बहुत बड़े संकट में फंस सकते हैं भारत पाकिस्तान, देश कैसे बचाएंगे नरेन्द्र मोदी और इमरान खान?

हिमालय के ग्लेशियर असाधारण रफ्तार से पिघल रहे हैं, जिससे भारत और पाकिस्तान में करोड़ों लोगों सामने पानी का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा।

नई दिल्ली, दिसंबर 21: हिमालय में ग्लेशियर पिघलने को लेकर लेटेस्ट स्टडी में चिंता बढ़ाने वाली बातें निकलकर सामने आई हैं। करोड़ों हिंदुस्तानियों को छक कर पानी पिलाने वाले हिमालय के ग्लेशियर असाधारण रफ्तार से पिघल रहे हैं, जिसकी वजह भयानक स्तर पर जलसंकट खड़ा हो सकता है। लेटेस्ट रिसर्च में कहा गया है कि, हिमालय के ग्लेशियर जिस रफ्तार से पिघल रहे हैं, उससे भारत और पाकिस्तान में रहने वाले करोड़ों लोग बहुत जल्द बुरी तरह से प्रभावित हो सकते हैं।

असाधारण दर से पिघल रही है बर्फ

असाधारण दर से पिघल रही है बर्फ

हिमालय में ग्लेशियर "असाधारण" दर से पिघल रहे हैं और नए शोध से पता चलता है कि इस क्षेत्र में विशाल बर्फ की चादरें पिछली सात शताब्दियों की तुलना में पिछले चार दशकों में 10 गुना तेजी से सिकुड़ गई हैं। रिपोर्ट में चेतावनी जारी करते हुए कहा गया है कि, एशिया में गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी के किनारे रहने वाले करोड़ों भारत और पाकिस्तान के लोग एक एक बूंद पानी के लिए तरस जाएंगे। वैज्ञानिकों ने स्टडी में पाया है कि, साल 2020 के बाद हिमालय के ग्लेशियर के पिघलने की रफ्तार 10 गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है और इतनी रफ्तार से बर्फ का पिघलना भारत और पाकिस्तान, दोनों ही देशों में रहने वाले लोगों के लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है।

जर्नल साइंटिफिक में प्रकाशित रिसर्च

जर्नल साइंटिफिक में प्रकाशित रिसर्च

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में सोमवार को प्रकाशित स्टडी में कहा गया है कि, हिमालय में लगभग 15,000 बर्फ की चादरों में से बड़े पैमाने पर बर्फ का नुकसान हो रहा है और जितना नुकसान हिमालय के बर्फ का हो रहा है, वो दुनिया में सबसे ज्यादा है। हिमालय के पहाड़ों को तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है, क्योंकि हिमालय के पास अंटार्कटिका और आर्कटिक के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ग्लेशियर है, जहां अकूत मात्रा में बर्फ रखा है, लेकिन, पिछले 20 सालों में जिस रफ्तार से बर्फ पिघल रही है, वो एक तरह से मानवता के ऊपर ही संकट है। क्योंकि, अगर हिमालय से पानी मिलना बंद होता है, तो फिर क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।

कृषि और पीने के पानी पर खतरा

कृषि और पीने के पानी पर खतरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि बर्फ के पिघलने से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों के लिए कृषि और पीने के पानी की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा और इतना ही नहीं, हिमालय में बर्फ के पिघलने से समुद्र का जलस्तर भी काफी तेजी से बढ़ेगा, जिसकी वजह से दुनिया भर के तटीय शहरों पर भी गंभीर संकट मंडराने लगेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि, एक तरफ जहां एक बड़ी आबादी बूंद बूंद पानी के लिए परेशान होगी, वहीं एक बड़ी आबादी बाढ़ से तबाह हो जाएगी।

