सीरिया से यूरोप और सऊदी अरब की ओर बढ़ी इबोला जैसी खतरनाक बीमारी
लंदन। पिछले पांच वर्षों से सिविल वॉर और फिर आईएसआईएस की वजह से आतंकवाद की मार झेल रहे सीरिया और मध्य एशिया को अब एक नए खतरे से रूबरू होना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया और मध्य एशिया में एक ऐसी खतरनाक बीमारी ने लोगों को अपने कब्जे में ले लिया है जो इबोला की ही तरह है और इसका कोई इलाज नहीं है।

क्या है बीमारी और कैसे फैल रही
- अमेरिकी संस्था सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की ओर से इस सीरिया में फैली इस बीमारी का पता लगाया।
- इस बीमारी का नाम क्यूटेनियस लिहमैनियसिस है और यह एक प्रकार की मक्खी सैंड फ्लाइ की वजह से होती है।
- कहा जा रहा है कि आईएसआईएस ने लोगों की डेड बॉडीज को सीरिया की सड़कों पर ही फेंकना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से बीमारी पनपना शुरू हो गई।
- इस बीमारी की वजह से चेहरे के खुले हुए हिस्सों पर अल्सर जैसे घाव होने लगते हैं। धीरे-धीरे चेहरे का मांस गलना शुरू हो जाता है।
- ये घाव कभी ठीक नहीं होते और चेहरे पर एक दाग सा हो जाता है। साथ ही इसका इलाज भी नहीं हो पाता है।
खतरनाक बीमारी के तीन प्रकार
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक इस बीमारी के तीन प्रकार होते हैं।
क्यूटेनियस लिहमैनियसिस- यह इस बीमारी का एक कॉमन टाइप है और बीमारी का यही प्रकार सीरिया में देखागया है।
वीसीरियल लिहमैनियसिस- यह इस बीमारी का सबसे खतरनाक प्रकार है और इसका असर शरीर के सबसे नाजुक अंगों पर होता है। इस बीमारी की वजह से बुखार, वजन में कमी के अलावा लीवर भी बढ़ने लगता है।
म्यूकोक्यूटेनियस लिहमैनियसिस- इसे डब्ल्ूयएचओ ने सबसे विनाशकारी करार दिया है। इस प्रकार में नाक की ऊपरी झिल्ली, मुंह और गले का मांस तक खत्म हो जाता है।
यूरोप की ओर बढ़ी बीमारी
- सीरिया में पानी की कमी और गिरी हुई इमारतों की वजह से बीमारी तेजी से फैली।
- सीरिया में मेडिकल फैसिलिटीज न के बराबर हैं और ऐसे में खतरा चार गुना तक बढ़ा।
- वर्ष 2000 से 2012 के बीच लेबनान में इस बीमारी के सिर्फ छह केस ही सामने आए थे।
- वर्ष 2013 तक ही इस बीमारी के 1,033 केस दर्ज हो गए थे।
- लेबनान के मुताबिक 96 प्रतिशत लोगों में बीमारी सीरिया से आए शरणार्थियों की वजह से।
- अब टर्की, जॉर्डन, लीबिया और यमन में इस बीमारी के सैंकड़ों केस दर्ज हो गए हैं।
- यमनियों के सऊदी अरब जाने की वजह से इस बीमारी के वहां फैलने का खतरा।
- बड़ी संख्या में शरणार्थी यूरोप में मौजूद और हो सकता है कि यह बीमारी यूरोप भी पहुंच जाए।












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