इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से फेसबुक ने झाड़ा पल्ला, एक अरब लोगों की जानकारियां करेगा डिलीट
फेसबुक ने फेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी को हटाने और करोड़ों यूजर्स की निजी जानकारियों को हटाने का फैसला किया है।
सेन फ्रांसिस्को, नवंबर 03: इन दिनों फेसबुक अपने ऊपर लगे दागों को मिटाने की कोशिश कर रहा है। पहले फेसबुक का नाम बदल दिया गया और अब फेसबुक 'फेस रिकग्निशन' टेक्नोलॉजी को हटाने का ऐलान किया है। इसका मतलब ये हुआ कि, अब अगर आपकी तस्वीर को अगर कोई और व्यक्ति फेसबुक पर अपलोड करेगा, तो फेसबुक की तरफ से उसकी पहचान नहीं की जाएगी।

'फेस रिकग्निशन' टेक्नोलॉजी हटेगा
फेसबुक अपनी चेहरे की 'पहचान प्रणाली' को बंद कर रहा है और एक अरब से ज्यादा यूजर्स से जुड़ी जानकारियों को हटा रहा है। फेसबुक पर पिछले काफी लंबे वक्त से लोगों की गोपनीयता चुराने और अपने फायदे के लिए इस्तेलाम करने के आरोप लगते रहे हैं, जिसके बाद अब फेसबुक ने इस टेक्नोलॉजी को हटाने का फैसला किया है। फेसबुक को लेकर लगातार अमेरिकी कांग्रेस में बहस हो रही थी, जिसमें कहा गया था कि, फेसबुक लोगों से जुड़ी जानकारियों को बेच रहा है और अपने फायदे के लिए लोगों की निजी जानकारियों का इस्तेमाल कर रहा है। जिसके बाद अपनी छवि को बदलने के लिए फेसबुक इन कदमों को उठा रहा है।

क्या है 'फेस रिकग्निशन'?
अब तक आपने देखा होगा कि, जब भी कोई वक्ति दो या उससे ज्यादा ग्रुप के लोगों की तस्वीर फेसबुक पर अपलोड करता था, तो फेसबुक उस फोटो में मौजूद तमाम लोगों के चेहरे की पहचान कर खुद ही उन लोगों को टैग कर देता था और उन लोगों तक नोटिफिकेशन भी चली जाती थी। फेसबुक ऐसा अफने फेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर करता था। असल में बात ये थी कि, फेसबुक अपने तमाम यूजर्स की सारी जानकारियों को स्टोर करके रखता था और इसी की मदद से फेस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता था और इस डिटेक्शन टेक्नोलॉजी को लेकर काफी गंभीर सवाल उठ रहे थे कि लोगों की निजी जानकारियों को फेसबुक स्टोर करता है और फिर अपने फायदे के लिए उनका इस्तेमाल करता है।

लोगों की जानकारियां हटेंगी
मेटा की तरफ से जारी किए गये बयान में कहा गया है कि, टेक्शन टेक्नोलॉजी को बंद करने से "एक अरब से अधिक लोगों के व्यक्तिगत चेहरे की पहचान के टेम्प्लेट को हटा दिया जाएगा।" यानि, फेसबुक ने अपने सर्वर से जितने भी यूजर्स हैं, उन सभी लोगों की निजी जानकारियों को हटाने का फैसला किया है। साल 2019 में इसी टेक्नोलॉजी के चलते 'फेडरल ट्रेड कमीशन' ने फेसबुक को दोषी माना था और उसके ऊपर 500 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया था। पिछले साल भी अमेरिका में इसी टेक्नोलॉजी की वजह से फेसबुक पर 65 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया गया था। दरअसल, सबसे बड़ी चिंता फेसबुक की बायोमेट्रिक इंफॉर्मेशन को लेकर थी। वहीं, पिछले महीने फेसबुक की पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस हॉगेन व्हिसलब्लोअर बन गई थी और उन्होंने फेसबुक को लेकर कई खतरनाक खुलासे कर दिए थे, जिसकी वजह से शेयर मार्केट में भी फेसबुक के शेयर्स बुरी तरह से गिर गये थे।
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