है रिसर्च
यह रिसर्च ब्लड मार्कर के खास विश्लेषण पर आधारित है, जिससे यह खुलासा हुआ है कि लोगों की उम्र कैसे घटने लगती है और उसी आधार पर इसमें इंसान की अधिकतम उम्र सीमा का अनुमान लगाया है। रिसर्च के मुताबिक मौत एक आंतरिक जीव वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के आकलन के लिए शोधकर्ताओं ने रक्त कोशिकाओं की संख्या में बदलाव और लोगों की ओर से रोजाना उठाए गए कदमों की संख्या का विश्लेषण किया। इसके लिए उन्होंने अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और रूस के बड़े समूहों के सेहत से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया है। शोधकर्ताओं ने अपने बयान में कहा गया है कि 'इंसानों में बुढ़ापा बिलगाव के कगार पर काम करने वाली जटिल प्रणालियों के लिए सभी जगह मौजूद विशेषताओं को प्रदर्शित करता है।'

120 से 150 वर्ष की उम्र तक जीवित रह सकता है इंसान
इस रिसर्च टीम की अगुवाई तिमोथी वी पायर्कोव ने किया है। स्टडी में पाया गया कि जैसे-जैसे उम्र ढलने लगी, बीमारी से अलग कारकों ने रक्त कोशिकाओं को वापस करने की शरीर की क्षमता में एक अनुमानित और तेजी के साथ गिरावट को जन्म दिया। उन्होंने पाया कि गिरावट की गति तब तक निर्धारित होती है जब उम्र ढलने की प्रक्रिया पूरी तरह से गायब हो जाएगी जिसके चलते मौत हो जाएगी। इस तरह से उम्र में ढलाव की यह प्रक्रिया लंबे वक्त तक जारी रहती है और 120 से 150 वर्ष की आयु तक पूरी तरह खत्म हो जाती है। यानी अगर शरीर के बाकी सारे पैरामीटर सामान्य काम करते रहें तो मनुष्य 150 साल की उम्र तक जिंदा रह सकता है।

उम्र बढ़ाने की दवा बन सकती है!
रिसर्च में यह भी पाया गया है कि उम्र ढलने की यह प्रक्रिया 30 और 40 के दशक के मध्य शुरू हो जाती है और शरीर धीरे-धीरे सामना करने की क्षमता खोने लगता है। अमेरिका में रहने वाले इस स्टडी के को-ऑथर एंड्री गुडकोव ( रोजवेल पार्क कंप्रिहेंसिव कैंसर सेंटर से जुड़े हैं) का कहना है कि, 'इस रिसर्च से ये पता चलता है कि उम्र से संबंधित बीमारियों की रोकथाम और इलाज को सिर्फ एक औसत तक ही बेहतर किया जा सकता है, अधिकतम उम्र तब तक नहीं बढ़ाई जा सकती, जबतक कि असल एंटीजन थेरेपी विकसित ना कर ली जाए।' विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिसर्च से ऐसी दवा विकसित करने में मदद मिल सकती है, जो उम्र ढलने की प्रक्रिया को धीमी और और उम्र में इजाफा कर सके, क्योंकि रिकवरी रेट बुढ़ावा का बहुत महत्वपूर्ण संकेत है।(तस्वीरें-सांकेतिक)












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