गन कल्चर में लाखों मरे, नस्लभेद चरम पर... भारत को नसीहत देने वाला US अपने गिरेबान में क्यों नहीं झांकता?
टेक्सास के एक स्कूल में एक बंदूकधारी शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग में 19 छात्रों और दो शिक्षकों को बेरहमी से मार दिया था। इस घटना के बाद से ही देश में हथियार खरीदने संबंधी एक कड़े कानून के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था।
न्यूयॉर्क, 05 जुलाई : अमेरिका (America) भारत समेत दुनिया को मानवाधिकार, नस्लभेद पर बड़ी-बड़ी बात तो करता है लेकिन वह खुद की गिरेबान पर एक बार भी नहीं झांकता है। यूएसए दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक देशों में से एक है परंतु यहां नस्लभेद, गोलीबारी (mass shootings)जैसी कई हिंसक वारदातें होती ही रहती हैं। इस पर किसी का भी ध्यान नहीं जाता है। अमेरिका में जब भी कहीं शुटिंग जैसी हिंसक वारदात होती हैं, वहां के राष्ट्रपति व सांसद सीनेट में इस मुद्दे पर बहस शुरू कर देते हैं। हालांकि, इस पर अभी तक कोई कारगार उपाय निकल कर सामने नहीं आया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक जून 2022 तक अमेरिका में 309 रिकॉर्ड संख्या में गोलीबारी (Mass Shootings) की घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं, 10 हजार से अधिक लोग गोलीबारी की घटनाओं में मारे जा चुके हैं।

फ्रीडम परेड में गोलीबारी
अमेरिका के शिकागो में सोमवार को फ्रीडम परेड निकाली जा रही थी, जिसके बीच अचानक से वहां गोलियां चलने लगीं। इस घटना में 6 लोगों के मारे जाने की खबर है। बता दें कि, अमेरिका में 4 जुलाई को स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया जाता है। इस दौरान देशभर में जगह-जगह पर परेड का आयोजन किया जाता है। इसको लेकर इलिनोइस शहर के हाईलैंड पार्क में फ्रीडम डे परेड आयोजित की गई थी। इसी दौरान फ्रीडम डे परेड में भाग लेने वाले लोगों पर शूटर ने गोलीबारी शुरू कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक एक छत से शूटर ने ताबड़तोड़ गोलीबारी की। रिपोर्ट के मुताबिक इस गोलीबारी में कई लोगों को गोली लगने की खबर है। गोली चलाने वाला एक रिटेल शॉप की छत पर चढ़ गया और वहां से लोगों पर फायरिंग शुरू कर दी।

क्या कहता है जीवीए का आंकड़ा
जीवीए (GVA) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक गोलीबारी की घटनाओं में अमेरिका में लगभग 10,072 लोग मारे गए। इन घटनाओं में जानबुझकर गोली चलाकर लोगों की हत्या करना और आकस्मिक हताएं शामिल हैं। जिनमें जानबूझकर और आकस्मिक हत्याएं शामिल हैं। हालांकि, गोली चलाकर आत्महत्या की अभी तक इस साल कोई घटना निकल कर सामने नहीं आई है। जीवीए के मुताबिक, 2022 के पहले 185 दिनों के भीतर औसतन एक हफ्ते के भीतर ऐसी 11 घटनाएं हुई हैं।

क्या कहती है फोर्ब्स की रिपोर्ट
फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में शूटिंग की घटनाएं पिछले साल की रिकॉर्ड को मात देने के करीब है। यह अमेरिका जैसे ताकतवर देश के लिए अफसोस की बात होनी चाहिए। जहां, वह अपनी जनता की जिंदगी को बचा पाने में असमर्थ है। 2014 से गन वायलेंस आर्काइव गोलीबारी की घटनाओं की जानकारी रख रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 2021 में 692 शूटिंग की घटनाएं हुईं थी। बता दें कि, टेक्सास के उवाल्डे में एक प्राथमिक विद्यालय पर हमला, जिसमें 19 बच्चे और दो शिक्षक मारे गए थे, इस साल देश की सबसे घातक शूटिंग (गोलीबारी) थी।

हाल ही में आया है बंदूक हिंसा रोधी कानून
बता दें कि, हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने बंदूक हिंसा रोधी बिल को मंजूरी दी थी। इस विधेयक को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों राजनीतिक दलों का समर्थन मिला। टेक्सास के एक स्कूल में एक बंदूकधारी शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग में 19 छात्रों और दो शिक्षकों को बेरहमी से मार दिया था। इस घटना के बाद से ही देश में हथियार खरीदने संबंधी एक कड़े कानून के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा था। इसी तरह की आज फ्रीडम डे परेड में फायरिंग की घटना सामने आई है।

अमेरिका में लगातार हो रहीं गोलीबारी और नस्लभेद की घटनाएं
अमेरिका को हिलाकर रख देने वाली गोलीबारी की घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में बंदूक हिंसा रोधी कानून बेहद महत्वपूर्ण है। टेक्सास में हुई घटना से कुछ दिन पहले 'नस्ली भावना' रखने वाले 18 वर्षीय एक श्वेत युवक ने अमेरिका के बफेलो शहर के एक सुपरमार्केट में अंधाधुंध गोलबारी कर 10 अश्वेत लोगों की हत्या कर दी थी।

