डेमोक्रेट तुलसी गब्बार्ड ने सीरिया पर हमलों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फटकारा
अमेरिकी कांग्रेस की पहली हिंदु सदस्य तुलसी गिब्बार्ड ने सीरिया पर हुए हमलों पर कहा सीरिया पर हमला जल्दबाजी में लिया गया फैसला। गिब्बार्ड का कहना हमले के समय लोगों के बारे में नहीं सोचा गया।
वॉशिंगटन। अमेरिकी कांग्रेस की पहली हिंदु सदस्या तुलसी गिब्बार्ड ने सीरिया पर शुरू हुए हवाई हमलों के लिए ट्रंप प्रशासन को जमकर लताड़ लगाई है। हवाई से डेमोक्रेट पार्टी की तुलसी ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया पर हमलों का फैसला एकदम जल्दबाजी में लिया है।

रूस और अमेरिका के बीच बढ़ेगा तनाव
तुलसी ने हिल मैगजीन के साथ बातचीत में कहा, 'प्रशासन ने बिना कुछ सोचे-समझे जल्दबाजी में कार्रवाई की है और इस कार्रवाई के समय इसके नतीजों के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा गया है। प्रशासन ने केमिकल हमले की जगह से सुबूतों के इकट्ठा होने का इंतजार भी नहीं किया और हमला कर दिया।' उन्होंने कहा कि इन सबकी वजह से उन्हें काफी गुस्सा आ रहा है और इस बात का अफसोस हो रहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन लोगों से सलाह ली जो आक्रामक नीति का समर्थन करते हैं और इसकी वजह से उन्होंने सीरिया की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए गैरकानूनी तौर पर युद्ध को बदल दिया है। यह संघर्ष छोटा है लेकिन इसकी वजह से और ज्यादा नागरिकों और शरणार्थियों की मौत होगी और इसकी वजह से अल कायदा और दूसरे आतंकी मजबूत होंगे। साथ ही अब रूस और अमेरिका के बीच परमाणु युद्ध की संभावना भी बढ़ गई है।
60 मिसाइलों ने किया हमला
नआपको बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को सीरिया के मिलिट्री बेस पर मिसाइल हमलों के आदेश दिए और शुक्रवार तड़के ये हमले शुरू हो गए। ये वही मिलिट्री बेस हैं जहां से कुछ दिनों पहले सीरिया पर केमिकल अटैक हुआ था। वॉशिंगटन पोस्ट की खबर के मुताबिक ट्रंप ने इन हमलों के आदेश सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ अमेरिका के 'राष्ट्रीय सुरक्षा हितों' के लिए दिया है।हमलों के दौरान अमेरिकी सेना ने 60 टॉमहॉक मिसाइलें दागी हैं। इन मिसाइलों को यूएस नेवी ने की वॉरशिप यूएसएस पोर्टर और यूएसएस रॉस से ईस्टर्न मेडीटेरियन सी से लॉन्च किया गया है। इनका निशाना सीरिया की एयरस्ट्रिप, एयरक्राफ्ट्स और फ्यूल स्टेशंस बने हैं जो कि श्ाायरात एयर बेस पर मौजूद हैं।जनवरी में अपना ऑफिस संभालने के बाद अभी तक का यह ट्रंप का सबसे बड़ी कार्रवाई है और यह आदेश तब आया है जब ट्रंप की विदेश नीति को लेकर कई आलोचनाएं की गई हैं।












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