हिमालय खो चुका है 40% बर्फ

हिमालय खो चुका है 40% बर्फ

शोधकर्ताओं ने पाया कि पिछले कई सौ सालों में हिमालय के ग्लेशियरों ने अपने क्षेत्र का लगभग 40% बर्फ खो दिया है, इसका मतलब ये हुआ कि, अपने चरम पर रहने के दौरान हिमालय के 28 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बर्फ था लेकिन अब सिर्फ 19 हजार 600 वर्ग किलोमीटर में ही बर्फ बचा हुआ है। इस रिसर्च को करवे के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया है और रिसर्च को पूरी तरह से करने के लिए हिमालय के ग्लेशियर का फिर से निर्माण किया गया था और फिर उसके पिघलने की गति की गणना की गई थी।

तेजी से बदल रही है हिमालय की स्थिति

तेजी से बदल रही है हिमालय की स्थिति

इस शोध को करने वाले वैज्ञानिक, डॉक्टर सिमोन कुक ने कहा कि, हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने हिमालय में आने वाली बदलाव को महसूस करना शुरू कर दिया है और अब जो बदलाव हो रहे हैं, वो पिछली कई सदियों में हुए बदलाव से ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि, ''हमने जो रिसर्च किया है, वो इस बात की पुष्टि करता है कि, हिमालय में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और इसका असर कई देशों पर काफी गंभीर पड़ने वाला है।''

बढ़ जाएगा समुद्र का जलस्तर

बढ़ जाएगा समुद्र का जलस्तर

रिसर्च के दौरान पाया गया है कि, हिमालय से करीब 390 क्यूबिक किलोमीटर से लेकर 586 क्यूबिक किलोमीटर तक का बर्फ पिघल चुका है और हिमालय से पिघल चुकी बर्फ की ये मात्रा मध्य यूरोपीय आल्प में मौजूद कुल बर्फ के बराबर है। रिसर्चर्स ने पाया है कि, इस बर्फ के पिघलने से समुद्र का जलस्तर 0.03 और 0.05 इंच तक बढ़ चुका है और आने वाले वक्त में समुद्र का जलस्तर और भी तेजी से बढ़ने वाला है। रिसर्च के दौरान पका चला है कि, हिमालय में भी पूर्वी इलाके से बर्फ और भी ज्यादा तेजी से पिघल रही है और ये क्षेत्र पूर्वी नेपाल से लेकर भूटान के उत्तर तक फैला हुआ है। रिसर्च में बताया गया है कि, हिमालयन ग्लेशियर उन जगहों पर और भी ज्यादा तेजी से पिघल रही है, जहां पर झील मौजूद हैं।

जलवायु परिवर्तन का हो रहा असर

जलवायु परिवर्तन का हो रहा असर

दुनियाभर के वैज्ञानिक अब इस बात पर सहमत हो चुके हैं कि, इंसानों द्वारा प्रदूषण की वजह से तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहे हैं और उसी की वजह से अंटार्कटिक, अटलांटिक और हिमालय के ग्लेशियर्स में बर्फ तेजी से पिघल रही हैं और इसके साथ ही दुनिया भर में उच्च समुद्र का तापमान भी बढ़ गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स ग्लेशियोलॉजिस्ट और के सह-लेखक जोनाथन कैरविक ने कहा कि, "निस्संदेह सबसे पहले जलवायु परिवर्तन तेजी से हो रहा है और उसका असर हिमालय के ग्लेशियर पर हो रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा कि, दक्षिण एशियाई मानसून में बदलाव ने भी हिमालय में बर्फ को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

करीब 6 फीट बढ़ सकता है जलस्तर

करीब 6 फीट बढ़ सकता है जलस्तर

अमेरिकन अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर विश्लेषण किया है और नासा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, साल 2100 तक वैश्विक समुद्र का स्तर 2 फीट से 6 फीट तक बढ़ सकता है। और इस तरह के अनुमान समुद्र के स्तर में वृद्धि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम आंकते हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग लगभग 3 डिग्री सेल्सियस यानि 5.4 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाती है, तो समुद्र के जलस्तर में खतरनाक वृद्धि होगी, क्योंकि, पृथ्वी पहले ही ग्लोबल वार्मिंग के 1 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुकी है।

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