साल 2022 की घटनाएं
जनवरी 23 ,विस्कॉन्सिन के मिल्वौकी में एक घर पर वेलफेयर जांच के दौरान छह लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। एक 34 वर्षीय व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाया गया था।3 अप्रैल, कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो शहर में नाइटक्लब खाली होने के दौरान हुई एक गोलीबारी में छह लोग मारे गए थे। 14 मई को 'नस्ली भावना' रखने वाले 18 वर्षीय एक श्वेत युवक ने अमेरिका के बफेलो शहर के एक सुपरमार्केट में अंधाधुंध गोलबारी कर 10 अश्वेत लोगों की हत्या कर दी थी। 24 मई को उवाल्डे टेक्सास के एक स्कूल में एक बंदूकधारी शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग में 19 छात्रों और दो शिक्षकों को बेरहमी से मार दिया था।
1 जून, एक व्यक्ति जिसने पीठ की सर्जरी के बाद दर्द के लिए एक सर्जन को दोषी ठहराया गया था। वह ओक्लाहोमा के तुलसा के एक अस्पताल में घुस गया और डॉक्टर सहित चार लोगों को गोली मार दी। जुलाई 4, अमेरिका के शिकागो में सोमवार को फ्रीडम परेड के दौरान एक बंदूकधारी ने छह लोगों को गोली मारकर हत्या कर दी। हत्यारे ने इस दौरान अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके कारण 30 अन्य घायल भी हो गए।

संविधान देता है बंदूक रखने की आजादी
अमेरिका का संविधान अपने नागरिकों को बंदूक या गन रखने का पूरा अधिकार देता है। भारत की बात करें तो देश में बंदूक लेने के लिए व्यक्ति को लाइसेंस की जरूरत होती है, लेकिन अमेरिका में इसकी कोई आवश्यकता नहीं है। इसके कारण कोई भी व्यक्ति बंदूक आसानी से हासिल कर सकता है। इस वजह से आए दिन वहां गोलीबारी की घटनाएं होती रहती हैं।

क्या कहती है मीडिया रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट की माने तो पिछले 50 वर्षों में अकेले अमेरिका 14 लाख लोग बंदूक से होने वाली हिंसा में मारे जा चुके हैं। इतिहास बताता है कि, अमेरिका में बंदूक संस्कृति उस जमाने से है, जब वहां अंग्रेजों का राज था। लोग अपने परिवारों की सुरक्षा खुद करते थे, इसलिए लोग वहां आसानी से बंदूक खरीद लेते थे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से वहां लोगों को बंदूक रखने की आजादी मिली थी। 19वीं शताब्दी में अमेरिका को यह समझ में आ गया था कि, देश में बंदूक कल्चर से शांति की अशांति ही फैलेगी, लेकिन वह इन बातों को नजरअंदाज करता आ रहा था। शायद गन लाबी और कुछ नेताओं के दबाव को लेकर गन कल्चर के खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं बन पाया।

अमेरिका में गन कल्चर का इतिहास पुराना
वर्ष 1791 में अमेरिका के संविधान में दूसरा संशोधन लागू हुआ था। इसके तहत अमेरिकी नागरिकों को हथियार रखने का हक दिया गया था। लेकिन इन अधिकारों की एक कीमत थी। अमेरिका में दशकों तक गन कल्चर से लाखों लोगों ने अपनी जानें गवाई। इन मौतों का बोझ अमेरिकी संसद पर समय के साथ बढ़ता चला गया। आज तक अमेरिका इस काूनन को बदल नहीं पाया है। अमेरिका की जिस संसद से यह उम्मीद करते हैं कि वह इसके खिलाफ सख्त कानून बनाएगी वहीं उस संसद से कुछ दूरी पर गन की बड़ी-बड़ी कई दुकानें हैं, जहां अमेरिकी नागरिक आाधुनिक हथियार खरीद सकते हैं।

कब तक लोगों की जिंदगी तबाह करेगा गन कल्चर
बता दें कि, हाल ही में न्यूयार्क प्रांत में गन कल्चर को रोकने के लिए एक कानून बनाया गया था। इस कानून के मुताबिक घर से बाहर हथियार ले जाने पर पुलिस को इसका उपयुक्त कारण बताना होता था। यह कारण न बताने पर पुलिस उस हथियार को जब्त कर सकती थी। इस कानून की वजह से न्यूयार्क में हथियारों की बिक्री में गिरावट आ रही थी। इसके बाद न्यूयार्क स्टेट राइफल एंड पिस्टल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून को खारिज करवाने की मांग की थी। अमेरिका में गन कल्चर और नस्लभेद का मुद्दा सालों पुराना है, यह अब नासूर बनता जा रहा है, लेकिन यूएसए जैसे देश, भारत और अन्य देशों को मानवाधिकार की रक्षा का पाठ पढ़ाता है, लेकिन अमेरिका खुद इन मुद्दों से जूझ रहा है, इस पर उनसे कौन प्रश्न करेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।












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