पुतिन की धमकी के बाद फ्रांस ने कहा, 'हम यूक्रेन की मदद करेंगे, रूस पर हमला नहीं करेंगे'
विशेषज्ञों ने पुतिन की अप्रत्याशित प्रतिक्रियाओं के बारे में चेतावनी दी है। उनका मानना है कि, यूक्रेन ने जिस तरीके रूसी कब्जों से अपने इलाके छुड़ाए हैं, उसके बाद से पुतिन की धमकियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पेरिस, 22 सितंबर : रूस और यूक्रेन युद्ध खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। जानकार बताते हैं कि, रूस युक्रेन जंग में रूसी सैनिकों की बड़े पैमाने पर क्षति हुई है। ऐसे में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भी ज्यादा आक्रामक हो चुके हैं। पुतिन ने जंग के बीच आंशिक सैन्य लामबंदी का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों और अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। रूसी राष्ट्रपति ने पश्चिम देशों को परमाणु हमलों की धमकी दे दी है जिससे ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देश घबराए हुए हैं। वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) का कहना है कि, उनका काम यूक्रेन की मदद करना है रूस पर हमला करना नहीं।

रूस की धमकी से पश्चिम में मची खलबली
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के सात महीनों से अधिक हो चुके हैं। रूसी सेना को पिछले कुछ दिनों से लगातार पीछे हटने पर मजबूर होना पर रहा है। इसको देखते हुए राष्ट्रपति पुतिन ने बड़ा कदम उठा लिया है। उन्होंने अपने देश में 3 लाख रिजर्व सैनिकों की तैनाती के आदेश दिए हैं। पुतिन ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि, रूस अपनी मातृभूमि के सम्मान के लिए कोई भी कदम उठाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी देशों को धमकाते हुए कहा कि पश्चिम को इससे दूर रहना चाहिए, नहीं तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

रूस दबाव में है, मैक्रों ने कहा...
पश्चिम देशों के लिए पुतिन के इस धमकी भरे संबोधन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, रूस स्पष्ट तौर पर इस वक्त दबाव में है लेकिन फ्रांस इस संघर्ष के आगे की वृद्धि में भाग नहीं लूंगा। उन्होंने कहा पुतिन ने कहा है कि, रूस अपनी रक्षा करने के लिए अपने सभी साधनों का इस्तेमाल करेगा। इस दौरान रूस हम पर हमला करने की धमकी भी दे रहा है। रूस युद्ध के लिए 3 लाख रिजर्व सैनिकों की तैनाती की बात कर रहा है।

फ्रांस यूक्रेन की मदद करेगा, रूस पर हमला नहीं करेगा
मैक्रों ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से लौटने के दौरान एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा,'हमारा काम हमारी लाइन को पकड़ना है, यानी यूक्रेन की मदद करना है, जैसा की हम कर रहे हैं। हम यूक्रेनी क्षेत्र की रक्षा करेंगे लेकिन रूस पर हमला नहीं करेंगे।' उन्होंने आगे कहा कि, यूक्रेन के सहयोगियं को रूसी राष्ट्रपति के 'ब्लैकमेल'के खिलाफ दृढ़ता से खड़ा होना चाहिए क्योंकि रूस ने अपनी धमकी में कीव के खिलाफ यु्द्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी दी है।

पुतिन की धमकी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
वहीं, विशेषज्ञों ने पुतिन की अप्रत्याशित प्रतिक्रियाओं के बारे में चेतावनी दी है। उनका मानना है कि, यूक्रेन ने जिस तरीके रूसी कब्जों से अपने इलाके छुड़ाए हैं, उसके बाद से पुतिन की धमकियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

पुतिन के कदम से सहम गए पश्चिमी देश?
रूसी राष्ट्रपति ने देश में 3 लाख रिजर्व सैनिकों की तैनाती वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किये। बता दें कि, रिजर्व सैनिक आम नागरिक होते हैं जिसे किसी तरह के संकट या युद्ध के समय सेवा में लिया जाता है। व्लादिमीर पुतिन के इस कदम को और भी जोर-शोर से युद्ध की तैयारी के रुप में देखा जा रहा है।
(Photo Credit : PTI & Other Social Media)












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