ग्लोबल साउथ का नया लीडर... जी20 शिखर सम्मेलन से गरीब देशों का नेता बनकर उभरेगा भारत, जानें कैसे
G-20 Summit declaration: जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दुनिया भर के कद्दावर नेता भारत पहुंच चुके हैं और जी20 शिखर सम्मेलन के लिए विश्व नेताओं के पहुंचने पर भारत ने शुक्रवार को कहा है, कि शिखर सम्मेलन के अंत में नई दिल्ली डिक्लरेशन "वैश्विक दक्षिण और विकासशील देशों की आवाज" होगी।
यानि, भारत ने साफ कर दिया है, कि वो गरीब और वंचित देशों की आवाज बनेगा। ग्लोबल साउथ, जो लंबे अर्से से विकसित देशों की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहा था, उसे अभी तक कुछ हासिल नहीं हो रहा था, लेकिन अब भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनने के लिए बिल्कुल तैयार है और इसके लिए मंच है, जी20 का।

ग्लोबल साउथ की नई आवाज
दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा, कि "नई दिल्ली में नेताओं की घोषणा, जिसे आप में से कई लोग शिखर सम्मेलन के बाद देखेंगे, आप इसे वैश्विक दक्षिण और विकसशील देशों की आवाज के रूप में देखेंगे।"
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उन्होंने साफ शब्दों में कहा, कि "दुनिया के किसी भी दस्तावेज़ में ग्लोबल साउथ और विकासशील देशों के लिए नई दिल्ली लीडर्स घोषणापत्र जैसी मजबूत आवाज़ नहीं होगी।"
अमिताभ कांत ने आगे कहा, कि "हमने अपनी अध्यक्षता शुरू की... ग्लोबल साउथ की आवाज़ की एक बैठक के साथ। हमें 125 नेताओं का दृष्टिकोण मिला और फिर हम ग्लोबल साउथ के परिप्रेक्ष्य और विकासशील देशों की आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, कि "मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं, कि हमारा राष्ट्रपतित्व समावेशी, निर्णायक और कार्य-उन्मुख रहा है। हमारी नई दिल्ली नेताओं की घोषणा, लगभग तैयार है। मैं इस पर ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहूंगा क्योंकि इस घोषणा की सिफारिश नेताओं को की जाएगी... और नेताओं द्वारा इसे स्वीकार किए जाने के बाद ही हम इस घोषणा की वास्तविक उपलब्धियों के बारे में बात कर पाएंगे।"
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारत की जी20 प्रेसीडेंसी का दृष्टिकोण "समावेशी प्रेसीडेंसी" है।
अमिताभ कांत ने कहा, कि "भारत के राष्ट्रपति पद का दायरा बहुत बड़ा और पहुंच वाला रहा है। 19 जी20 देश और यूरोपीय संघ हैं... 29 विशेष आमंत्रित देश हैं, तीन क्षेत्रीय संगठन हैं, 11 अंतरराष्ट्रीय संगठन हैं, जिन्होंने भारत में हुई सभी 220 बैठकों में भाग लिया है।"

ग्लोबल साउथ का नया लीडर
इसी साल जनवरी में, भारत ने विकासशील देशों के नेताओं और मंत्रियों का 'वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट' नामक एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली का उद्देश्य जी20 में प्रतिनिधित्व नहीं करने वाले देशों से उनकी राय जानना था, कि वो भारत से क्या उम्मीद करते हैं।
भारत का ये कदम, उसकी लीडरशिप क्वालिटी को दर्शाने के साथ साथ भविष्य में भारत के सुपरपावर बनने का रास्ता भी साफ करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 12 जनवरी को शिखर सम्मेलन के अपने उद्घाटन भाषण में 4R का जिक्र किया था, जो हैं रिस्पाउंड, रिकॉग्नाइज, रेस्पेक्ट और रिफॉर्म।
वहीं, द डिप्लोमैट पत्रिका के मुताबिक, भारतीय प्रधानमंत्री ने आगे बताते हुए कहा, कि "इसका मतलब ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं का जवाब देना, 'सामान्य लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों' के सिद्धांत को पहचानना, सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार करना है।"
इस शिखर सम्मेलन में 125 देशों ने हिस्सा लिया था, जिसमें लैटिन अमेरिका और कैरेबियन देशों में से 29, 47 अफ्रीकी देश, यूरोप के सात देश, 31 एशियाई देश और ओशिनिया के 11 देश शामिल थे और ये दुनिया का सबसे बड़ा वर्चुअल शिखर सम्मेलन था, जो बताता है, कि भारत को अब गरीब देश, अपने नेता के तौर पर स्वीकार कर रहे हैं।
इसके अलावा, अफ्रीकन यूनियन को भारत की कोशिशों के बाद ही जी20 की सदस्यता मिल रही है, जिन्हें सालों से नजरअंदाज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि भारत के एयू प्रस्ताव को दो कारणों से "बहुत समर्थन" मिल रहा है। सबसे पहले, यह पहली बार है, कि जी20 तिकड़ी - इंडोनेशिया, भारत और ब्राजील - में तीन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं।
लिहाजा, अगर भारत जी20 घोषणा पत्र पर आम सहमति बनाने में कामयाब हो जाता है, तो ना सिर्फ ये भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि अगर घोषणा पत्र पर आम सहमति नहीं भी बन पाती है, फिर भी भारत ने खुद को अब ग्लोबल साउथ के नये लीडर के तौर पर स्थापित कर लिया है।












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