भारत पर दिखेगा ग्लोबल वार्मिंग का भयंकर असर, 2050 तक सूख जाएंगी कई नदियां, UN की डराने वाली रिपोर्ट
एशिया में हिमालय से 10 प्रमुख नदियां निकलती हैं ये 130 करोड़ लोगों पीने का पानी प्रदान कर रही हैं। ग्लेशियर पिघलने का सबसे ज्यादा असर गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियों के बहाव और जलस्तर पर दिखेगा।

Image: Oneindia
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने भारत की प्रमुख नदियों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने आगाह किया कि आने वाले दशकों में ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमनद घटने से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख हिमालयी नदियां, जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, उनके प्रवाह में कमी देखी जा सकती है। 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ ग्लेशियर प्रिजर्वेशन' पर बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम में गुटेरेस ने कहा कि, ग्लेशियर पृथ्वी पर सभी जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। गुतारेस ने चिंता व्यक्त की कि मानव गतिविधियां ग्रह के तापमान को खतरनाक नए स्तरों तक ले जा रही है और 'पिघलते हुए हिमनद बेहद खतरनाक हैं।'
अगले कुछ वर्षों में सूख जाएंगी कई नदियां
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, 'हिमनद पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक हैं। दुनिया के 10 प्रतिशत हिस्से में हिमनद हैं। हिमनद दुनिया के लिए जल का एक बड़ा स्रोत भी हैं।' अंटार्कटिका में हर साल औसतन 150 अरब टन बर्फ घट रही है, जबकि ग्रीनलैंड की बर्फ और भी तेजी से पिघल रही है। वहां हर साल 270 अरब टन बर्फ पिघल रही है। इसके बाद सबसे ज्यादा ग्लेशियर हिमालय पर हैं, जो अब तेजी से पिघल रहे हैं। इसकी वजह से साल 2050 तक 170 से 240 करोड़ शहरी लोगों को पानी मिलना बेहद कम हो जाएगा।
पाकिस्तान जैसी बाढ़ का खतरा
एशिया में हिमालय से 10 प्रमुख नदियां निकलती हैं ये 130 करोड़ से अधिक लोगों पीने का पानी उपलब्ध करा रही हैं। गुटेरस ने कहा, 'जैसे-जैसे आने वाले दशकों में हिमनद और बर्फ की चादरें घटेंगी, वैसे-वैसे सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख हिमालयी नदियों में इसका प्रभाव दिखेगा और उनका जल प्रवाह कम होता जाएगा।' इसके अलावा अगर तेजी से ग्लेशियर पिघला तो बाढ़ की स्थिति भी आ सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया पहले ही देख चुकी है कि कैसे हिमालय पर बर्फ के पिघलने से पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि समुद्र का बढ़ता स्तर और खारे पानी का प्रवेश इन विशाल 'डेल्टा' के बड़े हिस्से को नष्ट कर देगा।
सवा सौ सालों में हालात हुए बुरे
गुटेरेस ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़ों का हवाला दिया जिसमें चेतावनी दी गई थी कि वैश्विक औसत समुद्र का स्तर पिछले 3,000 वर्षों में किसी भी पिछली सदी की तुलना में 1900 के बाद से तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा, "जब तक हम इस प्रवृत्ति को नहीं बदलते हैं, इसके परिणाम विनाशकारी होंगे। निचले इलाकों के समुदायों छोटे-छोटे देश हमेशा के लिए मिट सकते हैं। गुटेरेस ने कहा, हम भविष्य में दुनिया भर में बाढ़, सूखा और भूस्खलन सहित बड़े पैमाने पर पानी और जमीन के लिए भयंकर आंदोलन और प्रतिस्पर्धा देखेंगे।"












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