Geomagnetic Storm Today: आज धरती से टकरा सकता है 'सौर विस्फोट', पृथ्वी पर मंडराया खतरा
न्यूयार्क, 09 फरवरी। आज अंतरिक्ष में एक बड़ी घटना घटने वाली है, बुधवार-गुरुवार के दरमियान आज नया 'सूर्य विस्फोट' हमारी पृथ्वी से टकरा सकता है, जिसकी वजह से भू-चुंबकीय तूफान आने की आशंका है। हालांकि आज से ठीक एक हफ्ते पहले भी भू-चुंबकीय तूफान आया था लेकिन उससे कोई हानि नहीं हुई थी लेकिन आज का तूफान पहले से ज्यादा गंभीर बताया जा रहा है इसलिए धरती को नुकसान पहुंच सकता है।

आज धरती से टकरा सकता है 'सौर विस्फोट
इस तूफान की जानकारी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एज्युकेशन एंड रिसर्च के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन स्पेस साइंसेस ने दी है। उसने इस बारे में एक Tweet किया है। जिसमें उसने लिखा है कि 'आज यानी कि 9 फरवरी को पृथ्वी को भू-चुंबकीय तूफान का सामना कर पड़ सकता है। ये तूफान भारतीय समयानुसार सुबह 11.18 बजे से लेकर 10 फरवरी की दोपहर 3.23 बजे के बीच आ सकता है।'

इस तूफान से हो सकता है खतरा
इस तूफान की क्षमता 451-615 किलोमीटर प्रति हो सकती है। इस तूफान के कारण संचार तंत्र, प्रसारण, रेडियो नेटवर्क, नेविगेशन आदि में दिक्कत आ सकती है ।
आइए विस्तार से जानते हैं कि भू-चुंबकीय तूफान होता क्या है?

सौर तूफान
दरअसल भू-चुंबकीय तूफान, जिसे कि आम तौर पर सौर तूफान के रूप में जाना जाता है, चुंबकीय क्षेत्र के बदलाव के कारण आता है। ये बदलाव तब आता है जब सूरज से आने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (Coronalmass ejection) धरती के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। इस वजह से सौर ऊर्जावान कण (एसईपी) घटनाएं, भू-चुंबकीय रूप से प्रेरित धाराएं (जीआईसी), आयनोस्फेरिक गड़बड़ी हो सकती है। भू-चुंबकीय तूफान तीन तरह का होता है।

प्रारंभिक, मुख्य और पुनर्प्राप्ति (तूफान के तीन प्रकार)
- प्रारंभिक चरण को एसएससी के रूप में भी जाना जाता है। हालांकि, सभी भू-चुंबकीय तूफानों का प्रारंभिक चरण नहीं होता है ।
- मुख्य चरण की अवधि आमतौर पर 2-8 घंटे होती है।
- पुनर्प्राप्ति चरण तब होता है जब Dst अपने न्यूनतम मान से अपने शांत समय मान में बदल जाता है

कोरोनल मास इजेक्शन क्या है ?
आपको बता दें कि सूर्य से निकलने वाली लपटों को कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है, इस दौरान सूर्य के कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का बहुत बड़ा हिस्सा बाहर निकलता है, जो कि घातक हो सकता है। इस घटना के दौरान अरबों टन पदार्थ बाहर निकलते हैं,जो कि ग्रह, अंतरिक्ष यान या उपग्रह पर इफेक्ट डालते हैं।
भू-चुंबकीय तूफान की तीव्रता कई अलग-अलग तरीकों से रिपोर्ट की जाती है और ये तरीके निम्लिखित हैं
- कश्मीर सूचकांक
- ए-इंडेक्स
- यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन का जी-स्केल
सबसे बड़ा भू-चुंबकीय तूफान
सबसे बड़ा भू-चुंबकीय तूफान सितंबर 1859 में आया था, जिसने यूएस टेलीग्राफ नेटवर्क के कुछ हिस्सों को नष्ट कर दिया था।












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