Hormuz Crisis: ईरान ने सीज किया भारत आ रहा जहाज, क्या लेकर आ रहा था गुजरात?

Hormuz Crisis: अमेरिका-ईरान की जंग का असर अब भारत पर पड़ता दिख रहा है। पहले भारतीय जहाजों को ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आसानी से बिना रोक-टोक के जाने दे रहा था, वहीं अब खबर आ रही है कि भारत आ रहे जहाजों पर भी कार्यवाही की गई है। जिन जहाजों को IRGC द्वारा जब्त करने की खबर आई हैं उनके नाम MSC Francesca और Epaminodes बताए जा रहे हैं। जिसमें Epaminodes जहाज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर आ रहा था।

ईरान ले जाए जा रहे जब्त जहाज

ईरान की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक अब इन दोनों जहाजों को ईरान ले जाया जा रहा है। वहीं इन दोनों जहाजों के मालिकों से संपर्क किया जा रहा है। दूसरी तरफ ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बुधवार को इस अहम समुद्री रास्ते पर कम से कम तीन मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया। जिसके पीछे ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps का हाथ बताया जा रहा है।

Hormuz Crisis

दूसरे जहाज पर भी हमला, बढ़ी चिंता

इसी दौरान एक और घटना सामने आई, जिसमें एक अन्य मालवाहक जहाज ने बताया कि उस पर गोलीबारी की गई और उसे समुद्र के बीच में रोक दिया गया। हालांकि जहाज को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा को साफ दिखा दिया है।

चीन ने जताई चिंता

बढ़ते तनाव को देखते हुए चीन ने भी चिंता जताई है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने इसे "युद्ध और शांति के बीच का अहम दौर" बताया। उन्होंने सभी देशों से ईमानदारी दिखाने और युद्धविराम को बनाए रखने की अपील की है।

यूरोप भी अलर्ट पर

यूरोपीय संघ भी इस स्थिति को लेकर चिंतित है। ब्रुसेल्स में ट्रांसपोर्ट मंत्रियों की इमरजेंसी बैठक बुलाई गई। International Energy Agency के प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर हालात बिगड़े, तो यूरोप के पास सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन बच सकता है। हालांकि साइप्रस के मंत्री ने तुरंत संकट से इनकार किया, लेकिन तैयारी की जरूरत पर जोर दिया।

ट्रंप का यू-टर्न: युद्धविराम बढ़ाने का फैसला

इन तनावपूर्ण हालात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्धविराम को तब तक बढ़ाएगा, जब तक तेहरान कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं करता और बातचीत खत्म नहीं हो जाती। यह बयान उनके पहले के रुख से बिल्कुल उल्टा है, जब उन्होंने युद्धविराम बढ़ाने को लगभग नामुमकिन बताया था।

ईरान का साफ इनकार

वहीं ईरान ने अमेरिका की शर्तों पर बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान का कहना है कि वह धमकियों के साये में या अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के दौरान किसी भी बातचीत में शामिल नहीं होगा। यह बयान ईरान के सरकारी टीवी पर प्रसारित किया गया, जो वहां के टॉप कमांडर्स के अंदर चल रही बहस को भी दिखाता है।

इस्लामाबाद पीस टॉक अधर में लटकी

इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत भी फिलहाल अटकी हुई है। पाकिस्तान की राजधानी में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा चुके थे, लेकिन ईरानी मीडिया के मुताबिक जब दोनों तरफ से कोई भी डेलीगेट्स वहां नहीं पहुंचे तो पाकिस्तान में हताशा छा गई।

कुल जमा बात

कुल मिलाकर Strait of Hormuz में हुए हमले, बातचीत में रुकावट और अलग-अलग देशों के रुख ने मिडिल ईस्ट को एक नाजुक मोड़ पर ला दिया है। ऐसे समय में सभी पक्षों को संयम दिखाने और शांति के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत है, ताकि हालात और खराब न हों।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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