Godfather of AI: 'बेहद खतरनाक है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस'... AI के गॉडफादर ने गूगल से दिया इस्तीफा
जेफ्री हिंटन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बेहद खतरनाक करार दिया है और उन्होंने कहा है, कि ये वक्त के साथ काफी खतरनाक होता जा रहा है।

Geoffrey Hinton Quits Google: जेफ्री हिंटन, जिन्हें 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गॉडफादर' कहा जाता है, उन्होंने गूगल से इस्तीफा दे दिया है। सोमवार को जेफ्री हिंटन पुष्टि की है, कि उन्होंने जिस तकनीक को विकसित करने में मदद की, उसके "खतरों" के बारे में बात करने के लिए पिछले हफ्ते उन्होंने Google से इस्तीफा दे दिया है।
जेफ्री हिंटन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बेहद खतरनाक करार दिया है और उन्होंने कहा है, कि वो लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए गूगल से इस्तीफा दे दिया है।
आपको बता दें, कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विकसित करने में जेफ्री हिंटन ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसीलिए उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गॉडफादर कहा जाता है और उनके इस्तीफे के बाद पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है, कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को दैनिक जीवन में इस्तेमाल किया जाए, या फिर उसका इस्तेमाल रोक दिया जाए।
जेफ्री हिंटन ने दिया इस्तीफा
जेफ्री हिंटन ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, कि "मैं सामान्य बातों से खुद को सांत्वना देता हूं, कि अगर मैंने ऐसा नहीं किया होता, तो कोई और ऐसा करता।"
हिंटन ने एक ट्वीट में कहा, कि "मैंने गूगल छोड़ दिया है, ताकि मैं एआई के खतरों के बारे में बात कर सकूं, बिना इस बात पर विचार किए, कि यह Google को कैसे प्रभावित करता है।" हालांकि, उन्होंने कहा, कि "Google ने बहुत जिम्मेदारी से काम किया है।"
Google के मुख्य वैज्ञानिक जेफ डीन ने कहा, कि जेफ्री हिंटन ने "एआई में मूलभूत सफलता हासिल की है" और उन्होंने हिंटन के "Google में एक दशक के योगदान" के लिए उनकी प्रशंसा की।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए हिंटन का काम
जेफ्री हिंटन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में काम करने वाले शुरूआती लोगों में से एक थे और उन्होंने साल 2012 में टोरंटो विश्वविद्यालय में दो स्नातक छात्रों के साथ मिलकर एक ऐसी तकनीक बनाई, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए बौद्धिक आधार बन गई।
टेक उद्योग की सबसे बड़ी कंपनियों का मानना है, कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उनके भविष्य की कुंजी है।
आपको बता दें, कि साल 1970 में जेफ्री हिंटन ने कैम्ब्रिज से एक्सपेरिमेंटल साइकोलॉजी से ग्रेजुएशन किया था, जबकि उन्होंने साल 1978 में एडिनबर्ग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय से पीएचडी की।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित खतरों के बारे में चेतावनी देते हुए, हिंटन ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गये साक्षात्कार में कहा, कि "यह देखना काफी मुश्किल है, कि आप इस टेक्नोलॉजी को किसी बुरे हाथ में जाने से कैसे रोक सकते हैं।"
टेक पायनियर जेफ्री हिंटन ने कहा, कि उन्हें लगता है कि जैसे-जैसे कंपनियां अपने एआई सिस्टम में सुधार करती हैं, वे तेजी से खतरनाक दिशा में बढ़ती जाती है। एआई तकनीक के बारे में उन्होंने कहा, कि "देखिए यह पांच साल पहले कैसा था और अब कैसा है।" उन्होंने कहा, कि "जब आप इस अंतर को देखते हैं, तो पता चलता है, कि ये काफी डरावना है।"
इंसानों के दिमाग से काफी है अलग- हिंटन
वहीं, बीबीसी से बात करते हुए ट्यूरिंग अवार्ड विजेता हिंटन कहा, कि उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि एआई जिस तरह की बुद्धिमत्ता विकसित कर रहा है, वह उस तरह की बुद्धिमत्ता से बहुत अलग है जो इंसानों के पास है।
उन्होंने कहा, कि "हम जैविक प्रणालियां हैं और ये डिजिटल प्रणालियां हैं, डिजिटल प्रणालियों के साथ आपके पास दुनिया के एक ही मॉडल की कई प्रतियां हैं, और इसकी सभी प्रतियां अलग अलग बुद्धिमता हासिल करती है। और फिर उस ज्ञान को ये काफी तेजी के साथ शेयर करती हैं, लिहाजा, इस तरह ये चैट ऐप्स किसी से भी अधिक जान सकते हैं।"
हिंटन ने चैटबॉट्स को "काफी डरावना" कहा है। उन्होंने कहा, कि जब खुफिया जानकारी की बात आती है तो मौजूदा चैटबॉट इंसानों के बराबर नहीं थे, लेकिन यह जल्द ही बदल सकता है। उन्होंने बीबीसी से कहा, कि "अभी, जहां तक मैं बता सकता हूं, वे हमसे ज़्यादा बुद्धिमान नहीं हैं। लेकिन मुझे लगता है कि वे जल्द ही हमसे काफी ज्यादा आगे निकल सकते हैं।"












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