कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, कैंडी से स्वास्थ्य को खतरा! ज्यादा खाते हैं तो हो जाएं सावधान, रिसर्च में बड़ा दावा
दुनिया के लगभग अधिकतर देशों में खान- पान का ट्रेंड बदलने के साथ कई बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इस बीच मेडिकल रिसर्च के निष्कर्षों के जरिए एक्सपर्ट्स समय- समय पर स्वास्थ्य को लेकर आगाह भी करते हैं। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक शोध में पाया है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड (Ultra-Processed Food) स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित हो रहे हैं। खासकर उन देशों में खान- पान के इस ट्रेंड के चलते काफी बुरा हाल है, जहां लोग अधिकतर फॉस्ड फूड या फिर यूपीएफ पर ही निर्भर रहते हैं।
पिछले 70 वर्षों में आहार पैटर्न में एक बड़ा बदलाव आया है। घर पर भोजन पकाकर खाने के बजाय लोग अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को अधिक बढ़ावा देने लगे हैं। दरअसल, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ वे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें कृत्रिम मिठास, रंग और संरक्षक जैसे योजक और तत्व होते हैं जो आमतौर पर घरेलू रसोई में नहीं पाए जाते हैं। ये ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनमें संतृप्त वसा अधिक होती है और पोषक तत्वों और फाइबर की कमी होती है।

मेडिकल एक्सपर्ट का मानना है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। खासकर मांस, मीठा पेय, मिठाइयां और अन्य फास्ड फूड इसमें शामिल हैं। विशेषज्ञों ने अपने शोध में पाया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने से कम समय में होने वाली मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं।
हार्वर्ड के शोधकर्ताओं का बड़ा दावा
मेडिकल वीकली मैग्जीन बीएमजे में प्रकाशित एक शोध में चौंकाने वाला दावा किया गया है। शोध लेख में बताया गया कि जो लोग नियमित रूप से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड मांस का सेवन करते हैं, उनमें समय से पहले मौत की 13% अधिक संभावना पाई गई। इसके अलावा, उच्च शर्करा और कृत्रिम रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करने वालों में शीघ्र मृत्यु के जोखिम में 9% की वृद्धि देखी गई। ओवरऑल स्टडी के मुताबिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने वालों में मृत्यु दर 4% अधिक होने की संभावना पाई गई।
8,193 मौतों की डेटा का किया गया विश्लेषण
शोधकर्ताओं ने अपने विषय पर आगे बढ़ाने के लिए करीब 34 साल शोध किया। तीन दशक से अधिक समय तक चले शोध में कुल 1,14,000 सैंपल का चयन किया गया। इस दौरान शोधकर्ताओं ने 48,193 मौतों की पहचान की, जिनमें कैंसर के कारण 13,557 मौतें, हृदय रोगों के कारण 11,416 मौतें, श्वसन रोगों के कारण 3,926 मौतें और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के कारण 6,343 मौतें हुईं।
कई बीमारियां बढ़ने की पुष्टि
शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष में बताया कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के प्रभावों को जानने के लिए विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पिछले कुछ दशकों के भीतर तेजी से बदलते आहार के ट्रेंड बढ़ा है। पश्चिमी देशों में, यूपीएफ अब औसत व्यक्ति के आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं, जिसमें दैनिक भोजन का आधा हिस्सा शामिल होता है। युवाओं और कम आय वाले 80% तक लोग फॉस्ट फूड का सेवन करते हैं। शोध में दावा किया गया कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के चलते स्वास्थ्य संबंधी कई स्वास्थ्य समस्याओं बढ़ी हैं,जिनमें कैंसर, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, टाइप 2 मधुमेह और समय से पहले मौत शामिल हैं।












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