तालिबान से बचकर अमेरिकी प्लेन से कैसे भागा 27 साल का अफगानी पत्रकार, सुनाई सनसनीखेज कहानी

अफगानी पत्रकार रमीन के मुताबिक, काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद उस प्राइवेट प्लेन में एक हजार से ज्यादा लोग सवार हो गये, लेकिन और भी ज्यादा लोग खुद को उस फ्लाइट के अंदर टूंसना चाहते थे।

काबुल, अगस्त 20: अफगानिस्तान में तालिबान की खौफ की हजारों कहानियां हैं, जो धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रही हैं। ऐसी ही सनसनीखेज और रौंकटे खड़े करने वाली कहानी बताई है 27 साल के एक अफगानी पत्रकार ने, जिसकी कम उम्र में ही कलम के जरिए तालिबान की नाक में दम कर दिया था, लेकिन, काबुल पर कब्जा होने के बाद उस पत्रकार के लिए काबुल में रहना, मतलब मौत का निवाला बनना था, लिहाजा उसने काबुल छोड़ने के लिए घर से निकल पड़ा...लेकिन, काबुल छोड़ना उसके लिए आसान नहीं होने वाला था।

खौफनाक था काबुल एयरपोर्ट का मंजर

खौफनाक था काबुल एयरपोर्ट का मंजर

27 साल के अफगान जर्नलिस्ट रमीन रहमान काबुल पर तालिबान के कब्जा होते ही काबुल एयरपोर्ट की तरफ निकल पड़े। रहमान ने कहा कि ''काबुल एयरपोर्ट के रनवे पर हजारों घबराए हुए लोग थे और सबके सब बेबस। गोलियों की आवाज आ रही थी। हर कोई अमेरिका जाने वाली फ्लाइट में बस बैठ जाना चाहता था, हर कोई अपनी जान बचाना चाहता था।'' रमीन ने कहा कि, हम काबुल हवाई अड्डे पर थे और वहां मौजूद हजारों लोग बिल्कुल खाली हाथ थे और उनकी हाथों में कुछ नहीं था। तालिबान की वजह से हर आंख में आप दहशत देख सकते थे। रमीन ने कहा कि, एयरपोर्ट पर हमने देखा था कि वहां पर फ्लाइट मौजूद थे और हमें उम्मीद जगी की हम निकल सकते थे, लेकिन फिर हमें पता चला कि पायलट मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि, एयरपोर्ट पर उस वक्त सिर्फ एक निजी विमान उड़ान भरने की स्थिति में था, जो अफगानिस्तान के एक प्राइवेट कंपनी का था, और देखते ही देखते उस विमान की तरफ भीड़ टूट पड़ी।

एक विमान में बैठे हजार से ज्यादा लोग

एक विमान में बैठे हजार से ज्यादा लोग

अफगानी पत्रकार रमीन के मुताबिक, काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद उस प्राइवेट प्लेन में एक हजार से ज्यादा लोग सवार हो गये, लेकिन और भी ज्यादा लोग खुद को उस फ्लाइट के अंदर टूंसना चाहते थे। लोग सीढ़ियों से लटक रहे थे, विमान के पहिए से लटक रहे थे। फ्लाइट के अंदर काफी ज्यादा भीड़ हो गई थी और उसमें अफगानिस्तान के कई नेता भी ठूंसे हुए थे, वहीं, नेताओं के गार्ड लोगों की भीड़ को फ्लाइट से हटाने की कोशिश कर रहे थे, ताकि विमान उड़ान भर सके। रमीन ने आपबीति बताते हुए कहा कि ''मेरे आस-पास के सभी लोग डरे हुए थे और जान बचाने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। किसी को नहीं पता था कि क्या करना है। मैंने अपने जर्मन दोस्त को फिर फोन किया और उसने मुझे बताया कि जर्मन सरकार एक दिन बात काबुल से लोगों को बाहर निकालना शुरू करेगी''। रमीन ने कहा कि ''जर्मन दोस्त से ये बातें सुनकर मैं पूरी तरह से टूट गये, मेरी उम्मीद खत्म हो रही थी, मैं एयरपोर्ट के बाहर गोलियों की आवाज सुन रहा था''

''इधर आओ, तुम सुरक्षित हो''

''इधर आओ, तुम सुरक्षित हो''

अफगान पत्रकार रमीन ने कहा कि ''मेरी उम्मीद खत्म हो गई थी तभी मैंने अमेरिकी सैनिकों के एक ग्रुप को काबुल एयरपोर्ट के एक कोने में जाते हुए देखा। उनमें से एक अमेरिकी सैनिक ने विदेशियों से कहा ''परेशान मत हो, यहां अभी तालिबान के लोग नहीं आएंगे, यहां अभी भी अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं''। रमीन ने कहा कि ''मैं भी विदेशियों के ग्रुक के साथ उनके पीछे-पीछे भागने लगा, हम गोलियों की काफी तेज आवाज सुन रहे थे ये पूरा वातावरण काफी भयानक था''। रमीन ने कहा कि ''अगले कुछ पलों में मुझे लगा कि वक्त ठहर गया है, तभी मैंने सुना कि अमेरिकी सैनिक कह रहे थे, चलों चलें''

काफी बुरी हो गई थी स्थिति

काफी बुरी हो गई थी स्थिति

अफगानी पत्रकार रमीन ने आपबीति बताते हुए कहा कि ''मैंने देखा कि लोगों की एक भीड़ एक विमान पर चढ़ रही है, और मैंने उनका पीछा किया। इस समय मैं बस इतना ही कर सकता था। लोगों की भीड़ के साथ मैं विमान में चढञने में कामयाब हो गये, जिसमें पहले से ही सैकड़ों लोग सवार थे। विमार के अंदर खड़े होने की भी जगह नहीं थी। लोग एक दूसरे को और अपने बच्चों को पकड़े हुए थे। सांस तक लेने में दिक्कत हो रही थी। उस विमान में एक हजार से ज्यादा लोग सवार थे। न हवा थी, न जगह, न कुछ भी। एक सेंटीमीटर भी नहीं''।

युद्द के मैदान से निकला बाहर

युद्द के मैदान से निकला बाहर

27 साल के अफगानी पत्रकार रमीन ने कहा कि ''जब विमान ने उड़ान भरी तो मैं काफी ज्यादा खुश हो गया। हर कोई खुश था और तालियां बजा रहा था। हर कोई शोर मचा रहा था, क्योंकि हम युद्ध के मैदान से बाहर निकल रहे थे। हम अभी भी बाहर गोलियों की आवाज सुन रहे थे और अभी भी प्लेन के बाहर हजारों अफगान दिख रहे थे, जो देश से बाहर निकलना चाह रहे थे''। रमीन ने कहा कि '' यह मेरे जीवन के सबसे खुशी के पलों में से एक था। उड़ान भरने वाले अमेरिकी पायलट को मैं धन्यवाद दे रहा था। कुछ देर बाद जाकर हम स्थिर हुए और यही सोच रहे थे कि अगर ये विमान नहीं आता और अगर हम इसमें नहीं बैठ पाते, तो हम जिंदा नहीं बच सकते थे।

Recommended Video

    Ravikant Gautam : ITBP के वो कमांडो जो 150 भारतीयों को काबुल से एयरलिफ्ट कर लाए, VIDEO

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+